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ऑफिस जाना हो तो सुबह तर्पण करके निकल सकते हैं या दोपहर तक रुकना जरूरी?

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में श्राद्ध का एक तय समय होता है, लेकिन ऑफिस जाने वाले क्या तर्पण सुबह कर नौकरी पर जा सकते हैं, या फिर दोपहर तक घर रुकना जरुरी है, कैसे पूरा होगा श्राद्ध जान ले.

Pitru Paksha 2026: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में समय पर ऑफिस पहुंच किसी बड़े टास्क को पूरा करने से कम नहीं है लेकिन चूंकि पितृ पक्ष चल रहे हैं और ये अवधि पूर्वजों को समर्पित है ऐसे में नौकरीपेशा के लिए एक समस्या खड़ी हो जाती है कि श्राद्ध कैसे करें.

ऑफिस का समय सुबह से शुरू हो जाता है और ऐसे में दोपहर तक घर पर रुकना हर किसी के लिए संभव नहीं होता. सवाल यह है कि क्या सुबह उठकर पितरों का तर्पण करके ऑफिस जा सकते हैं? या फिर श्राद्ध के लिए अपराह्न तक रुकना ही जरूरी है?

श्राद्ध के लिए दोपहर का समय क्यों महत्वपूर्ण है?

पितृ पक्ष में किया जाने वाला पार्वण श्राद्ध अपराह्न काल में किया जाता है.  पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष के श्राद्ध में कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल को महत्वपूर्ण माना जाता है तथा श्राद्ध कर्म अपराह्न काल समाप्त होने तक पूरा करने की परंपरा है.

इसलिए अगर किसी व्यक्ति को अपने पितर की निश्चित तिथि का श्राद्ध करना है और वह पार्वण श्राद्ध कर रहा है तो केवल सुबह जल्दी तर्पण करके पूरे श्राद्ध कर्म को समाप्त मान लेना उचित नहीं होगा. मुख्य श्राद्ध विधि के लिए निर्धारित समय का ध्यान रखना चाहिए.

नौकरी करने वाले क्या करें

अगर ऑफिस का समय ऐसा है कि अपराह्न में घर पर रहना संभव नहीं है तो परिवार में श्राद्ध की जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति, पुरोहित या आचार्य से पहले ही बात कर लेना बेहतर है. कई बार परिवार में कोई दूसरा पात्र सदस्य तय विधि से कर्म कर सकता है लेकिन अगर आप स्वयं श्राद्धकर्ता हैं तो ऑफिस से उस दिन की छुट्टी या समय की व्यवस्था करना अधिक उचित रहेगा ताकि तिथि और श्राद्ध काल दोनों का पालन किया जा सके.

सुबह क्या कर सकते हैं?

सुबह स्नान करके पितरों का स्मरण, पूजा की तैयारी और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जा सकती है. कुछ परिवार सुबह ही पितरों को जल अर्पित करने की परंपरा भी निभाते हैं. लेकिन इसे उस दिन के पूर्ण पार्वण श्राद्ध का स्थान नहीं मानना चाहिए.

तर्पण कौन-कौन कर सकता है

  • पुत्र – पिता और अन्य पितरों का तर्पण कर सकता है.
  • पौत्र या प्रपौत्र – पुत्र न होने पर ये तर्पण कर सकते हैं.
  • भाई या अन्य करीबी रिश्तेदार – कुछ परिस्थितियों में तर्पण कर सकते हैं.
  • पत्नी – कुछ परंपराओं में पति के लिए तर्पण करने की मान्यता है.
  • पुत्री – कई परिवारों में पुत्री भी पितरों का तर्पण करती हैं, इसको लेकर कई मत हैं.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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