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'Proteinmaxxing' क्या है, ज्यादा प्रोटीन लेने का ट्रेंड कितना सही?

Protein Maxxing Trend : जिम जाने वाले लोगों से लेकर वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों तक, कई लोग अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन शामिल करने पर जोर दे रहे हैं.

Protein Maxxing Trend: आजकल फिटनेस और वेट लॉस की दुनिया में एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है. इस ट्रेंड का नाम Protein Maxxing है. जिम जाने वाले लोगों से लेकर वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों तक,लोग अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन शामिल करने पर जोर दे रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी हाई-प्रोटीन डाइट को वजन घटाने और मसल्स बनाए रखने के आसान तरीके के तौर पर देखा जा रहा है.

हालांकि, सवाल यह है कि क्या ज्यादा प्रोटीन खाना हर किसी के लिए फायदेमंद है? एक्सपर्ट्स और एक नई स्टडी ने इस ट्रेंड को लेकर कुछ जरूरी सवाल खड़े किए हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि Proteinmaxxing क्या है और ज्यादा प्रोटीन लेने का ट्रेंड कितना सही है. 

क्या है Protein Maxxing?

Protein Maxxing एक ऐसा तरीका है जिसमें हर डाइट में प्रोटीन को प्राथमिकता दी जाती है. इसका उद्देश्य रोजाना शरीर की जरूरत के मुताबिक पूरा प्रोटीन लेना है. इस ट्रेंड में लोग चिकन, अंडे, ग्रीक योगर्ट, पनीर, मछली, दाल, टोफू और प्रोटीन सप्लीमेंट्स जैसी चीजों को अपनी डाइट में ज्यादा शामिल करते हैं. वजन घटाने के लिए भी प्रोटीन को जरूरी माना जाता है. प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है. साथ ही इसे पचाने में शरीर को कार्बोहाइड्रेट और फैट की तुलना में ज्यादा एनर्जी खर्च करनी पड़ती है. कैलोरी कम करने के दौरान पूरा प्रोटीन मांसपेशियों को बनाए रखने में भी मदद कर सकता है. 

ज्यादा प्रोटीन लेने का ट्रेंड कितना सही है.

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि जरूरत से बहुत ज्यादा प्रोटीन लेना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है. औसत वयस्क को शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम करीब 0.8 से 1.2 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है. एथलीट्स और बुजुर्गों को मांसपेशियों की मरम्मत के लिए इससे ज्यादा प्रोटीन की जरूरत हो सकती है.  बहुत ज्यादा प्रोटीन लेने का असर किडनी पर भी पड़ सकता है. शरीर में प्रोटीन से बनने वाले नाइट्रोजन जैसे पदार्थों को फिल्टर करने का काम किडनी करती है. ज्यादा प्रोटीन लेने पर किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. खासतौर पर जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है, उन्हें प्रोटीन का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है. 

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नई स्टडी ने भी उठाए सवाल

Cell Press Blue जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी में हाई-प्रोटीन डाइट को लेकर एक अलग बात सामने आई है. शोधकर्ताओं Bailey A. Knopf और Dudley W. Lamming के मुताबिक, कुछ स्थितियों में प्रोटीन की मात्रा कम रखना मेटाबॉलिक हेल्थ, लंबी उम्र और हेल्दी एजिंग के लिए फायदेमंद हो सकता है. स्टडी के अनुसार, हाई-प्रोटीन डाइट शरीर में mTORC1 सिस्टम को ज्यादा एक्टिव कर सकती है. यह सिस्टम सेल्स की ग्रोथ से जुड़ा है, लेकिन लगातार एक्टिव रहने पर सेल्स की सफाई और रिपेयर की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. शोधकर्ताओं ने खासतौर पर मेथियोनिन की मात्रा सीमित करने के संभावित फायदों का जिक्र किया है. हालांकि इसका मतलब पूरी तरह प्रोटीन छोड़ना नहीं है, बल्कि सही मात्रा और सही स्रोत चुनना है. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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