अयोध्या आंदोलन से जुड़े परिवार के पंडित ने पैगंबर मुहम्मद की तारीफ में लिखी शायरी
68 वर्षीय पंडित राम सागर अयोध्या के 'राम लला विन्यास ट्रस्ट' को संभालने वाले परिवार से आते हैं. पंडित राम सागर विश्व ब्राहम्मण परिषद के वर्ल्ड प्रेसिडेंट भी हैं.

नई दिल्ली: जहां एक ओर देश में धार्मिक टकराव और असहिष्णुता बढ़ती हुई दिखाई देती है तो वहीं दूसरी ओर मुंबई के पंडित राम सागर पृथ्वीपल त्रिपाठी हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के बीच अमन का माहौल कायम करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं. पंडित राम सागर ने हाल ही में 'साईबान-ए-रहमत' नाम से 'नातिया शायरी' का संग्रह तैयार किया है. नातिया शायरी ऐसी शायरी को कहते हैं जिसमें इस्लाम के आखिरी पैगंबर मुहम्मद साहब की तारीफ की जाती है.
खास बात ये है कि 68 वर्षीय पंडित राम सागर अयोध्या के 'राम लला विन्यास ट्रस्ट' को संभालने वाले परिवार से आते हैं. पंडित राम सागर विश्व ब्राहम्मण परिषद के वर्ल्ड प्रेसिडेंट भी हैं. राम सागर मुशायरों में बेहद चर्चित हैं और अपनी अलग तरीके की शायरी के लिए जाने जाते हैं. राम सागर अपने शायरी की शुरूआत हमेशा एक हम्द(जो कि अल्लाह के तारीफ में की जाती है) और एक 'नातिया कलाम' से करते हैं.
राम सागर को बेहतरीन काम के लिए दर्जनों अवॉर्ड मिल चुके हैं. राम सागर ने कुरान और पैगंबर मुहम्मद की जीवनी के अलावा भगवद् गीता और रामायण पर भी काम किया है. राम सागर ने अपने घर में कई चटाई भी रख रखी है ताकि अगर उनका कोई मुस्लिम दोस्त आए तो वो नमाज पढ़ सके. सागर ने अपने शायरी में पैगंबर के संदेश, शांति और सांप्रदायिक सौहार्द्र की बातें लिखी हैं. ये दर्शाता है कि उनका मुहम्मद साहब के प्रति बेहद लगाव है.
राम सागर ने अपनी शायरी को देवनागरी और उर्दू लिपी में लिखी है. उनकी शायरी भारत की गंगा जमुनी तहजीब का बेहतरीन नमूना है. उनका कहना है कि हम ऐसे समाज के सदस्य हैं जहां राम और रहीम एक साथ रहते हैं और हिन्दू-मुस्लिम एक दूसरे के प्रति न सिर्फ सहिष्णु हैं बल्कि दोनों एक दूसरे को स्वीकार करते हैं.
उन्होंने कहा, "मुहम्मद साहब सिर्फ मुस्लिम समुदाय के नहीं हैं. वे मानवता के लिए हैं और इसमें कुछ भी गलत नहीं है अगर मैं उनसे सीखता हूं और उनसे आशिर्वाद लेता हूं." राम सागर का इस पर एक शेर कुछ इस तरह है, "सिर्फ एक कौम के नहीं हैं वो, रहमते आलमी हैं आका"
राम सागर का जन्म यूपी के सुल्तानपुर जिले में हुआ है. उन्होंने बताया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उनका वास्ता प्रसिद्ध उर्दू कवि रघुपति सहाय फिराक से हुआ. इनके दादा चाहते थे कि ये आईएएस अफसर बनें लेकिन राम सागर हमेशा से कवि बनना चाहते थे. उन्होंने कभी भी आईएएस की परीक्षा नहीं दी और उर्दू को ही अपना करिअर बनाया. हालांकि राम सागर की ज्यादातर कमाई बिजनेस के जरिए हुई.
अयोध्या के राम जन्मभूमि के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मैं इस पर ज्यादा कुछ नहीं कह सकता क्योंकि ये मामला अभी कोर्ट में है. लेकिन मेरा ये मानना है कि अगर नेताओं को इस मुद्दे से दूर रखा जाए और लोग अपना अहंकार छोड़ दे तो ये आसानी से हल हो सकता है.
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