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Assam Assembly Elections Result 2026: असम में बीजेपी ने कैसे किया कमाल, क्यों बाकी पार्टियां नहीं दिखा पाईं दम?

Assam Assembly Elections Result 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के शुरुआती रुझानों में भाजपा बढ़त बनाए हुए है. इसी बीच आइए जानते हैं कि असम में विपक्ष अपना दम दिखाने में नाकाम क्यों रहा.

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  • भाजपा ने हिमंता बिस्वा के नेतृत्व में असम में बहुमत हासिल किया।
  • विकास, कल्याण योजनाओं और पहचान की राजनीति ने चुनाव जीता।
  • विपक्ष एकजुट न होने और संगठनात्मक कमजोरी से मुकाबला नहीं कर सका।
  • परिसीमन और मतदाता धारणा ने भाजपा के पक्ष में काम किया।

Assam Assembly Elections Result 2026: 2026 के असम विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल और शुरुआती गिनती के रुझानों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी राज्य में अपना दबदबा फिर से कायम करती नजर आ रही है. गिनती के पहले घंटे में ही भाजपा लगभग 83 सीटों पर बढ़त बनाकर आगे निकल गई और कांग्रेस 27 सीटों पर आगे चल रही है. शुरुआती आंकड़े बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के लिए स्पष्ट बहुमत का संकेत दे रहे हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर भाजपा ने असम में कमाल कैसे दिखाया और बाकी पार्टियां विफल होती क्यों नजर आ रही हैं? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

हिमंता बिस्वा की मजबूत पकड़ 

भाजपा के प्रदर्शन के पीछे एक मुख्य स्तंभ हिमंता बिस्वा सरमा हैं. अपने मुखर और जमीनी शासन शैली के लिए जाने जाने वाले सरमा ने मतदाताओं के साथ एक मजबूत जुड़ाव बनाया है. प्रशासनिक नियंत्रण को बनाए रखने कि उनकी क्षमता को अक्सर असम में भाजपा का सबसे बड़ा फायदा बताया गया है. 

विकास के मुद्दे 

भाजपा का चुनाव प्रचार मुख्य रूप से विकास पर केंद्रित था. बुनियादी ढांचा परियोजना, बेहतर सड़क संपर्क और निवेश आधारित पहलों को ठोस उपलब्धियों के रूप में पेश किया गया. बड़े ऐलान जैसे कि औद्योगिक निवेश और राष्ट्र विकास से जुड़ी परियोजनाएं इस धारणा को मजबूत करने में काफी मददगार साबित रहे कि भाजपा शासन के तहत असम आगे बढ़ रहा है. भाजपा सरकार ने ऑरुनोदोई जैसी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजनाओं के जरिए महिलाओं और गरीब परिवारों तक सीधी पहुंच बनाई. 

कल्याण और पहचान की राजनीति का मेल 

पार्टी सिर्फ विकास पर ही निर्भर नहीं रही. भाजपा का मुद्दा अवैध प्रशासन और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दों को उठाना भी था. इससे एक ऐसा माहौल बना जो मतदाताओं की आर्थिक आकांक्षा और सांस्कृतिक चिंता दोनों को ही भा गया. भाजपा ने अवैध प्रवासन और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम जैसे मुद्दों को ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल किया. वहीं विपक्ष इन मुद्दों पर अपनी स्थिति साफ करने में असमर्थ रहा.

इसी के साथ भाजपा की सबसे बड़ी ताकतों में से एक उसका जमीनी स्तर का संगठन था. सिर्फ राष्ट्रीय बहसों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय पार्टी ने स्थानीय मुद्दों पर ध्यान दिया और बूथ स्तर पर एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया. 

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विपक्ष मुकाबला करने में क्यों नाकाम रहा 

कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को एकजुट और मजबूत चुनौती पेश करने में संघर्ष करते देखा गया। गौरव गोगोई नेतृत्व में होने के बावजूद भी हिमंता बिस्वा के प्रभाव और लोकप्रियता का मुकाबला करने में विफल होते नजर आए. आंतरिक तालमेल की कमी और कमजोर संगठनात्मक शक्ति ने भी इसमें एक बड़ी भूमिका निभाई. भाजपा की सुव्यवस्थित चुनावी मशीनरी की तुलना में विपक्ष बिखरा हुआ और कम तैयार नजर आया. 

इसी के साथ कांग्रेस ने एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन नहीं किया. इससे कई मुस्लिम बहुल सीटों पर वोटों का बंटवारा हो गया. इसके अलावा रायजोर दल और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर भी लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रही। इसका सीधा फायदा सत्ताधारी दल को मिला.

धारना और जन विश्वास का अंतर 

एक और अहम पहलू मतदाताओं की धारणा थी. भाजपा ने इस नैरेटिव को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया कि पिछली सरकारों ने पूर्वोत्तर को नजरअंदाज किया था. इस संदेश के साथ-साथ दिखाई देने वाले विकास कार्यो ने मतदाताओं के बीच विश्वास जगाने में मदद की. 

इसी के साथ 2023 में हुए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन ने भी चुनावी समीकरणों को काफी हद तक बदला. इस प्रक्रिया से कई अल्पसंख्यक बहुल सीटों का प्रभाव कम हो गया और उनकी संख्या लगभग 35 से घटकर 23 ही रह गई. इस वजह से विपक्षी दलों के लिए वोट टू सीट कन्वर्जन काफी ज्यादा मुश्किल हो गया.

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स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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