'लोकसभा लोकतंत्र की आवाज, सभी सदस्यों को...', सदन में वापसी के बाद क्या बोले ओम बिरला?
OM Birla in Lok Sabha: ओम बिरला ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों की मजबूत परंपरा रही है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 93 में लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव का प्रावधान है.

लोकसभा में हाल के विवादों और चर्चा के बीच स्पीकर ओम बिरला ने वापसी के बाद सदन को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि यह सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है. उन्होंने कहा कि हर सांसद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और उम्मीदों को लेकर सदन में आता है और उनकी कोशिश हमेशा रही है कि सभी सदस्य नियमों के तहत अपने विचार खुलकर रख सकें.
सदन को अंतिम व्यक्ति की आवाज बनाने का प्रयास
स्पीकर ने कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा है कि लोकसभा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की भी आवाज बने. उन्होंने बताया कि कई ऐसे सदस्य जो संकोच करते हैं या कम बोलते हैं, उन्हें भी उन्होंने अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित किया. उनके मुताबिक सदन में खुलकर बोलने से लोकतंत्र मजबूत होता है और सरकार की जवाबदेही भी तय होती है.
सहमति और असहमति लोकतंत्र की परंपरा
ओम बिरला ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों की मजबूत परंपरा रही है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 93 में लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव का प्रावधान है और सदन ने उन्हें दूसरी बार इस जिम्मेदारी के लिए चुना है. उन्होंने कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्षता और नियमों के अनुसार चले और सदन की गरिमा लगातार बढ़ती रहे.
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अविश्वास प्रस्ताव के बाद खुद को कार्यवाही से अलग किया
स्पीकर ने बताया कि 10 फरवरी को विपक्ष के कुछ सदस्यों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था. इसके बाद उन्होंने खुद को सदन की कार्यवाही से अलग कर लिया था. उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों की चर्चा में कई भावनाएं सामने आईं और उन्होंने सभी सदस्यों की बात गंभीरता से सुनी. उन्होंने समर्थन और आलोचना, दोनों तरह की बातों के लिए सभी सदस्यों का आभार जताया.
आसन किसी व्यक्ति का नहीं, परंपरा का प्रतीक
उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का आसन किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि एक संस्था और परंपरा का प्रतीक है. पूर्व स्पीकरों ने इस सदन की मर्यादा और परंपराओं को मजबूत किया है और वह भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे. सदन द्वारा उन पर जताए गए विश्वास के लिए उन्होंने सभी सांसदों का धन्यवाद किया और कहा कि वह पूरी निष्ठा और संवैधानिक मर्यादा के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे.
नेता प्रतिपक्ष भी नियमों से ऊपर नहीं
सदन में नेता प्रतिपक्ष को बोलने का अवसर न मिलने के आरोपों पर स्पीकर ने कहा कि सदन के नेता, नेता प्रतिपक्ष, मंत्री या अन्य सदस्य-सभी को नियमों और प्रक्रिया के तहत बोलने का अधिकार है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सदस्य नियमों से ऊपर नहीं है और जो नियम उन्हें मिले हैं, वे सभी पर समान रूप से लागू होते हैं. ओम बिरला ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सदन में वक्तव्य देना होता है, तो उन्हें भी अध्यक्ष से पहले अनुमति लेनी होती है.
Source: IOCL


























