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नागपुर के जंगलों में छुपी 1000 साल पुरानी कर्पूर बावड़ी, जिसका पानी कभी नहीं सूखता!

महाराष्ट्र के रामटेक के नजदीक जंगलों और पहाड़ियों के बीच एक ऐसा रहस्यमयी बावड़ी (कुआं) हैं, जो 10वीं और 12वीं शताब्दी के बीच का माना जाता है. जानिए करपुर बावड़ी नागपुर के सबसे इस कुएं के बारे में.

महाराष्ट्र के रामटेक के पास जंगलों और छोटी-छोटी पहाड़ियों के बीच बसा, करपुर बावड़ी नागपुर के सबसे कम सराहे गए धरोहर स्थलों में शामिल है.

यह प्राचीन सीढ़ीदार कुआं प्राचीन और स्थानीय लोककथाओं से घिरी हुई है, शहर के आम पर्यटक पर्यटक मार्गों से दूर इस इलाके के समृद्ध इतिहास की झलक पेश करती है. 

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करपुर बावली कहां हैं?

करपुर बावड़ी का निर्माण 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच का माना जाता है, जो रामटेक मंदिर परिसर के अंदर स्थित है. भारत में बावड़ियां कभी दैनिक जीवन का अहम हिस्सा हुआ करती थीं, जिनका इस्तेमाल पीने, धार्मिक अनुष्ठानों और खेती के लिए पानी जमा करने के लिए किया जाता था.

इस बावड़ी की खास बात ये है कि,  माना जाता है कि, इसके निर्माण के दिन से लेकर आज तक किसी भी मौसम चाहे वर्षा ही क्यों न हो इसका जल स्थिर रहा है. आज यह बावड़ी घने जंगलों से घिरी पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है.

इसे कर्पूर बावली क्यों कहते हैं?

कर्पूर का मतलब कपूर होता है, जबकि बावड़ी का अर्थ पानी की टंकी या सीढ़ीदार कुआं होता है. स्थानीय लोककथाओं की माने तो, यहां के पानी में कभी कपूर जैसी सुंगध हुआ करती थी और माना जाता था कि, इसमें औषधीय गुण हैं. हालांकि अब वह सुगंध महसूस नहीं होती है, फिर भी यह नाम सालों से प्रचलित है. 

कर्पूर बावड़ी मात्र एक जल संरचना नहीं, बल्कि एक पूजा स्थल भी है. यह स्थल 6 देवियों मां चामुंडा, इंगलाज, काली, रणचंडी और कपूरता को समर्पित है. सीढ़ीदार कुएं के किनारे एक छोटा काली मंदिर आज भी मौजूद है.

वास्तुकला के नजरिए से बावड़ी में तीनों ओर स्ंतभों वाला गलियारा है और आंशिक रूप से ढह चुके गर्भगृह के अवशेष भी हैं, जिसमें कभी एक देवी विराजती थीं. समय के साथ-साथ इसकी संरचना जर्जर होते चली गई, लेकिन फिर भी अपने युग की ये बेहतरीन शिल्पकारी थी. 

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कर्पूर बावली का निर्माण किसने किया?

इतिहासकारों की मानें तो इस सीढ़ीदार कुएं का निर्माण यादव वंश के शासन काल में हुआ था, जिसने 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच वर्तमान समय के महाराष्ट्र के बड़े क्षेत्र पर शासन किया था. इसकी स्थाप्य शैली और बनावट उस काल के मंदिर से जुड़े जल संरचनाओं के अनुरूप है. अपनी प्राचीनता के बावजूद यह स्थल काफी हद तक अज्ञात है, जहां आज भी काफी कम लोग आते हैं. 

यह बावड़ी रामटेक में श्री शांतनाथ दिगंबर जैन मंदिर से करीब 1 किलोमीटर दूर पर स्थित है. बावड़ी और उसके आसपास के इलाको में घूमने में आतौर पर 1 घंटे का समय लगता है. यहां कोई औपचारिक सुविधाएं नहीं, बल्कि आंगतुकों को अपनी योजना के मुताबिक बनानी चाहिए और इस स्थान का सावधानीपूर्वक ध्यान रखना चाहिए.

आप नजदीक के ही पहाड़ी पर स्थित रामटेक किले का दौरा भी कर सकते हैं, जहां से आसपास के ग्रामीण इलाकों का मजेदार दृश्य देखने को मिलता है. यहां आप खिंडसी झील भी देख सकते हैं, जो नौका विहार या पिकनिक मानने के लिए बेहतरीन जगह है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

अंकुर अग्निहोत्री (Ankur Agnihotri)

Astrology & Religion Content Writer

अंकुर अग्निहोत्री ABP Live के Astro & Religion सेक्शन से जुड़े डिजिटल पत्रकार हैं, जो दैनिक राशिफल, व्रत-त्योहार, ग्रह-गोचर और ज्योतिषीय विषयों पर सरल, तथ्य-आधारित और उपयोगी लेखन करते हैं. उनका कंटेंट विशेष रूप से उन पाठकों के लिए तैयार होता है जो ज्योतिष और धर्म को आसान भाषा में समझना चाहते हैं.

अंकुर पिछले 2+ वर्षों से ABP Live (abplive.com) में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और ज्योतिष, अंक शास्त्र, वास्तु शास्त्र, शकुन अपशकुन शास्त्र, हस्तरेखा, स्वप्न शास्त्र, चाइनीच ज्योतिष आदि पर आर्टिकल्स प्रकाशित करते हैं.

उनका काम हाई-फ्रीक्वेंसी कंटेंट प्रोडक्शन, ट्रेंड-आधारित स्टोरी चयन और यूजर-इंटेंट आधारित लेखन पर केंद्रित है, जिससे उनके लेख लगातार अच्छा डिजिटल एंगेजमेंट प्राप्त करते हैं. इसके अतिरिक्त अंकुर अग्निहोत्री निम्नलिखित विषयों पर भी लेखन करते हैं:

  • दैनिक और साप्ताहिक राशिफल
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वे अपने लेखों में जानकारी प्रस्तुत करते समय, पंचांग आधारित तिथि, नक्षत्र और योग का संदर्भ लेते हैं. सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों (ग्रह-स्थिति, गोचर प्रभाव) का उपयोग करते हैं और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित स्रोतों के आधार पर जानकारी देते हैं. अंकुर ABP Live जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म के साथ जुड़े हैं और Astro सेक्शन में नियमित रूप से कंटेंट प्रकाशित करते हैं.

उनके लेख धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक ज्योतिषीय सिद्धांतों और सामान्य स्रोतों पर आधारित होते हैं. वे किसी भी प्रकार के निश्चित या गारंटीड परिणाम का दावा नहीं करते और पाठकों को जानकारी को मार्गदर्शन के रूप में लेने की सलाह देते हैं. इन्होने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई की है.

अंकुर का फोकस ज्योतिष और धर्म को सरल, व्यावहारिक और समझने योग्य रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी हर वर्ग के पाठकों तक पहुंच सके.

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