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Amazon Business: Amazon का 35 अरब डॉलर निवेश! क्या भारतीय रिटेल और परंपरागत बाजारों के लिए खतरे की घंटी?

अमेजन के 35 अरब डॉलर निवेश ने ई-कॉमर्स सेक्टर को उत्साहित कर दिया है, लेकिन छोटे व्यापारियों, बाजारों और घरेलू उत्पादकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.

अमेजन की तरफ से भारत में 35 अरब डॉलर के मेगा निवेश की घोषणा ने ई-कॉमर्स सेक्टर को उत्साहित जरूर किया है, लेकिन छोटे व्यापारियों और स्थानीय बाजारों में गहरी चिंता पैदा कर दी है. व्यापार जगत का मानना है कि इस निवेश के पीछे तकनीक और ऑटोमेशन का ऐसा तंत्र खड़ा होगा, जो आने वाले वर्षों में भारतीय रिटेल संरचना को पूरी तरह बदल सकता है. सवाल यह है कि क्या यह बदलाव अवसर लेकर आएगा या फिर लाखों छोटे व्यापारियों की आजीविका के लिए नई चुनौती बनकर खड़ा होगा?

दिल्ली व्यापार महासंघ (पंजी.) के अध्यक्ष देवराज बवेजा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने एबीपी लाइव की टीम को जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत में विदेशी कंपनियों के आगमन का इतिहास हमेशा सवालों के घेरे में रहा है. ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर आधुनिक वैश्विक ब्रांडों तक—शुरुआत हमेशा व्यापार बढ़ाने की नीयत से होती है, लेकिन कुछ वर्षों में उनका बाजार पर एकाधिकार स्थापित हो जाता है. व्यापारी संगठन मानते हैं कि अमेजन का नया निवेश उसी सिलसिले की आधुनिक किस्त हो सकता है.

छोटे दुकानदार बनाम अमेज़न

बवेजा और कपूर के मुताबिक, भारतीय छोटा दुकानदार सीमित इन्वेंट्री, बढ़ते किराए और लागत की मार झेल रहा है. दूसरी ओर अमेज़ॉन के पास अपार पूंजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित लॉजिस्टिक्स, भारी डिस्काउंट ऑफर, बड़े वेयरहाउस और 24×7 डिजिटल पहुंच है. ऐसे में प्रतियोगिता की जमीन पहले से ही आसमान हो चुकी है. व्यापारियों का साफ कहना है कि यह मुकाबला लंबे समय में छोटे दुकानदारों को खत्म करने वाला साबित हो सकता है.

घरेलू उत्पादकों को प्राइवेट लेबल का खतरा

अमेजॉन अपने प्राइवेट लेबल उत्पाद बहुत कम कीमत पर उतारता है. इससे छोटे भारतीय निर्माताओं की बिक्री पर सीधा असर पड़ता है. उत्पादन इकाइयों, कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह ट्रेंड बढ़ा, तो देश की विनिर्माण क्षमता और रोजगार पर बड़ा असर पड़ेगा.

चांदनी चौक से खारी बावली तक, सदियों पुराने बाजारों पर संकट

दिल्ली के सदर बाजार, करोल बाग, खारी बावली, गांधी नगर जैसे बाजार सिर्फ व्यापार के केंद्र नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी हैं. ई-कॉमर्स कंपनियों की कीमतों और डिलीवरी मॉडल के सामने इन बाजारों की ग्राहक संख्या पहले ही प्रभावित होने लगी है. व्यापारियों को डर है कि आने वाले समय में इन ऐतिहासिक बाजारों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है.

टेक्नोलॉजी और ऑटोमेशन से रोजगार पर मार

अमेजन का नया निवेश मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और बड़े ऑटोमेटेड वेयर हाउस में होगा. इससे स्थानीय डिलीवरी नेटवर्क, छोटे गोदाम मजदूर, दुकानदार और माइक्रो-उत्पादकों के रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है. व्यापारी संगठनों का अनुमान है कि यह ट्रेंड बेरोजगारी बढ़ा सकता है.

विदेशी दिग्गजों के मुनाफे पर टैक्स का सवाल

व्यापारी संगठनों का तर्क है कि विदेशी कंपनियां अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा टैक्स संरचनाओं के जरिए विदेश भेज देती हैं. इसके मुकाबले भारतीय व्यापारी हर स्तर पर टैक्स चुकाते हैं. इस असंतुलन को व्यापार जगत भारत की अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक जोखिम मानता है.

दिल्ली व्यापार महासंघ का विरोध: सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

दिल्ली व्यापार महासंघ (पंजी.) ने अमेजन के निवेश का कड़ा विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यह कदम भारतीय व्यापार शैली और छोटे व्यापारियों की परंपरा पर ‘अंतिम कील’ साबित हो सकता है.महासंघ का कहना है कि इससे लाखों परिवारों की आजीविका पर सीधा खतरा मंडरा रहा है.

नीति समाधान ही बचाव का रास्ता?

महासंघ ने सरकार से मांग की है कि ऐसे निवेश पर तत्काल रोक लगाई जाए और छोटे व्यापारियों, घरेलू उद्योग और स्थानीय उद्यमियों की रक्षा के लिए ठोस नीति लागू की जाए, ताकि विदेशी कंपनियां भारत के बाजार पर मनमर्जी से एकाधिकार न कर सकें.

ये भी पढ़ें: तो क्या सबको चांद पर रहने भेज दें? देश में भूकंप के खतरे की बात कर रहे याचिकाकर्ता से सुप्रीम कोर्ट ने कहा

अभिषेक नयन का पत्रकारिता में लंबा अनुभव है. साल 2011 से ABP News से जुड़े हैं. दिल्ली-NCR की राजनीतिक, सामाजिक और नागरिक समस्याओं की जमीनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग करते हैं.

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