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Winter Relationship Trends: क्या सर्दियों में ज्यादा परवान चढ़ता है इश्क? यह स्टडी पढ़ लेंगे तो उड़ जाएंगे होश

Cold Weather Romance: सर्दियों के मौसम में इश्क पर परवान अपने चरम सीमा पर होता है. चलिए आपको बताते हैं कि ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे क्या कारण जिम्मेदार होता है.

Why Romance Increases During Winter Months: ठंड का मौसम आते ही, लोगों में रोमांस का एक अलग ही सागर उमड़ जाता है. इसे “कफिंग सीजन” के नाम से जाना जाता है, इसका मतलब होता है कि सिंगल लोग सर्दियों की लंबी, ठंडी रातों के लिए किसी रिश्ते की तलाश में निकल पड़ते हैं. सवाल ये है कि क्या वाकई ऐसा होता है? और अगर होता है, तो इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह है?. अगर आपके मन में भी इस तरह के सवाल हैं, तो चलिए आपको बताते हैं कि क्या सच में ऐसा होता है या फिर यह नॉर्मल है. 

सर्दियों में पार्टनर की तलाश 

सर्दियों के मौसम को रोमांस के मौसम के तौर पर भी जाना जाता है, ऐसा इसलिए है क्योंकि ठंड में लोग एक दूसरे के साथ ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं. सैन होजे स्टेट यूनिवर्सिटी की साइकोलॉजी प्रोफेसर क्रिस्टीन मा-केलम्स कहती हैं कि  “कफिंग सीजन का मतलब यह मानना है कि इंसानों की ‘मेटिंग बिहेवियर’ में भी मौसम का असर होता है.” हालांकि, यह सबसे जरूरी और ध्यान देने वाली बात यह है कि  इस पर एकमत नहीं है, लेकिन इंटरनेट पर आंकड़े अलग कहानी बताते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समय इंटरनेट पर कुछ चीजों की खोज काफी बढ़ जाती है, जिसमें

  • पोर्न की खोजें
  • डेटिंग साइट्स पर एक्टिविटी
  • यहां तक कि सेक्स वर्क से जुड़े सर्च

साल में दो बार इस तरह के सर्च अपने चरम पर पहुंचते हैं सर्दियों में और गर्मियों में. 2012 के एक अध्ययन में भी यही पैटर्न दिखा कि छह-छह महीने का साइकिल, जिसमें सर्चेज ठंड और गर्मी में बढ़ जाती हैं. 90 के दशक के एक अन्य अध्ययन में यह देखने की कोशिश की गई कि क्या साल के कुछ समय पर फिजिकल रिलेशन एक्टिविटी बढ़ती है. जन्मदर, गर्भपात, यौन इंफेक्शन रोग और कंडोम की बिक्री के आधार पर यह निष्कर्ष निकला कि क्रिसमस के आसपास संबंध बनाना बढ़ जाता है और कई बार यह काफी अनसेफ भी होती है. 

डेटिंग ऐप्स की क्या कहानी?

आज के दौर में इसका सीधा प्रमाण भले कम हो, लेकिन डेटिंग ऐप्स का डेटा कुछ और ही बताता है. बंबल के आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा स्वाइपिंग नवंबर के आखिरी हफ्तों से फरवरी के बीच होती है यानी, वैलेंटाइन्स डे के आसपास रिश्ते बनते भी हैं और टूटते भी. किंसी इंस्टीट्यूट के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर जस्टिन गार्सिया कहते हैं कि “लोग छुट्टियों और त्योहारों के समय रिश्तों के बारे में ज्यादा सोचते हैं.” उनके मुताबिक डेटिंग ऐप्स साल भर चलते हैं, लेकिन सर्दियों में स्वाइपिंग की रफ्तार साफ़ बढ़ जाती है, शायद इसलिए कि लोग बाहर कम जाते हैं, और नए लोगों से मिलने के मौके कम हो जाते हैं.

क्या इंसान भी मौसम देखकर रिश्ते बनाते हैं?

अब सवाल यह आता है कि क्या इंसान मौसम देखकर रिश्ता बनाता है. इसका जवाब है कि बॉयोलॉजी में इंसान और जानवरों में बड़ा अंतर है. इंडियाना यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सू कार्टर बताती हैं कि गाय जैसे जानवर सख्ती से मौसमी प्रजनन चक्र में चलते हैं, क्योंकि उन्हें बच्चे पैदा होने पर हरी घास चाहिए होती है. कई पक्षियों में भी यही पैटर्न है. हालांकि, यह पैटर्न इंसानों में काफी अलग होता है. मनुष्य मौसमी नहीं है. मौका मिला तो इंसान किसी भी मौसम में संबंध बना लेता है.

इसे भी पढ़ें- Kids Mental Health Crisis: बच्चों पर बस्ते से ज्यादा बढ़ रहा इमोशनल बर्डन, कैसे ठीक रखें बच्चों की मेंटल हेल्थ?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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