Places to Visit on Independence Day: यहां आज भी ताजा हैं भगत सिंह की यादें, ऐसे बनाएं घूमने का प्लान
Places to Visit on Independence Day: 15 अगस्त पर भगत सिंह से जुड़ी ऐतिहासिक जगहों की सैर करना चाहते हैं तो खटकड़ कलां और हुसैनीवाला में उनकी जिंदगी और बलिदान से जुड़ी यादें देख सकते हैं.

Places to Visit on Independence Day: 15 अगस्त आते ही हर भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना जाग उठती है. इस मौके पर पूरे देश में नेशनल हॉलीडे होता है. ऐसे में अगर आप इस मौके पर अगर आप कुछ अलग करना चाहते हैं या घूमने का प्लान बनाते हैं तो आप शहीद भगत सिंह से जुड़ी जगहों पर घूमने का प्लान बना सकते हैं. पंजाब में ऐसी कई जगहें हैं जहां भगत सिंह की यादें आज भी जिंदा हैं. इन जगहों पर जाकर आप न सिर्फ इतिहास को करीब से महसूस करेंगे, बल्कि बच्चों को भी देश के लिए कुर्बानी देने वाले इस महान क्रांतिकारी की कहानी बता पाएंगे. आइए जानते हैं कि इस 15 अगस्त को आप कहां-कहां पर घूम सकते हैं.
खटकड़ कलां- भगत सिंह का पैतृक गांव
भगत सिंह की कुर्बानी पूरे देश के लिए एक सबसे महत्वपूर्ण कुर्बानी रहेगी, जिसे देश का हर बच्चा, बूढ़ा अपनी अंतिम सांस तक याद रखेगा. बता दें कि भगत सिंह का जन्म भले ही लायलपुर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है, लेकिन उनका पैतृक गांव पंजाब के खटकड़ कलां में है, जहां उनका पुश्तैनी मकान आज भी मौजूद है और इसकी देखरेख पुरातत्व विभाग करता है. बताया जाता है कि भगत सिंह बचपन में अपने दादा अर्जुन सिंह के साथ छुट्टियां बिताने यहां आते थे. इस पुश्तैनी घर में आज भी परिवार की पुरानी चीजें रखी हुई हैं, जो उस दौर की झलक दिखाती हैं. इसी गांव में एक विशाल स्मारक और म्यूजियम बनाया गया है, जो 11 एकड़ में फैला हुआ है. यहां भगत सिंह से जुड़ी तस्वीरें, दस्तावेज और उनकी जिंदगी की कहानी को बहुत ही खूबसूरती से दिखाया गया है. परिवार के साथ घूमने और बच्चों को इतिहास सिखाने के लिए यह जगह बेहद खास है.
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हुसैनीवाला- जहां हुआ था अंतिम संस्कार
पंजाब के फिरोजपुर जिले में स्थित हुसैनीवाला राष्ट्रीय शहीदी स्मारक भगत सिंह, सुखदेव थापर और राजगुरु की याद में बनाया गया है. कहा जाता है कि इसी जगह सतलुज नदी के किनारे तीनों क्रांतिकारियों का अंतिम संस्कार किया गया था, इसलिए यह स्थान देशभक्तों के लिए एक तीर्थ जैसा माना जाता है. खास बात यह है कि यहां भारत और पाकिस्तान की सेनाओं द्वारा हर शाम एक झंडा उतारने की रस्म निभाई जाती है, जो वाघा-अटारी बॉर्डर सेरेमनी जैसी ही होती है. अगर आप 15 अगस्त पर यहां जाते हैं तो शाम की इस सेरेमनी को देखना बिल्कुल न भूलें, यह अनुभव रोंगटे खड़े कर देने वाला होता है.
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