एक्सप्लोरर

EXPLAINED: चलता-फिरता ताबूत बनीं स्लीपर बसें, 14 दिन में 50 से ज्यादा मौतें, क्या अब महफूज नहीं बस का सफर?

ABP Explainer: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसा नहीं कह सकते कि स्लीपर बसों में सफर करना असुरक्षित है. अगर कुछ सावधानियां बरती जाएं, तो सफर महफूज हो सकता है.

28 अक्टूबर को जयपुर में एक बस हाईटेंशन लाइन से टकरा गई, जिससे बस में करंट आ गया और आग लग गई. बस में रखे कई गैस सिलेंडर भी फट गए. इस हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई और 10 मजदूर झुलस गए.

5 दिन पहले यानी 23 अक्टूबर को भी हैदराबाद से बेंगलुरु के लिए निकली लग्जरी स्लीपर बस में आग लगी थी. इसमें सवार 40 लोग दीपावली की छुट्टियों के बाद लौट रहे थे. लेकिन कुर्नूल जिले के चिन्नाटकुरु गांव के पास अचानक बस आग का गोला बन गई और 20 लोग जिंदा जल गए.

तो आइए ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि स्लीपर बसों में हादसे क्यों बढ़ रहे, भारत में इनके बैन की मांग क्या और कैसे सुरक्षित होगा बस का सफर...

सवाल 1- 2025 में स्लीपर बसों के हादसों और मौत का पैटर्न क्या बन गया है?
जवाब- 2025 में अब तक 6 बड़े बस हादसे हुए, जिसमें हाल ही में हुआ जयपुर बस हादसा भी शामिल है. 4 बड़े हादसे तो बीते 14 दिनों में ही सामने आए, जिसमें करीब 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई...

  • 26 अक्टूबर: लखनऊ में आगरा एक्सप्रेस-वे पर चलती AC बस का टायर फट गया. इसके बाद बस में आग लग गई. बस में 70 यात्री सवार थे, सभी बाल-बाल बचे.
  • 25 अक्टूबर: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में शनिवार रात बस में आग लग गई. यह शिवपुरी जिले के पिछोर से इंदौर जा रही थी. बस पूरी तरह जल गई. इसमें इंदौर जाने वाले यात्री सवार थे. बस में सवार एक पुलिसकर्मी और ड्राइवर ने कांच तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला. हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ.
  • 23 अक्टूबर: आंध्र प्रदेश के कुरनूल में एसी बस से बाइक टकराने के बाद आग लग गई थी. हादसे में 20 लोगों की जलकर मौत हो गई. 19 यात्रियों ने बस से कूदकर जान बचाई.
  • 14 अक्टूबर: जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर चलती एसी स्लीपर बस में आग लग गई थी. इस हादसे में 27 यात्रियों की मौत हो गई थी.
  • 15 मई: बिहार के बेगूसराय से दिल्ली जा रही बस में लखनऊ के किसान पथ पर आग लग गई. इसमें 2 बच्चों समेत 5 लोगों की मौत हो गई थी.

पिछले 3 साल में स्लीपर बसों के 8 बड़े हादसों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. इन 8 में से 7 हादसे रात के वक्त हुए. उसमें भी 60% हादसे रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच. ज्यादातर मामलों में मौतों का आंकड़ा इसलिए बढ़ा, क्योंकि लोग समय पर बाहर नहीं निकल सके.

  • 19 अक्टूबर 2024: राजस्थान के धौलपुर में एक स्लीपर बस और टेंपो की टक्कर में 12 लोगों की मौत हो गई. हादसा रात करीब 11 बजे हुआ था.
  • 8 नवंबर 2023: जयपुर से दिल्ली जा रही एक स्लीपर बस में गुरुग्राम के पास आग लग गई. इसमें 2 लोगों की मौत हो गई और 12 लोग झुलस गए.
  • 1 जुलाई 2023: महाराष्ट्र में मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे पर एक स्लीपर बस टायर फटने से खंभे से टकरा गई. टक्कर से बस का डीजल टैंक फट गया और आग लग गई. इस हादसे में 26 लोगों की मौत हुई थी.
  • 8 अक्टूबर 2022: महाराष्ट्र के नासिक में मुंबई जा रही प्राइवेट बस के ट्रक से टकराने के बाद आग लग गई. इसमें दो साल के बच्चे सहित 12 लोगों की मौत हो गई.
  • 3 जून 2022: कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के कमलापुरा कस्बे के पास एक स्लीपर बस का एक्सीडेंट हो गया. इसमें 7 लोगों की जलकर मौत हो गई.

 

कर्नाटक में एक स्लीपर बस में 7 लोगों की जलकर मौत हो गई थी.
कर्नाटक में एक स्लीपर बस में 7 लोगों की जलकर मौत हो गई थी.

सवाल 2- स्लीपर बसों में बढ़ते हादसे और जानलेवा बनने की वजहें क्या?
जवाब- स्लीपर बसों के हादसे और जानलेवा बनने की 4 बड़ी वजहें हैं...

1. स्लीपर बसों का डिजाइन ही खतरा: यात्रियों का निकलना मुश्किल

  • आमतौर पर 2x1 स्लीपर बस में आमने-सामने दाईं तरफ दो बर्थ और बाई तरफ एक बर्थ होती है. एक स्लीपर बस में 30-40 बर्थ होती हैं और हर बर्थ 6 फीट लंबी और 2.6 फीट चौड़ी होती है.
    गलियारा इतना तंग होता है कि दो लोग साथ नहीं चल सकते. ज्यादातर बसों में 2 से 3 फीट का ही गलियारा होती है. हादसे के दौरान हड़बड़ाहट की स्थिति में तेजी से एक से ज्यादा लोगों का बस से बाहर निकलना नामुमकिन होता है.
  • ज्यादातर स्लीपर बसें डबल-डेकर होती हैं. ऊपर की बर्थों पर सो रहे यात्रियों को नीचे उतरकर बस से बाहर निकलने के लिए और भी कम समय मिलता है, जिससे कैजुअलिटी बढ़ जाती है.
  • महाराष्ट्र स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन यानी MSRTC की बसों का नया लुक तैयार करने वाले रवि महेंदले के मुताबिक, स्लीपर बसों में आवाजाही के लिए बहुत कम जगह होती है. ऐसे में हादसे में लोग वहीं पर फंस जाते हैं. ये बसें आम तौर पर 8-9 फीट ऊंची होती हैं. अगर बस अचानक एक तरफ झुक जाए, तो यात्रियों के लिए गेट तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है.

 

स्लीपर बसों में आवाजाही के लिए बहुत कम जगह होती है.
स्लीपर बसों में आवाजाही के लिए बहुत कम जगह होती है.

2. स्लीपर बसों का मॉडिफिकेशनः साज-सज्जा के लिए एमरजेंसी एग्जिट बंद

  • एसी स्लीपर बसों के ट्रैवेलिंग के बिजनेस में प्राइवेट ट्रैवेलिंग कंपनियां हैं. इन कंपनियों की सैकड़ों गाड़ियां बिना रुके लगातार चलती रहती हैं.
  • पुरानी बसों के रजिस्ट्रेशन, फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट, फायर सेफ्टी टूल्स की कमी और पुरानी बसों में गैरकानूनी तरीके से AC सिस्टम का मॉडिफिकेशन करने की शिकायत आती है.
  • ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (SIS) के मानकों के तहत बसों के मॉडिफिकेशन का नियम है, लेकिन ज्यादातर मामलों में इन मानकों का ध्यान नहीं दिया जाता. मॉडिफिकेशन के चलते इनमें इमरजेंसी एग्जिट या तो हटा दिया जाता है या बंद कर दिया जाता है.

 

एक बस में इमरजेंसी एग्जिट की जगह सीट लगा दी गई. (फाइल फोटो)
एक बस में इमरजेंसी एग्जिट की जगह सीट लगा दी गई. (फाइल फोटो)

3. ज्वलनशील सामान और खराब तारें: एक्सीडेंट होने पर आग तेजी से फैलती है

  • स्लीपर बसों के अंदर पर्दे, बर्थ कवर और प्लास्टिक पैनल जल्दी जल जाते हैं. लाइट्स, चार्जर और एसी जैसी एक्स्ट्रा चीजें तारों को ओवरलोड कर देती हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट होता है.
  • स्लीपर बसों में एयर कंडीशनिंग यूनिट लगाने के लिए पूरी बस में वायरिंग करनी पड़ती है. एसी का मोटर और वायरिंग शॉर्ट सर्किट या एक्सीडेंट होने पर आसानी से आग पकड़ लेता है.
  • एसी बसों में R-32 या R-410A नाम की गैस इस्तेमाल होती है, जो ज्वलनशील होती है. अगर गैस का पाइप लीक हो जाए, तो आग भड़क सकती है.
  • एसी का लोड उठाने के लिए ज्यादातर डीजल बसों को स्लीपर में मॉडिफाई किया जाता है. एक्सीडेंट होने पर टैंक में भरा डीजल भी आग के लिए फ्यूल का काम करता है.

4. ड्राइवर की थकान और ओवरस्पीड: रात की यात्रा में जोखिम

  • ज्यादातर स्लीपर बसें 300 से 1000 किलोमीटर या उससे ज्यादा का सफर रात में ही तय करती हैं. ऐसे में ड्राइवर के थकने और झपकी आ जाने की संभावना होती है. कई हादसों में ड्राइवर के सो जाने की बात कही गई.
  • केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने 2018 में 15 राज्यों के बस ड्राइवरों पर एक सर्वे किया था. इसमें शामिल 25% ड्राइवरों ने स्वीकार किया था कि गाड़ी चलाते समय वे सो गए थे.
  • हाईवे पर गाड़ी चलाते समय हाईवे हिप्नोसिस की वजह से ड्राइवर को सड़क पर गाड़ी की कंडीशन का ध्यान नहीं रहता या फिर नींद आ जाती है. आधी रात से सुबह 6 बजे के बीच इसकी संभावना सबसे ज्यादा होती है.
  • महाराष्ट्र के बुलढाणा में हुए स्लीपर बस के हादसे में 26 लोगों की मौत हुई थी. शहर के SP सुनील कडासने ने आशंका जताई थी कि बस पर कंट्रोल खोने से पहले ड्राइवर को चक्कर आ गया था या वह सो गया था.

सवाल 3- तो क्या अब स्लीपर बसों में सफर करना महफूज नहीं?
जवाब- भारत के रोड सेफ्टी एक्सपर्ट अश्विनी बग्गा के मुताबिक, ऐसा नहीं कह सकते कि स्लीपर बसों में सफर करना असुरक्षित है. कुछ हादसों की वजह से ट्रांसपोर्टेशन की छवि जरूर खराब होती है और एक ट्रेंड बन जाता है. लेकिन यह अक्सर होने वाली चीज नहीं है. जैसे बीते कुछ दिनों में हवाई जहाजों में हादसे बढ़ गए थे, तो सवाल उठने लगे कि हवाई सफर सुरक्षित नहीं. इसी तरह अब बसों के सफर की चर्चा है. अगर कुछ सावधानियां बरती जाएं, तो सफर महफूज हो सकता है. किसी भी बस में सफर करने से पहले उसके इमरजेंसी एग्जिट, सेफ्टी चेक, सेफ्टी सर्टिफिकेट, ट्रेवल हिस्ट्री और लोअर बर्थ की सीट चुनें. इससे हादसा होने पर आपके बचने की संभावना बढ़ जाती है.

सवाल 4- तो फिर कैसे स्लीपर बसों के सफर को सुरक्षित बनाया जा सकता है?
जवाब- एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 6 तरीकों से बसों का सफर सुरक्षित हो सकता है...

  1. बसों के मॉडिफिकेशन के समय पुरानी बसों को नए सर्टिफिकेट के साथ चलाने पर पाबंदी हो.
  2. एसी बसों के मॉडिफिकेशन में अच्छी क्वालिटी की वायरिंग, गैस टैंक और मोटर का इस्तेमाल हो.
  3. स्लीपर बसों में सीटें कम करके गलियारे को चौड़ा किया जाए.
  4. डबल-डेकर के बजाय सिंगल फ्लोर बसें चलाई जानी चाहिए.
  5. बचे हुए स्पेस का इस्तेमाल करके इमरजेंसी एक्जिट और सेफ्टी टूल्स की व्यवस्था की जाए.
  6. लंबे रूट पर बसों में दो ड्राइवर रखने का नियम बनाया जाए.

सवाल 5- तो क्या भारत में स्लीपर बसें बैन हो जाएंगी?
जवाब- अश्विनी बग्गा कहते हैं कि भारत में स्लीपर बसों को बैन करना समस्या का समाधान नहीं है. अगर सारी बसें बंद कर दीं तो रेलवे समेत अन्य ट्रांसपोर्टेशन पर बोझ बढ़ेगा. हर जगह रेलवे की कनेक्टिविटी नहीं है और न ही हर जगह ट्रेन से पहुंचा जा सकता है. मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास के लिए बस का सफर ही मुफीद होता है. कई जगहों पर सिर्फ बसों से ही पहुंचा जा सकता है. इसलिए बसों को बैन तो नहीं किया जा सकता, हालांकि कुछ सुरक्षा मानकों को पूरा करके बसों का सफर सुरक्षित जरूर किया जा सकता है.

स्लीपर बसें सबसे पहले अमेरिका में शुरू हुई थीं. 1930 के दशक में म्यूजिक बैंड ग्रुप्स के लिए इन्हें बनाया गया, ताकि लंबी यात्राओं के दौरान बैंड और क्रू सो सकें. धीरे-धीरे ये बसें दुनिया भर में आम पैसेंजर्स के लिए भी इस्तेमाल होने लगीं. हालांकि इससे जुड़े खतरे के चलते कई देशों ने अपने यहां स्लीपर बसों पर पाबंदी लगा दी है...

  • इंग्लैंड में 2000 से ही जनरल स्लीपर बसों पर बैन है, कुछ स्पेशल टूरिस्ट स्लीपर बसें चलती हैं.
  • जर्मनी में 2006 से स्लीपर बसों पर बैन है.
  • इसी साल यूरोपियन यूनियन के भी ज्यादातर देशों में स्लीपर बसों को बैन कर दिया गया.
  • 28 अगस्त 2012 को चीन में एक स्लीपर बस हादसे में 36 लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद स्लीपर बसों के नए रजिस्ट्रेशन पर बैन लगा दिया गया.

 

2012 में चीन के शानक्सी प्रांत में एक स्लीपर बस मेथनॉल टैंकर से टकरा गई थी, जिसमें 36 लोगों की मौत हो गई थी.
2012 में चीन के शानक्सी प्रांत में एक स्लीपर बस मेथनॉल टैंकर से टकरा गई थी, जिसमें 36 लोगों की मौत हो गई थी.

हालांकि, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा जैसे दुनिया के करीब 40 देशों में स्लीपर बसें चलती हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भारत के मुकाबले इन देशों में स्लीपर बसों की संख्या कम है. डाटा एनालिसिस फर्म स्टैटिस्टा के मुताबिक, भारत में कुल करीब 23 लाख बसें हैं, इनमें करीब 20 लाख प्राइवेट बसें हैं. इनमें से करीब 10% यानी करीब 2 लाख स्लीपर बसें हैं.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

'भारत में है राजनीतिक स्थिरता', PM मोदी बोले- रिफॉर्म हमारे लिए नहीं कम्पल्शन
'भारत में है राजनीतिक स्थिरता', PM मोदी बोले- रिफॉर्म हमारे लिए नहीं कम्पल्शन
बाहर लबालब पानी और छत पर शव..., 18 घंटे तक मदद की गुहार के बाद अंतिम संस्कार
बाहर लबालब पानी और छत पर शव..., 18 घंटे तक मदद की गुहार के बाद अंतिम संस्कार
जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने हिरासत में लिया, जानें क्या है इनकी मांग?
जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने हिरासत में लिया, जानें क्या है इनकी मांग?
यमन-सोमालिया के पास अगवा जहाजों पर 22 भारतीय मौजूद, सरकार बोली- सभी सुरक्षित
यमन-सोमालिया के पास अगवा जहाजों पर 22 भारतीय मौजूद, सरकार बोली- सभी सुरक्षित

वीडियोज

Janhit With Chitra Tripathi: Nripendra Mishra...Champat Rai के टारगेट पर क्यों आए? | Donation Scam
Chirag Paswan Exclusive: CM Samrat को लिखी चिट्ठी का क्या राज? EXCLUSIVE बातचीत में खुला राज!
Sandeep Chadhary: राष्ट्रगीत बहाना...मुस्लिम वोटबैंक पर निशाना? | Vande Mataram Row| BJP | Congress
Sugar Price Hike: चीनी के दाम बढ़े तो सरकार ने कसी लगाम, स्टॉक पर रोक | Breaking | New Price
Chitra Tripathi: 2 छंद Vs 6 छंद, राष्ट्रगीत पर जंग क्योंं? विश्लेषकों का विश्लेषण| Vande Mataram Row

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
तुर्किए ने इजरायल के PM बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जारी किया गिरफ्तारी वारंट
तुर्किए ने इजरायल के PM बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जारी किया गिरफ्तारी वारंट
राहुल गांधी और साहिल के साथ दिखीं वकील कौन हैं?
राहुल गांधी और साहिल के साथ दिखीं वकील कौन हैं?
निरहुआ का खुला बरसों पुराना राज, पाखी हेगड़े ने कबूली रिलेशनशिप की बात, आम्रपाली शॉक्ड
निरहुआ का खुला बरसों पुराना राज, पाखी हेगड़े ने कबूली रिलेशनशिप की बात, आम्रपाली शॉक्ड
जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने हिरासत में लिया, जानें क्या है इनकी मांग?
जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने हिरासत में लिया, जानें क्या है इनकी मांग?
2026 में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल विकेट लेने वाला गेंदबाज कौन?
2026 में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल विकेट लेने वाला गेंदबाज कौन?
जलभराव के बीच नालों से निकला घरेलू सामान, प्रयागराज DM ने की अपील
जलभराव के बीच नालों से निकला घरेलू सामान, प्रयागराज DM ने की अपील
बांग्लादेश PM के भारत आने पर संशय! राष्ट्रपति भवन को वापस लेनी पड़ी प्रेस रिलीज
बांग्लादेश PM के भारत आने पर संशय! राष्ट्रपति भवन को वापस लेनी पड़ी प्रेस रिलीज
'फुटेज लेने वाले ले रहे हैं...', गोविंदा-सुनीता आहूजा के झगड़े पर बोलीं भांजी आरती सिंह
'फुटेज लेने वाले ले रहे हैं...', गोविंदा-सुनीता आहूजा के झगड़े पर बोलीं भांजी आरती सिंह
Embed widget