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Tree Of Death: बारिश में इस पेड़ के नीचे खड़े हुए तो जा सकती है जान? जानें 'ट्री ऑफ डेथ' का सच

Toxic Tree Effects On Humans: कई पौधे हमें अपने रंग-बिरंगे फूलों और स्वादिष्ट फलों से आकर्षित करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो चुपचाप खड़े रहते हैं और अपने भीतर ऐसे जोखिम छिपाए रखते हैं.

Is Manchineel Tree Really Deadly: नेचर हमेशा संतुलन बनाए रखती है, जहां एक तरफ सुंदरता और जीवन देने वाली चीजें हैं, वहीं दूसरी तरफ खतरे भी छिपे होते हैं.  इसी संतुलन का एक चौंकाने वाला उदाहरण है मैनशिनील पेड़, जिसे "ट्री ऑफ डेथ" यानी मौत का पेड़ कहा जाता है. समुद्री किनारों पर पाए जाने वाला यह पेड़ जितना साधारण दिखता है, उतना ही खतरनाक भी है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं. 

कई पौधे हमें अपने रंग-बिरंगे फूलों और स्वादिष्ट फलों से आकर्षित करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो चुपचाप खड़े रहते हैं और अपने भीतर ऐसे जोखिम छिपाए रखते हैं. जिनसे अनजान व्यक्ति को गंभीर नुकसान हो सकता है. समुद्री तटों से लेकर घने जंगलों तक, ऐसे कई पौधे हैं जिन्होंने खुद को बचाने के लिए बेहद खास तरह की क्षमता विकसित की है. यही वजह है कि इनके पास जाते समय उत्सुकता के साथ सावधानी भी जरूरी हो जाती है.

ट्री ऑफ डेथ क्या है?

इन्हीं खतरनाक पौधों में सबसे आगे है मैनशिनील, जिसे उसकी जहरीली प्रकृति के कारण "ट्री ऑफ डेथ" कहा जाता है. इसका नाम स्पेनिश शब्द "मंजानिला" से आया है, जिसका मतलब होता है "छोटा सेब", क्योंकि इसके फल दिखने में छोटे सेब जैसे लगते हैं. लेकिन यही मासूम दिखने वाला फल अपने अंदर जानलेवा राज छिपाए रहता है. 

कहां मिलते हैं पेड़?

यह पेड़ मुख्य रूप से कैरेबियन इलाकों, फ्लोरिडा, बहामास, सेंट्रल अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के उत्तरी हिस्सों में पाया जाता है. इसकी ऊंचाई लगभग 15 से 50 फीट तक हो सकती है और कई बार यह झाड़ी जैसा भी दिखाई देता है. इसकी सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके हर हिस्से छाल, पत्ते, रस और फल में जहरीले तत्व मौजूद होते हैं.

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क्या होती है इससे दिक्कत?

इस पेड़ के पास जाना भी जोखिम भरा हो सकता है. बारिश के दौरान इसके नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसकी पत्तियों से गिरने वाला पानी जहरीला हो सकता है और त्वचा पर जलन या छाले पैदा कर सकता है.  फ्लोरिडा विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसका दूधिया रस त्वचा पर जलन, तेज खुजली, सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ तक पैदा कर सकता है. यहां तक कि इसकी लकड़ी जलाने से निकलने वाला धुआं आंखों में जलन और अस्थायी अंधापन भी ला सकता है. 

मौत का छोटा सेब

इसके फल को मौत का छोटा सेब भी कहा जाता है. शुरुआत में इसका स्वाद मीठा लगता है, लेकिन कुछ ही देर बाद मुंह में जलन, गले में दर्द और निगलने में परेशानी शुरू हो जाती है. रेडियोलॉजिस्ट निकोला स्ट्रिकलैंड ने अपने अनुभव में बताया कि फल खाने के कुछ समय बाद ही मुंह में तेज जलन और गले में जकड़न महसूस होने लगी, जो धीरे-धीरे बेहद दर्दनाक हो गई. इसके प्रभाव में उल्टी, खून आना और डाइजेशन सिस्टम को गंभीर नुकसान तक हो सकता है.

इतना खतरनाक होने के बावजूद, यह पेड़ प्रकृति के लिए जरूरी है. इसकी जड़ें समुद्र किनारे की मिट्टी को मजबूती देती हैं और कटाव को रोकती हैं. इसके साथ ही, कुछ जीव जैसे इगुआना इसके फल को बिना नुकसान के खा लेते हैं और इसी पर अपना आश्रय भी बनाते हैं.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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