एक्सप्लोरर

Explained: क्या असम में घटेंगे मुस्लिम विधायक? कैसे 30-35 से 20-22 सीटों तक सिमट सकता है प्रतिनिधित्व, एक्सपर्ट्स से समझें

Assam Election 2026: असम के चुनाव में सबसे बड़ी गाज मुस्लिम विधायकों पर गिर सकती है, क्योंकि डिलिमिटेशन से मुस्लिम बहुल इलाकों की सीटें कम हो गई हैं. मुस्लिम इलाकों को हिंदू इलाकों से जोड़ दिया है.

29 जनवरी 2026... असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, 'मिया मुस्लिम को किसी भी तरह परेशान करो… अगर उन्हें परेशानी होगी तो वे असम छोड़ देंगे...' असम के विधानसभा चुनाव होने में कुछ ही दिन बचे हैं, ऐसे में CM हिमंत का यह बयान ग्राउंड लेवल पर वर्किंग दिख रहा है. हालांकि, इसकी शुरुआत 2023 में डिलिमिटेशन से हो गई थी. यानी पूरे राज्य में 34 मुस्लिम बहुल सीटें थीं, जो नतीजे पलटने का दम रखती थीं. उन सीटों के इलाके बदल दिए, जिससे अब सिर्फ 20-22 सीटों पर मुस्लिम बचे हैं. तो क्या असम में मुस्लिम विधायकों का पत्ता कट जाएगा? समझते हैं एक्सप्लेनर में...

सवाल 1: असम में मुस्लिम विधायकों की मौजूदा संख्या क्या है और क्या 2026 में घटेगी?
जवाब: भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में हुए थे, जिसमें कुल 31 मुस्लिम विधायक चुने गए. इनमें 16 कांग्रेस के थे और 15 ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी AIUDF के थे. यह संख्या चुनावी नतीजे पलटने की ताकत रखती थी, लेकिन सिर्फ 5 साल बाद हालात बदल गए.

अब 9 अप्रैल 2026 को होने वाले चुनाव में मुस्लिम विधायकों की संख्या घटकर 22 रहने का अनुमान है, क्योंकि 2023 में असम में डिलिमिटेशन हुआ था. आसान शब्दों में समझें तो 126 सीटों के दायरे या सीमाएं बदल दी गईं थी. इससे मुस्लिम कैंडिडेट्स को वोट्स का बड़ा नुकसान होगा. 2011 की जनगणना के मुताबिक, असम में मुस्लिम आबादी 34% है, लेकिन प्रतिनिधित्व पहले से ही कम था, अब और घटने वाला है. यानी असम में कोई बड़ा मुस्लिम लीडर नहीं है.

सवाल 2: डिलिमिटेशन क्या है और इससे असम में क्या हुआ?
जवाब: असम में डिलिमिटेशन से 126 विधानसभा सीटें तो वैसी ही रहीं, लेकिन उनकी सीमाएं बदल दी गईं. सबसे ज्यादा असर मुस्लिम बहुल इलाकों पर हुआ. पहले 35 सीटें मुस्लिम बहुमत थीं, अब ये घटकर करीब 20 रह गई हैं. कई मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदू बहुल क्षेत्र जोड़ दिए गए, जिससे मुस्लिम वोटों का असर बिखर गया.

  • बरपेटा जिले में मुस्लिम बहुल 8 सीटें घटकर 6 हो गईं.
  • बाराक घाटी की 15 सीटें 13 रह गईं.
  • गोलपारा वेस्ट की सीटें ST आरक्षित हो गई, जहां पहले मुस्लिम विधायक जीतते थे.
  • जानीया, बाघबर और चेंगा जैसे मुस्लिम इलाकों को हिंदू बहुल क्षेत्रों के साथ जोड़ दिया गया.
  • धुबरी और बिलासिपारा दो मुस्लिम बहुल सीटें एक में मर्ज कर दी गईं.

एक्सपर्ट्स इसे 'Gerrymandering' (सीटों की हेरफेर) बता रहे हैं. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बहुल 35 सीटों को हिंदू बहुल इलाकों के साथ मिलाकर मुस्लिम वोट बिखेर दिए गए.' CPI(M) के राज्य सचिव सुप्रकाश तालुकदार ने कहा, 'हिंदू क्षेत्रों को मुस्लिम सीटों में जोड़ा गया और मुस्लिम वोटरों को हिंदू बहुल इलाकों में बांट दिया गया.'

सवाल 3: इस बदलाव का असर क्या होगा?
जवाब: पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई मानते हैं कि मुस्लिम वोटरों का 'पॉलिटिकल फुटप्रिंट' करीब 30% कम हो गया है. पहले मुस्लिम 30-35 सीटों पर निर्णायक थे, अब सिर्फ 20-22 पर. मुस्लिम प्रतिनिधित्व पहले से कम था, अब और घटेगा. अगर मुस्लिम विधायक 22 रह गए तो उनकी सामूहिक ताकत और कमजोर हो जाएगी.

असम के मुस्लिम (खासकर मिया या बंगाली मूल के) में लंबे समय से कोई एक मजबूत, सम्मानित नेता नहीं उभरा. 2024 के लोकसभा चुनाव तक AIUDF के बदरुद्दीन अजमल जैसे नेता थे, लेकिन उन्होंने अपनी सीट गंवा दी. अब न तो कोई नया चेहरा है जो पूरे समुदाय की बात रख सके, न ही पार्टियां मुस्लिम नेताओं को पाल रही हैं.

 

बदरुद्दीन अजमल ने 2024 में धुबरी लोकसभा सीट से चुनाव हारे थे
बदरुद्दीन अजमल ने 2024 में धुबरी लोकसभा सीट से चुनाव हारे थे

रशीद किदवई ने कहा, '31 मुस्लिम विधायक तो हैं, लेकिन वे अपने-अपने क्षेत्र तक सीमित हैं. विस्थापन, पुशबैक और वोटर लिस्ट से नाम कटना जैसे बड़े मुद्दों पर कोई सामूहिक आवाज नहीं उठती. कांग्रेस के मुस्लिम विधायक भी चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि बोलने से वोट कम हो जाएंगे. नतीजा? मुस्लिम समुदाय 'पॉलिटिकल नो-मैंस लैंड' में फंस गया है.'

सवाल 4: BJP की रणनीति और मिया मुस्लिमों का डर क्या है?
जवाब: CM हिमंत बिस्वा सरमा बार-बार कह चुके हैं, 'मिया वोट की जरूरत नहीं.' यानी BJP खुलेआम मुस्लिम आबादी का विरोध कर रही है. CM सरमा ने ये भी कहा, 'मिया मुस्लिमों को किसी भी तरीके से परेशान करो. अगर वे परेशान होंगे तो असम छोड़कर चले जाएंग.' मार्च 2026 में बरपेटा में उन्होंने कहा था, 'पिछली बार कुछ टांगें तोड़ीं, इस बार रीढ़ तोड़ देंगे.'

 

असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा कई बार मुसलमानों के खिलाफ कड़वे बयान दे चुके हैं
असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा कई बार मुसलमानों के खिलाफ कड़वे बयान दे चुके हैं

इससे साफ है कि BJP इस बार 89 सीटों पर एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारे. BJP ने अपना 'मुस्लिम वोट' का बोझ सहयोगी AGP पर डाल दिया है. AGP ने 26 सीटों पर 13 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं. इससे BJP की हिंदुत्व वाली छवी बनी रहेगी. AGP प्रवक्ता कस्तूरी बोरुआह ने कहा, 'BJP सिर्फ घुसपैठियों और अतिक्रमण के खिलाफ है, बंगाली मुस्लिमों के खिलाफ नहीं.'

वहीं, 2021 में कांग्रेस-AIUDF गठबंधन ने 31 मुस्लिम विधायक जिताए थे, लेकिन इस बार कोई गठबंधन नहीं. कांग्रेस मुस्लिम वोटों पर निर्भर है लेकिन मुद्दों पर चुप है. AIUDF अकेले लड़ रही है, लेकिन उसकी लोकप्रियता घटी है. विपक्ष के वोट बंटने से भी मुस्लिम उम्मीदवारों का चांस कम हो रहा है.

सवाल 5: तो क्या असम से मुस्लिम विधायकों का पत्ता साफ हो जाएगा?
जवाब: नहीं, असम से मुस्लिम विधायकों का पत्ता बिल्कुल साफ नहीं होगा. रशीद किदवई कहते हैं, '2026 के चुनाव में मुस्लिम विधायकों की संख्या 31 से घटकर 20-23 के आसपास रहने की संभावना है या सबसे ज्यादा 22 रह सकती है. पूरी तरह खत्म (zero) होने की कोई गुंजाइश नहीं है.'

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर (एबीपी लाइव- हिंदी) अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इससे पहले दो अलग-अलग संस्थानों में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी. जहां वे 5 साल से ज्यादा वक्त तक एजुकेशन डेस्क और ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. वे बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को भी लीड कर चुके हैं. ज़ाहिद देश-विदेश, राजनीति, भेदभाव, एंटरटेनमेंट, बिजनेस, एजुकेशन और चुनाव जैसे सभी मुद्दों को हल करने में रूचि रखते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Explained: क्या असम में घटेंगे मुस्लिम विधायक? कैसे 30-35 से 20-22 सीटों तक सिमट सकता है प्रतिनिधित्व, एक्सपर्ट्स से समझें
क्या असम में घटेंगे मुस्लिम विधायक? 34 से 20 सीटों तक सिमटेगा प्रतिनिधित्व! एक्सपर्ट्स से समझें
नेगेटिव CIBIL स्कोर से परेशान था शख्स, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और तुरंत दूर हो गई उलझन, जानें कैसे
नेगेटिव CIBIL स्कोर से परेशान था शख्स, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और तुरंत दूर हो गई उलझन, जानें कैसे
‘खवातीन विंग’ का खतरनाक प्लान बेनकाब, 6 राज्यों में छापा, आतंकी नेटवर्क से जुड़े 12 गिरफ्तार
‘खवातीन विंग’ का खतरनाक प्लान बेनकाब, 6 राज्यों में छापा, आतंकी नेटवर्क से जुड़े 12 गिरफ्तार
'सिविल ड्रेस हो और अपनी पहचान भी छिपाएं...', गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची से रेप मामले में SC ने SIT को क्यों दिया ऐसा सख्त आदेश?
'सिविल ड्रेस हो और अपनी पहचान भी छिपाएं...', गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची से रेप मामले में SC ने SIT को क्यों दिया ऐसा सख्त आदेश?
Advertisement

वीडियोज

Iran Vs US-Israel War: ईरान की 'Missile City'! क्यों भेदने में US का Advance Satellite भी फेल ?
Iran Vs US-Israel War: ईरान की सेना IRGC अपने ही देश के खिलाफ बगावत करेगी? Reza Pahlavi का दांव!
Trump Final Ultimatum to Iran: ट्रंप का 'धमकी मीटर'..Iran को बार-बार चेता रहे! | Iran Israel War
Iran US-Israel War: Shadow War तो बस झांकी थी,अब 'Epic Fury' ! क्या दहल जाएगा मिडिल ईस्ट?
Iran US-Israel War: ईरान की नाक के नीचे से पायलट को निकाल ले गया इजरायल! | Pilot Rescue
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement
Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
युद्ध के बीच ईरान को बड़ा झटका , यूएस-इजरायल हमले में मारे गए IRGC इंटेलिजेंस चीफ
युद्ध के बीच ईरान को बड़ा झटका , यूएस-इजरायल हमले में मारे गए IRGC इंटेलिजेंस चीफ
Patna News: पटना रेलवे स्टेशन पर नॉर्थ ईस्ट की लड़कियों से बदसलूकी, टॉयलेट जाने से रोका, नस्लीय टिप्पणी की
पटना रेलवे स्टेशन पर नॉर्थ ईस्ट की लड़कियों से बदसलूकी, टॉयलेट से जाने रोका, नस्लीय टिप्पणी की
पाकिस्तान में हफ्ते में 4 दिन काम, 50% WFH, बांग्लादेश में गैर-जरूरी यात्रा पर रोक, तेल संकट से कैसे निपट रहे भारत के पड़ोसी मुल्क?
PAK में 4 दिन काम, 50% WFH, बांग्लादेश में गैर-जरूरी यात्रा पर रोक, तेल संकट से कैसे निपट रहे भारत के पड़ोसी मुल्क?
एमएस धोनी की वापसी पर सस्पेंस खत्म! IPL 2026 में इस दिन खेलेंगे अपना पहला मैच
धोनी की वापसी पर सस्पेंस खत्म! IPL 2026 में इस दिन खेलेंगे अपना पहला मैच
'धुरंधर 2' ने बदली एक्टर की किस्मत, बोले- आदित्य धर ने स्क्रिप्ट पढ़ने के लिए भी रखी थी शर्त
'धुरंधर 2' ने बदली एक्टर की किस्मत, बोले- आदित्य धर ने स्क्रिप्ट पढ़ने के लिए भी रखी थी शर्त
Explained: क्या असम में घटेंगे मुस्लिम विधायक? कैसे 30-35 से 20-22 सीटों तक सिमट सकता है प्रतिनिधित्व, एक्सपर्ट्स से समझें
क्या असम में घटेंगे मुस्लिम विधायक? 34 से 20 सीटों तक सिमटेगा प्रतिनिधित्व! एक्सपर्ट्स से समझें
Home Pedicure Tips: घर पर ऐसे करें पेडिक्योर, एक भी रुपया नहीं होगा खर्च
घर पर ऐसे करें पेडिक्योर, एक भी रुपया नहीं होगा खर्च
कमीशनखोरी रोकने के लिए यूपी बोर्ड का बड़ा कदम, स्कूलों में NCERT और सरकारी किताबें अनिवार्य
कमीशनखोरी रोकने के लिए यूपी बोर्ड का बड़ा कदम, स्कूलों में NCERT और सरकारी किताबें अनिवार्य
Embed widget