चीन से सीमा पर चल रहे टकराव के बीच राजधानी दिल्ली में शुरू हुआ आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस
चीन से हो रहे सीमा विवाद के बीच भारतीय सेना का तीन-दिवसीय आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस शुरू हुआ. यह तीन-दिवसीय आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस राजधानी दिल्ली में हो रहा है.

नई दिल्लीः चीन से चल रहे टकराव के बीच बुधवार को राजधानी दिल्ली में सेना का तीन-दिवसीय आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस शुरू हुआ. थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के नेतृत्व में अगले तीन दिनों में सेना के शीर्ष कमांडर देश की रक्षा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गहनता से विचार करेंगे और साझा फैसला लेंगे.
खास बात ये है कि ये कमांडर्स सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब सीमा पर चीन से विवाद और टकराव चल रहा है. हर छह महीने में होने वाली इस कांफ्रेंस में सबसे लंबा सेशन सेना की ऑपरेशनल तैयारियों यानि युद्ध-क्षमताओं पर ही होता है.
हालांकि, इस सम्मेलन की सारी ऑपरेशन्ल जानकारियां सिर्फ कमांडर्स और वहां मौजूद सीनियर आर्मी ऑफिसर्स तक ही सीमित होती है, लेकिन माना जाता है कि शुरूआत थलसेना प्रमुख के भाषण से होती है. इस भाषण में देश की सीमाओं की सुरक्षा के बारे में सभी कमांडर्स को अवगत कराया जाता है. सेनाध्यक्ष का जोर वेस्टरर्न बॉर्डर यानि पाकिस्तान और नार्दन बॉर्डर यानि चीन सीमा पर टकराव और सेना की तैयारियों को लेकर होता है. इस बार ये इसलिए अहम हो जाता है कि चीन से सीमा पर कई जगह विवाद चल रहा है.
हर बार की तरह सेना की सभी सातों कमांड इन तीनों दिनों में अपने अपने क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रेजेंटेशन देंगी. लेकिन सबकी निगाहें उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी (जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ), लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी पर लगी होंगी. क्योंकि उत्तरी कमान के अधिकार क्षेत्र में ही लद्दाख से सटी चीन सीमा आती है. इसके साथ ही पाकिस्तान से सटे एलओसी, करगिल और सियाचिन भी उत्तरी कमान के अंतर्गत आता है. लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी करगिल युद्ध के हीरो रह चुके हैं और 2016 में पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक के समय एडिशनल डीजीएमओ के पद पर थे. 'एलओसी-करगिल' फिल्म में वाई के जोशी का रोल संजय दत्त ने किया था.
दूसरी निगाह लगी होगी कोलकता स्थित पूर्वी कमान पर लगी होगी जिससे अंतर्गत उत्तरी सिक्किम से सटी चीन सीमा आती है. पूर्वी कमान की जिम्मेदारी इनदिनों लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान के पास है जो यहां तैनात होने से पहले डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स) रह चुके हैं.
लेकिन सूत्रों ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए थलसेनाध्यक्ष कुछ कमांडर्स से बंद दरवाजे में चर्चा कर सकते हैं. सेना के सात बड़े कमांडर्स के साथ साथ इस सम्मेलन में थलसेना प्रमुख के पीएसओ यानि प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर्स भी मौजूद रहेंगे. जैसे डीजीएमओ, मिलिट्री सेकरेटरी (एमएस) और एडज्युटेंट-जनरल इत्यादि.
सम्मेलन से पहले सेना के प्रवक्ता, कर्नल अमन आनंद ने बया जारी कर कहा कि, "भारतीय सेना का शीर्ष स्तर का नेतृत्व मौजूदा और उभरती सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियों पर विचार-मंथन करेगा और भारतीय सेना के लिए भविष्य का प्लान तैयार करेगा...सम्मेलन के दौरान कॉलेजिएट प्रणाली के माध्यम से निर्णय लिए जाते हैं."
आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस साल में दो बार होती है. इस बार ये अप्रैल में होनी थी लेकिन कोरोना महामारी के चलते टाल दी गई थी. छह दिन तक चलने वाली ये कांफ्रेंस अब दो चरण में होगी. पहला 27-29 मई तक और दूसरा चरण जून के आखिरी में.
दूसरी कमांडर्स कांफ्रेंस अमूमन अक्टूबर के महीने में होती है. रक्षा मंत्री भी एक सेशन को संबोधित करते हैं. लेकिन इस बार अप्रैल के महीने में ही वे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कमांडर्स को संबोधित कर चुके हैं. ऑपरेशन्स के साथ साथ सेना के प्रशासनिक मामलों, सैनिकों के वेलफेयर से जुड़ी पॉलिसी पर भी सम्मेलन का खास जोर होता है.
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