एक्सप्लोरर

EXPLAINED: दिल्ली में क्लाउड सीडिंग फेल्योर की वजह क्या, बादलों में बीज डाले और 3.21 करोड़ खर्च करके भी क्यों नहीं हुई कृत्रिम बारिश?

ABP Explainer: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बादलों में नमी की कमी, अनुचित मौसम की स्थिति, तकनीकी और मौसमी समस्याओं की वजह से दिल्ली में क्लाउड सीडिंग फेल हो गई.

मौसमी बरसात और बेमौसम बरसात तो सुना है और आए दिन ऐसे नजारे भी दिख जाते हैं. लेकिन अब दौर क्लाउड सीडिंग से होने वाली कृत्रिम बारिश का है. दुनियाभर के कई देशों में बादलों में बीज डालकर पानी बरसाया जाता है. दिल्ली में भी प्रदूषण कम करने के लिए ऐसा किया गया, जो नाकाम साबित हुआ. और तो और इस पर राजनीति भी हो गई.

तो आइए ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि बादलों में बीज डालकर कैसे होती बरसात, दिल्ली में क्लाउड सीडिंग नाकाम क्यों हुई और अब आगे क्या होगा...

सवाल 1- क्लाउड सीडिंग क्या है और यह कैसे होती है?
जवाब- कल्पना करें कि बादल का एक बड़ा सा गुबार है, जिसमें पानी की बूंदें तैर रही हैं. लेकिन ये बूंदें इतनी छोटी होती हैं कि वे आपस में जुड़कर बारिश नहीं बन पातीं. ऐसे में वैज्ञानिक विमान या UAV से क्लाउड सीडिंग के नाम पर बादलों में 'बीज' डालते हैं. बीज यानी सिल्वर आयोडाइड, पोटेशियम आयोडाइड और नमक जैसे पदार्थ. ये बीज पानी की बूंदों को आपस में चिपका देते हैं और फिर वे भारी होकर बारिश बन जाती है. इसे ही क्लाउड सीडिंग कहते हैं, यानी कृत्रिम बारिश.

यह तकनीक 1940 के दशक में अमेरिका में शुरू हुई थी. भारत में पहली बार 1957 में महाराष्ट्र के सोलापुर में सूखे के लिए आजमाई गई. अब दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए इस्तेमाल हुई, ताकि बारिश से हवा के कण यानी धूल और धुआं धुल जाए. लेकिन यह भी याद रखो कि यह तकनीक है, न कि जादू.

IIT कानपुर के डायरेक्टर प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल कहते हैं कि वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह एक आसान प्रोसेस है. हम नमक का बहुत महीन मिश्रण बादलों में स्प्रे करते हैं. अगर बादलों में पर्याप्त नमी होती है, तो संघनन यानी कंडनसेशन होता है और बारिश हो जाती है.

 

क्लाउड सीडिंग में विमान या UAV कक्लाउड सीडिंग के नाम पर बादलों में 'बीज' डालते हैं.
क्लाउड सीडिंग में विमान या UAV कक्लाउड सीडिंग के नाम पर बादलों में 'बीज' डालते हैं.

सवाल 2- दिल्ली में प्रदूषण कितना गंभीर हो गया कि क्लाउड सीडिंग की जरूरत पड़ी?
जवाब- IQAir की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है. दिल्ली की हवा में PM 2.5 (बारीक कण) का लेवल 100 माइक्रोग्राम प्रति सेफक्यूबिक मीटर से ऊपर रहता है, जो WHO की सेफ लिमिट सेफ लिमिट (5 mcg/m³) से 20 गुना ज्यादा है. अक्टूबर 2025 में दिवाली के बाद फटाखों, पराली जलाने और फैक्ट्रियों की वजह से प्रदूषण चरम पर है.

30 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 356 तक पहुंच गया, जो 'वेरी पुअर' कैटेगरी में आता है. इससे सांस की बीमारियां, आंखों में जलन और बच्चों में अस्थमा बढ़ने का खतरा होता है.

 

दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 356 रहा है.
दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 356 रहा है.

सवाल 3- दिल्ली में क्लाउड सीडिंग कैसे हुई और इसके नतीजे क्या रहे?
जवाब- 25 सितंबर को दिल्ली सरकार ने IIT कानपुर के साथ MoU साइन किया. कुल 5 ट्रायल्स प्लान किए गए, जिसका खर्च करीब 3.21 करोड़ रुपए था. डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA ने 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक परमिशन दी. इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने मौसम डेटा दिया.

क्लाउड सीडिंग का पहला ट्रायल 23 अक्टूबर को हुआ था, लेकिन वो डेमो ट्रायल था. 28 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे और शाम को 4 बजे दो असल ट्रायल हुए. केसना 206एच एयरक्राफ्ट कानपुर से उड़ा और मेरठ एयरफील्ड पर लैंड किया. दिल्ली के बुराड़ी, नॉर्थ करोल बाग, मयूर विहार, बादली, खेकड़ा, सादकपुर और भोजपुर में क्लाउड सीडिंग की गई.

 

28 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे और शाम को 4 बजे दो असल ट्रायल हुए.
28 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे और शाम को 4 बजे दो असल ट्रायल हुए.

सवाल 4- तो फिर दिल्ली में क्लाउड सीडिंग फेल क्यों हुई?
जवाब- IMD और मणींद्र अग्रवाल इसके फेल्योर की 3 बड़ी वजहें बताते हैं...

1. बादलों में नमी की कमी: वातावरण में नमी का स्तर सिर्फ 10-15% था, जो क्लाउड सीडिंग के लिए बहुत कम है. इसके लिए कम से कम 50% नमी होनी चाहिए. मणींद्र अग्रवाल ने कहा, 'बादलों में नमी की कमी से बारिश नहीं हो सकी. IMD ने ह्यूमिडिटी को 10-15% बताया, जो सर्दियों में सूखे मौसम की खासियत है.'

2. अनुचित मौसम की स्थिति: पोस्ट-मानसून और सर्दी के मौसम में हवा शुष्क रहती है, जो क्लाउड सीडिंग के लिए अनुकूल नहीं. हवा की गति न्यूनतम होने से भी कणों का फैलाव सीमित रहा. मणींद्र अग्रवाल ने कहा, '28 अक्टूबर को दिल्ली में बादलों में नमी बहुत कम थी औऱ इसी वजह से क्लाउड सीडिंग के नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे.'

3. तकनीकी और मौसमी समस्याएं: क्लाउड सीडिंग तभी सफल होती है जब बादल पहले से ही नमी से भरपूर हों. दिल्ली के मामले में बादल थे, लेकिन वे वर्षा के लिए पर्याप्त नहीं. यह प्रयोग 1957 और 1972 में सूखा प्रबंधन के लिए किया गया था, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के लिए पहली बार. विशेषज्ञों का कहना है कि यह लंबे समय का समाधान नहीं, बल्कि आपातकालीन उपाय है.

सवाल 5- दिल्ली की क्लाउड सीडिंग पर राजनीतिक ड्रामा क्या हुआ?
जवाब- दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि सर्दियों से पहले वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके, जब प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है. यह कोशिश एन्वायर्नमेंट एक्शन प्लान 2025 का हिस्सा है. ट्रायल से जो डेटा मिलेगा, वह भविष्य में क्लाउड सीडिंग को बड़े पैमाने पर लागू करने में मदद करेगा. लेकिन इसके विफल होने से विपक्ष लगातार हमलावर होने लगा.

AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने वीडियो बनाकर दिल्ली सरकार के इस ट्रायल का मजाक उड़ाया. उन्होंने हंसते हुए कहा, '4:30 बज चुके हैं, बारिश नहीं है. बारिश में भी फर्जीवाड़ा, कृत्रिम वर्षा का कोई नामोनिशान नहीं दिख रहा है. इन्होंने सोचा होगा देवता इंद्र करेंगे वर्षा, सरकार दिखाएगी खर्चा.'

वहीं, दिल्ली युवा कांग्रेस अध्यक्ष अक्षय लाकरा ने संसद मार्ग थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए करोड़ों रुपए की बारिश चोरी होने का आरोप लगाया. अक्षय ने कहा कि करोड़ों रुपए फूंककर बीजेपी नेताओं ने सिर्फ वाहवाही लूटी है. इससे न तो बादल बरसे और न ही भाजपाई दिखे.

सवाल 6- दिल्ली में क्लाउड सीडिंग के लिए आगे क्या किया जाएगा?
जवाब- मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि हम अपने प्रयास आगे भी जारी रखेंगे. दिल्ली में 30 अक्टूबर को भी क्लाउड सीडिंग होनी थी, लेकिन बादलों में नमी की कमी की वजह से टाल दी. जैसे ही बादलों में अच्छी नमी बनेगी, तो फिर से क्लाउड सीडिंग की जाएगी.

 

मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि हालात अनूुकूल होते ही फिर से क्लाउड सीडिंग की जाएगी.
मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि हालात अनूुकूल होते ही फिर से क्लाउड सीडिंग की जाएगी.

सवाल 7- दुनियाभर में कहां-कहां क्लाउड सीडिंग हुई और कामयाब रही?
जवाब- भारत में इससे पहले भी कई बार क्लाउड सीडिंग हो चुकी है. तमिलनाडु सरकार ने 1993-94 में क्लाउड सीडिंग की थी, जिससे सूखे की समस्या कम हुई. 2003 में कर्नाटक सरकार ने भी क्लाउड सीडिंग करवाई थी. इसके अलावा महाराष्ट्र के सोलपुर में क्लाउड सीडिंग हुई, जिससे सामान्य की तुलना में 18% ज्यादा बारिश हुई.

  • दुनियाभर में चीन इस मामले में सबसे आगे है और वहां क्लाउड सीडिंग के लिए AI का भी इस्तेमाल होता है. चीन में दसियों लाख वर्ग किलोमीटर इलाके में ऐसा किया जाता है.
  • UAE के रेगिस्तानी इलाकों में भी क्लाउड सीडिंग के जरिए कृत्रिम बारिश करवाई जाती है.
  • अमेरिका के सूखाग्रस्त राज्यों में भी कृषि से जुड़े उद्देश्यों के लिए बड़े पैमाने पर क्लाउड सीडिंग की जाती है. कई बार जंगलों की आग को बुझाने के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है.
  • सऊदी अरब ने हाल ही में जमीन को बंजर होने से बचाने के लिए क्लाउड सीडिंग शुरू की है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर (एबीपी लाइव- हिंदी) अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इससे पहले दो अलग-अलग संस्थानों में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी. जहां वे 5 साल से ज्यादा वक्त तक एजुकेशन डेस्क और ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. वे बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को भी लीड कर चुके हैं. ज़ाहिद देश-विदेश, राजनीति, भेदभाव, एंटरटेनमेंट, बिजनेस, एजुकेशन और चुनाव जैसे सभी मुद्दों को हल करने में रूचि रखते हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

एक साल तक सोना क्यों नहीं खरीदें? इसके पीछे है PM मोदी का 72 बिलियन डॉलर का फॉरेक्स लॉजिक
एक साल तक सोना क्यों नहीं खरीदें? इसके पीछे है PM मोदी का 72 बिलियन डॉलर का फॉरेक्स लॉजिक
'पर उपदेश कुशल बहुतेरे', खरगे ने प्रधानमंत्री की अपील को बताया 12 साल की नाकामी, जानें क्या कहा?
'पर उपदेश कुशल बहुतेरे', खरगे ने प्रधानमंत्री की अपील को बताया 12 साल की नाकामी, जानें क्या कहा?
तमिलनाडु में विजय की शपथ के बाद होगा बड़ा खेल! टूट जाएंगे AIADMK के विधायक, फ्लोर टेस्ट में बदल जाएगा नंबरगेम?
तमिलनाडु में विजय की शपथ के बाद होगा बड़ा खेल! टूट जाएगी AIADMK, फ्लोर टेस्ट में बदल जाएगा नंबरगेम?
Explained: पेट्रोल-गैस तो ठीक, लेकिन सोना खरीदने से क्या दिक्कत? PM मोदी की नसीहत में छिपी असल वजह डॉलर बचाना
पेट्रोल-गैस तो ठीक, लेकिन सोना खरीदने से क्या दिक्कत? PM मोदी की नसीहत में छिपी असल वजह डॉलर

वीडियोज

Maruti Suzuki Victoris : The Best CNG Car? #marutisuzuki #victoris #cngcar #autolive
KTM Adventure ने पूरा Game बदल दिया! अब आपको मिलता है 350cc Engine | #ktm #ktmadventure #autolive
Iran US War: Narendra Modi की अपील पर क्या बोले एक्सपर्ट? | Oil Price Hike | Trump | PM Appeal
Suvendu Adhikari's PA Case Update: शपथ के बाद एक्शन मोड में CM शुभेंदु | TMC | BJP
Nepal में लैंडिंग के दौरान बड़ा हादसा, प्लेन के टायर में लगी आग | Tribhuvan International Airport

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
Asim Munir On India: पाकिस्तान की तीनों सेनाओं के प्रमुख आसिम मुनीर की भारत को सीधी धमकी- 'दर्दनाक होगा अंजाम...'
पाकिस्तान की तीनों सेनाओं के प्रमुख आसिम मुनीर की भारत को सीधी धमकी- 'दर्दनाक होगा अंजाम...'
राहुल गांधी के बयान पर देवेंद्र फडणवीस का पलटवार, कहा- वो सियासत के रिजेक्टेड माल हैं
राहुल गांधी के बयान पर देवेंद्र फडणवीस का पलटवार, कहा- वो सियासत के रिजेक्टेड माल हैं
'कोई ताकत भारत को...', सोमनाथ से पीएम मोदी ने दुनिया को दिया अग्रेसिव मैसेज
'कोई ताकत भारत को...', सोमनाथ से पीएम मोदी ने दुनिया को दिया अग्रेसिव मैसेज
IPL 2026: भुवनेश्वर के पास पर्पल कैप, जानिए ऑरेंज कैप की रेस में कौन सबसे आगे
IPL 2026: भुवनेश्वर के पास पर्पल कैप, जानिए ऑरेंज कैप की रेस में कौन सबसे आगे
Jana Nayagan Release Date: 'जना नायकन' की रिलीज की उल्टी गिनती शुरू, मेकर्स ने बतया कब सिनेमाघरों में दस्तक देगी विजय की फिल्म
विजय की फिल्म 'जना नायकन' कब होगी रिलीज? मेकर्स ने बता दी तारीख!
Explained: राष्ट्रपति चुनाव कितनी आसानी से जीतेगी बीजेपी? लोकसभा के जख्मों पर कैसे लगेगा पांच विधानसभा चुनावी नतीजों का 'मरहम'
राष्ट्रपति चुनाव कितनी आसानी से जीतेगी बीजेपी? लोकसभा के जख्म पर विधानसभा चुनावी नतीजों का मरहम
क्या लगातार कम होता जा रहा है लोगों का बोलना? आपको भी चौंका देगी यह स्टडी
क्या लगातार कम होता जा रहा है लोगों का बोलना? आपको भी चौंका देगी यह स्टडी
NEET UG Paper Leak: NEET UG एग्जाम से पहले ही लीक हो गया था पेपर, 140 सवाल हूबहू निकले; जांच में बड़ा खुलासा
NEET UG एग्जाम से पहले ही लीक हो गया था पेपर, 140 सवाल हूबहू निकले; जांच में बड़ा खुलासा
Embed widget