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लो जी... अब लैब में भी बनने लगा चावल, नॉर्मल राइस से कितना अलग; क्या यह हेल्दी है?

यह चावल पारंपरिक खेतों में उगाया नहीं जाता, बल्कि लैब में तैयार किया जाता है. इसे एक्सट्रूजन तकनीक से बनाया गया है ताकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम और प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो.

भारत में चावल सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. हर थाली में सफेद चावल होना आम बात है, लेकिन इस लंबे समय से चली आ रही आदत में अब बदलाव आने वाला है. वैज्ञानिकों ने सीएसआईआर डिजाइनर राइस नामक नया चावल विकसित किया है, जो न सिर्फ स्वाद में पारंपरिक चावल जैसा है, बल्कि इसमें कुछ स्वास्थ्य लाभ भी जोड़ने की कोशिश की गई है.

यह चावल पारंपरिक खेतों में उगाया नहीं जाता, बल्कि लैब में तैयार किया जाता है. इसे एक्सट्रूजन तकनीक से बनाया गया है ताकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम और प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो. इसका मतलब है कि यह चावल आपके बल्ड शुगर को तेजी से बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाएगा और शरीर को ज्यादा प्रोटीन मिलेगा. लैब में बनने वाला ये चावल नॉर्मल राइस से कितना अलग है और क्या यह हेल्दी है.
 
यह चावल कैसे बनता है?

सीएसआईआर डिजाइनर राइस पारंपरिक चावल की खेती से बिल्कुल अलग है. सबसे पहले पिसे हुए चावल के आटे को लिया जाता है और इसमें चावल से निकाला गया प्रोटीन मिलाया जाता है. यह मिश्रण फिर ट्विन-स्क्रू एक्सट्रूजन तकनीक से गुजरता है. 

इस प्रक्रिया में मिश्रण को उच्च तापमान और दबाव में एक धातु के डाई से गुजारकर चावल के दानों के आकार में ढाला जाता है. इसका फायदा यह है कि दाने पॉलिश किए हुए चावल जैसी दिखते हैं, लेकिन पोषण में बेहतर हैं. आनंदहरमकृष्णन, जो इस शोध के निर्देशक हैं, बताते हैं कि इसमें कोई रासायनिक योजक नहीं इस्तेमाल होता, यह सिर्फ भौतिक प्रक्रिया है. 

लैब में बनने वाला ये चावल नॉर्मल राइस से कितना अलग है?

लैब में बनने वाला सीएसआईआर डिजाइनर राइस सामान्य सफेद चावल से कई मायनों में अलग है. इस डिजाइनर राइस की सबसे बड़ी खासियत इसका कम GI होना है. सामान्य सफेद चावल जल्दी पचता है और ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा देता है, यह टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे के जोखिम को बढ़ा सकता है. वहीं डिजाइनर राइस में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाकर इस समस्या का हल खोजा गया है, ज्यादा प्रोटीन होने से कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचता है और ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता है.  

साधारण चावल में लगभग 6–8 प्रतिशत प्रोटीन होता है, जबकि इस डिजाइनर राइस में इसे 20 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है. यह प्रोटीन चावल से निकाले गए शुद्ध प्रोटीन हैं, जो पादप-आधारित और एलर्जी-रहित हैं. हालांकि, कुछ पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटीन की क्वालिटी पूरी तरह से संतुलित नहीं है. चावल का प्रोटीन संपूर्ण अमीनो एसिड प्रोफाइल नहीं देता, इसलिए इसे अन्य स्रोतों के साथ मिलाकर ही सबसे ज्यादा फायदा होता है. 

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क्या यह हेल्दी है?

सीएसआईआर डिजाइनर राइस पारंपरिक सफेद चावल की तुलना में कुछ हद तक हेल्दी है क्योंकि इसमें प्रोटीन ज्यादा (लगभग 20 प्रतिशत) है और ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम है, जिससे ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ता है और डायबिटीज या मोटापे के जोखिम को कम किया जा सकता है. यह पादप-आधारित और एलर्जी-रहित प्रोटीन से बनाया गया है, लेकिन इसे लैब में पुनर्निर्मित किया गया है, यह अति-प्रसंस्कृत खाना माना जाता है और प्रोटीन पूरी तरह संतुलित नहीं है. इसलिए इसे रोजमर्रा के संतुलित आहार के हिस्से के रूप में खाना फायदेमंद होगा, लेकिन इसे पूरी तरह सुपर हेल्दी ऑप्शन नहीं कहा जा सकता है. 
 
लैब से मार्केट तक

सीएसआईआर ने इस तकनीक का लाइसेंस टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और चेन्नई की एसएस सोल फूड्स को दिया है. वे इसे बाजार में बेचने, मूल्य तय करने और वितरण का काम संभालेंगे.  इसकी पहुंच इसकी कीमत पर निर्भर करेगी.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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