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Explained: 16 दिनों में 28 BLO की मौत! राजस्थान से पश्चिम बंगाल तक कैसे मचा सियासी संग्राम, क्या SIR ले रहा जान?

ABP Explainer: BLO की मौतों को TMC और BJP अपने-अपने तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं. दूसरी ओर सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर प्रदर्शन किए. इससे राजस्थान से लेकर पश्चिम बंगाल तक सियासी संग्राम मच गया है.

चुनाव आयोग ने 4 नवंबर से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की शुरुआत वोटर लिस्ट छांटने के लिए की थी. लेकिन यह BLO की मौत की वजह बन रहा है. राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल में कुछ BLO खुदकुशी कर रहे हैं, तो किसी की हार्ट अटैक से मौत हो रही है. BLO की मौतों का मामला इतना बढ़ गया है कि इसने सियासी संग्राम का रूप ले लिया. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को मौतों का जिम्मेदार ठहराया. ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि SIR की वजह से BLO की मौतों का मामला क्या है, इस पर सियासी जंग कैसे छिड़ी और अंजाम क्या होगा...

सवाल 1- BLO कौन होते हैं और इनका मुख्य काम क्या होता है?
जवाब- बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO ज्यादातर सरकारी कर्मचारी होते हैं. जैसे स्कूल टीचर, आंगनवाड़ी वर्कर, क्लर्क या अन्य सरकारी विभाग के लोग. ये चुनाव आयोग के सबसे निचले स्तर के प्रतिनिधि होते हैं. इनकी नियुक्ति असेंबली क्षेत्र के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) करते हैं. यह अपने बूथ के 1,000-1,500 वोटरों की पूरी जिम्मेदारी संभालते हैं.

BLO का मुख्य काम वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा और सही रखना होता है. यह घर-घर जाकर वोटरों की डिटेल चेक करते हैं, नए वोटरों को नाम जोड़ते हैं, मरे हुए या शिफ्ट हो चुके लोगों का नाम हटाते हैं, वोटर कार्ट में सुधार कराते हैं और चुनाव के समय वोटर स्लिप बांटते हैं. यह पूरे साल काम करते हैं, लेकिन रिवीजन के समय काम बहुत बढ़ जाता है.

4 नवंबर से SIR का काम देश के 12 राज्यों में शुरू किया गया. इनमें केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगास उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, छत्तीसगढ़, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप राज्य शामिल हैं. इन राज्यों में BLO को हर घर में प्री-फिल्ड फॉर्म बांटना, वापस लेना, लोगों की मदद करना और ऐप पर डेटा डालना पड़ता है.

पहले यह काम सालभर में होता था, लेकिन इस बार सिर्फ 1 महीने यानी 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक पूरा करना है. एक BLO को 1,000-1,200 घर कवर करना पड़ते हैं, ऊपर से उनका अपना ऑफिस का रेगुलर काम भी चलता रहता है. कई जगह ऐप में टेक्निकल प्रॉब्लम्स भी आईं, जिस वजह से दबाव बढ़ गया.

सवाल 2- बीते 16 दिनों में कहां-कहां और कितने BLO की मौतें हुईं?
जवाब- 19 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट कर के कहा, 'SIR शुरू होने से अब तक 28 लोग मर चुके हैं. चुनाव आयोग का यह अमानवीय दबाव बंद हो. पहले यह काम 3 साल में होता था, अब 2 महीने में करवा रहे हैं. तुरंत SIR रोको वरना और जानें जाएंगी.'

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 नवंबर 2025 की दोपहर 2 बजे तक कुल 7 BLO की मौतें दर्ज हुईं... 

1. 20 नंवबर 2025 को 1 मौत

  • गुजरात के कपड़वंज के नवापुरा प्राथमिक विद्यालय के प्रिसिंपल रमेशभाई परमार की BLO ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई. उनके परिवार का कहना है कि उन पर SIR का असहनीय कार्यभार था और वह ड्यूटी की वजह से बहुत ज्यादा ट्रैवल कर रहे थे. उनके BLO कार्य का स्थान उनके स्कूल से 48 किलोमीटर दूर था. उन्हें रोजाना 94 किलोमीटर से ज्यादा का सफर करना पड़ता था.

2. 19 नवंबर 2025 को 3 मौतें

  • पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के मालबाजार क्षेत्र में 48 साल की शांतिमणि इक्का ने आत्महत्या कर ली. परिवार को घर के आंगन में उनका शव मिला. परिवार ने आरोप लगाया कि SIR के दबाव की वजह से शांतिमणि ने खुदकुशी की है. वह रंगमती पंचायत की निवासी थीं और उन्हें हाल ही में BLO के रूप में SIR की ड्यूटी सौंपी गई थी. वह घर-घर जाकर फॉर्म बांट और इकट्ठा कर रही थीं.
  • मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के उदयगढ़ जनपद पंचायत के ग्राम सोलिया में एक BLO भुवान सिंह चौहान की निलंबन के बाद मौत हो गई. उन्हें 18 नवंबर को झाबुआ जिला निर्वाचन अधिकारी ने कार्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया था. परिवार के मुताबिक, निलंबन के बाद भुवान सिंह चौहान काफी तनाव में थे. उन्होंने रात भर खाना नहीं खाया और सो नहीं पाए. बुधवार को उन्हें अचानक चक्कर आए और वे गिर पड़े. परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोरी ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
  • राजस्थान के सवाई माधोपुर के बहरावंडा खुर्द गांव में 34 साल के BLO हरिओम बैरवा की हार्ट अटैक से मौत हो गई. हार्ट अटैक से 5 मिनट पहले उन्हें तहसीलदार जयप्रकाश रोलन ने फोन किया था. फोन रखने के बाद हरिओम को अटैक आया. परिजनों का आरोप है कि अधिकारी उन पर दबाव बना रहे थे. ऐसे में वह टेंशन में थे और घर पर किसी से ज्यादा बात भी नहीं करते थे. काम के दबाव के चलते उन्हें दिल का दौरा पड़ा.

 

तस्वीर हरिओम बैरवा की है। वे इसमें SIR के तहत घर-घर जाकर फॉर्म देते हुए नजर आ रहे हैं। (फाइल फोटो)
तस्वीर हरिओम बैरवा की है। वे इसमें SIR के तहत घर-घर जाकर फॉर्म देते हुए नजर आ रहे हैं। (फाइल फोटो)

3. 16 नवंबर 2025 को 2 मौतें

  • राजस्थान के धर्मपुरा के BLO मुकेश चंद जांगिड़ ने रविवार सुबह ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी. जेब से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने अपने सुपरवाइजर सीताराम बुनकर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मुकेश ने लिखा कि उन्हें नौकरी से सस्पेंड करने की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. आरोप है कि जयपुर में SIR की ड्यूटी के बोझ और सीनियर के असहयोग से परेशान थे.
  • केरल के कंकोल-अलप्पादंबा ग्राम पंचायत के एट्टुकुडुक्का स्थित घर में 41 साल के BLO अनीश जॉर्ज ने आत्महत्या कर ली. उनके घर में शव मिला. अनीश के लिए प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने आरोप लगाए कि अनीश SIR के काम के बोझ से काफी तनाव में थे और इसी वजह से खुदकुशी की.

4. 9 नवंबर 2025 को 1 मौत

  • पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दनवान जिले के मेमारी सामुदायिक ब्लॉक में महिला BLO की ब्रेन स्ट्रोक से मौत हो गई. महिला के पति ने आरोप लगाए कि वह SIR के काम की वजह से तनाव में थी.

राज्यों के आंकड़ों के मुताबिक, 6-7 मौतें हुई हैं, जबकि ममता बनर्जी ने 28 मौतों का आंकड़ा दिया है. इसे लेकर पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है. या फिर ममता बनर्जी का राजनीतिक बयान हो सकता है. लेकिन राजस्थान से लेकर केरल तक BLO की मौतों ने सियासी उथल-पुथल मचा दी है.

ममता बनर्जी ने ट्वीट कर के कहा, 'भारतीय चुनाव आयोग के अनियोजित और अथक कार्यभार से अनमोल जानें जा रही हैं. एक प्रक्रिया जो पहले 3 साल में पूरी होती थी, अब राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए चुनाव से ठीक पहले 2 महीने में पूरी की जा रही है. इससे BLO पर अमानवीय दबाव पड़ रहा है.'

सवाल 3- SIR का मामला इतना बड़ा क्यों और कैसे हो गया कि BLO की मौतें होने लगीं?
जवाब- SIR बहुत बड़ा अभियान है. हाल ही में बिहार चुनाव में सफलता के बाद चुनाव आयोग ने इसे 12 राज्यों में कराने का फैसला लिया, लेकिन इस फैसले के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं की गई. 12 राज्यों में करीब 51 करोड़ वोटर्स हैं और डेडलाइन बहुत टाइट है. BLO ज्यादातर छोटे सरकारी कर्मचारी हैं, जिनका अपना रेगुलर काम भी है. ऊपर से कुछ राज्यों में लोकल इलेक्शन भी चल रहे हैं. परिवार और साथी BLO कह रहे हैं कि रात-रात भर काम, सुपरवाइजर का दबाव और ऐप की दिक्कत ने हालत खराब कर दी. इस वजह से राजस्थान, केरल और पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन भी हुए. सभी पक्ष चाहते हैं कि काम का दबाव कम हो और BLO को सपोर्ट मिले.

सवाल 4- BLO की मौत का मामला सियासी संग्राम कैसे बन गया?
जवाब- राजस्थान के मुकेश की आत्महत्या के बाद प्रदेशभर में BLO ने मिलकर कैंडल मार्च निकाला और शासन-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदेशभर में SIR का काम कर रहे BLO ने सरकारी अधिकारियों पर टॉर्चर करने का आरोप लगाया. महासंघ एकीकृत के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि यह केवल एक कर्मचारी की आत्महत्या नहीं, बल्कि अधिकारियों की निरंकुशता का परिणाम है. जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक महासंघ अपनी लड़ाई जारी रखेगा.

वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है, 'BLO की मौतें होना गंभीर विषय है, लेकिन असल लड़ाई वोटर लिस्ट साफ करने पर है. BJP का आरोप है कि बंगाल में लाखों फेक और घुसपैठिए वोटर हैं, जो TMC को वोट देते हैं. SIR से ये पकड़े जा रहे हैं, इसलिए TMC SIR रोकना चाहती है. तो वहीं, TMC आरोप लगाती है कि SIR से असली भारतीय वोटरों (खासकर मतुआ, आदिवासी, गरीब) के नाम कट रहे हैं और यह BJP की 2026 चुनाव जीतने की साजिश है. BLO मौतों को दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं. TMC कहती है चुनाव आयोग अमानवीय है, BJP कहती है TMC गुंडागर्दी कर रही है. इस वजह से BLO की मौतों ने राजस्थान से लेकर पश्चिम बंगाल तक सियासी संग्राम मचाया है.'

सवाल 5- इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग ने क्या कहा?
जवाब- 20 नंवबर 2025 तक चुनाव आयोग ने BLO की मौतों पर कोई सीधा बयान या प्रेस नोट जारी नहीं किया है. यहां तक कि चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के 28 मौतों के दावे वाले बयान पर भी जवाब नहीं दिया.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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