Vishnu Temple : देश का ऐसा विष्णु मंदिर, जहां भगवान हर 6 महीने में बदलते हैं करवट! जानें क्या है इसके पीछे की मान्यता
Vishnu Temple : क्या आप जानते हैं भगवान विष्णु हर 6 महीने में करवट बदलते हैं? जानें इस धार्मिक मान्यता, बद्रीनाथ धाम और परिवर्तिनी एकादशी का महत्व.

Vishnu Temple : भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध हैं. इन्हीं में से एक है उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित भगवान बद्रीनाथ धाम, जहां से जुड़ी एक अनोखी धार्मिक मान्यता सदियों से प्रचलित है.
मान्यता है कि भगवान विष्णु हर छह महीने में अपनी करवट बदलते हैं. इस परंपरा को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है.
एस्ट्रोलॉजर नीतिका शर्मा के अनुसार, भगवान विष्णु के करवट बदलने की मान्यता सनातन धर्म में विशेष महत्व रखती है. यह आस्था, आध्यात्मिकता और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक मानी जाती है.
क्या है भगवान के करवट बदलने की मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) के दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं. इसके बाद भाद्रपद शुक्ल एकादशी (परिवर्तिनी एकादशी/पार्श्व एकादशी) के दिन भगवान अपनी करवट बदलते हैं. फिर कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) के दिन भगवान योगनिद्रा से जागते हैं.
इस धार्मिक मान्यता के कारण कहा जाता है कि भगवान हर छह महीने के चक्र में विश्राम और परिवर्तन की अवस्था से गुजरते हैं.
बद्रीनाथ धाम से क्यों जुड़ी है यह मान्यता?
बद्रीनाथ धाम को भगवान विष्णु का प्रमुख धाम माना जाता है. मान्यता है कि शीतकाल में जब मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं, तब भी भगवान की पूजा देवता करते हैं. इसी कारण भगवान विष्णु की योगनिद्रा और करवट बदलने की मान्यता का विशेष महत्व इस धाम से भी जोड़ा जाता है.
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व
परिवर्तिनी एकादशी को भगवान विष्णु के करवट बदलने का दिन माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा, व्रत और दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं.
धार्मिक मान्यता क्या कहती है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने, करवट बदलने और जागने की ये घटनाएं सृष्टि के संचालन से जुड़ी प्रतीकात्मक मान्यताएं हैं. इनका संबंध सनातन परंपरा में देवशयनी एकादशी, परिवर्तिनी एकादशी और देवउठनी एकादशी से माना जाता है.
मंदिर में दर्शन के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
- भगवान विष्णु के दर्शन श्रद्धा और शांत मन से करें.
- मंदिर की परंपराओं और नियमों का पालन करें.
- स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखें.
- पूजा के दौरान पुजारियों के निर्देशों का सम्मान करें.
- धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए दर्शन करें.
FAQ
भगवान विष्णु के करवट बदलने की मान्यता कब मानी जाती है?
परिवर्तिनी (पार्श्व) एकादशी के दिन भगवान विष्णु के करवट बदलने की मान्यता है.
भगवान विष्णु कब योगनिद्रा में जाते हैं?
देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं.
भगवान विष्णु कब जागते हैं?
देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागने की मान्यता है.
इस मान्यता का संबंध किस धाम से जोड़ा जाता है?
भगवान विष्णु के प्रमुख धाम बद्रीनाथ से इस मान्यता को विशेष रूप से जोड़ा जाता है.
परिवर्तिनी एकादशी का क्या महत्व है?
इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा, व्रत और दान करने से सुख-समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होने की मान्यता है.
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