तलाक से पहले दंपति को कोर्ट ने लॉफ्टर क्लब ज्वॉइन करने की दी सलाह
पुणे की एक फैमिली कोर्ट ने हाल ही में एक अनोखा फैसला सुनाया है. तलाक की अर्जी देने वाले दंपति को कोर्ट ने मैरिज काउंसलिंग फेल होने पर लॉफ्टर योगा थेरेपी ज्वॉइन करने के लिए कहा. जानिए, क्या है पूरा मामला.

मुंबईः पुणे की एक फैमिली कोर्ट ने हाल ही में एक अनोखा फैसला सुनाया है. तलाक की अर्जी देने वाले दंपति को कोर्ट ने मैरिज काउंसलिंग फेल होने पर लॉफ्टर योगा थेरेपी ज्वॉइन करने के लिए कहा. जानिए, क्या है पूरा मामला.
क्या है मामला- फैमिली कोर्ट की जज स्वाती चौहान ने हंसने की थेरेपी के फायदे बताते हुए 4 साल से तलाक के चक्कर में फंसे दंपति को इसीलिए योगा लॉफ्टर थेरेपी की सलाह दी क्यों कि उन्हें देखकर लग रहा था जैसे ये कपल हंसना भूल गया है. जज ने कहा कि जब लोग स्ट्रेस में होते हैं तो हंसना भूल जाते हैं वो हंसी सिर्फ एक्सपर्ट ही वापिस ला पाते हैं.
काउंसलिंग हुई नाकाम- शुरू में इस सलाह पर आपसी मतभेद के बाद ये दंपति लॉफिंग थेरेपी लेने के लिए सहमत हो गया. एक बच्चे के माता-पिता ने तलाक के दौरान एक-दूसरे पर कई तरह के आरोप लगाए. कोर्ट ने इस चीज को महसूस किया कि पेरेंट्स के झगड़े का बच्चे पर नकारात्मक असर हो रहा है और बच्चा डिप्रेशन, फ्रस्टेशन, स्ट्रेस और एंजाइटी का शिकार हो रहा है. पहले इस दंपति की काउंसलिंग की गई लेकिन वो नाकाम रही.
तलाक के मामलों में लिए जाते हैं ये निर्णय- जज स्वाति ने कहा कि आमतौर पर तलाक के मामलों में दंपति को मैरिज काउंलर्स के पास भेजा जाता है. यदि कोई मनोवैज्ञानिक समस्या है तो मनोचिकित्सक के पास भेजा जाता है. कई बार बात सेटलमेंट से भी बन जाती है.
हंसने के फायदे- जज ने कहा कि हंसी आसानी से जीवन के तनाव कम कर देता है और इसका चलन भी बढ़ रहा है. उनका कहना था कि इस तरह के हंसी प्रशिक्षण के माध्यम से वैवाहिक मुद्दों को शांतिपूर्वक और व्यावहारिक तरीके से निपटाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है.
जज स्वाति ने कहा कि रिसर्च में भी ये बात सामने आई है कि साथ में हंसने से लोगों के बीच में अद्भूत कनेक्शन बन जाता है. साथ में हंसने से अपनापन बढ़ता है. इसके अलावा हंसने से स्ट्रेस हार्मोन कम होता है और गुड हार्मोन बढ़ता है. इससे लोगों की निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है.
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