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कई साल पहले जमकर मीठा खाते थे लोग, जानें फिर भी कैसे रहते थे फिट?

पहले के समय में लोगों का जीवन आज की तरह गतिहीन नहीं था. लोग अक्सर पैदल चलते थे, खेतों में काम करते थे और अपने दिन-प्रतिदिन के कामों में बहुत अधिक शारीरिक श्रम या फिजिकल एक्टिविटी करते थे.

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि हमारे दादा-परदादा आजकल की तुलना में कहीं ज्यादा मीठा या डेजर्ट खाते थे. फिर भी उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता था और वे ज्यादा फिट रहते थे. इसकी मुख्य वजह उनकी दिनचर्या और लाइफस्टाइल थी. उस समय मशीनों का ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता था, इसलिए लोग अपने रोजमर्रा के कामों में बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम करते थे. चाहे वह खेतों में काम करना हो, घरों के काम हाथ से करना हो या लंबी दूरी तक पैदल चलना हो. उनका शरीर लगातार सक्रिय रहता था। 

इसके अलावा उनका खानपान भी नेचुरल और शुद्ध होता था. चीनी की जगह अक्सर गुड़ या अन्य नेचुरल स्वीटनर का इस्तेमाल होता था और मिलावट बहुत कम थी. उनके आहार में बैलेंस्ड न्यूट्रीशियंस होते थे और वे प्रोसेस्ड फूड या जंक फूड से आमतौर पर दूर रहते थे. मीठा खाने के बावजूद, अच्छी शारीरिक गतिविधियां और हेल्दी लाइफस्टाइल उन्हें बीमारियों से दूर और तंदुरुस्त रखती थी. आइए जानते हैं, क्या थी उनकी लाइफस्टाइल और हेल्दी रहने की वजह.

हेल्दी लाइफस्टाइल और फिजिकल एक्टिविटी

पहले के समय में लोगों का जीवन आज की तरह गतिहीन नहीं था. लोग अक्सर पैदल चलते थे, खेतों में काम करते थे और अपने दिन-प्रतिदिन के कामों में बहुत अधिक शारीरिक श्रम या फिजिकल एक्टिविटी करते थे. उनका काम ही उनका व्यायाम था. आधुनिक जिम न होने के बावजूद, लोग पारंपरिक खेल-कूद, कुश्ती और अन्य शारीरिक गतिविधियों से जुड़े रहते थे। 

बैलेंस्ड डाइल और हेल्दी फूड

पुराने समय में लोगों के भोजन में मीठे मात्रा अधिक होने के बावजूद, उसकी गुणवत्ता और अन्य पोषक तत्व भी बेहतर थे. वे आज की तरह अत्यधिक प्रोसेस्ड या रिफाइंड चीनी का सेवन नहीं करते थे. मीठा अक्सर गुड़, शहद या प्राकृतिक फलों से आता था, जिनमें फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी होते थे.

साबुत अनाज और फाइबर

पुराने लोगों के आहार में साबुत अनाज, दालें, और सब्जियां भरपूर मात्रा में होती थीं, जिनमें उच्च फाइबर होता है. फाइबर खून में ग्लूकोज के अब्जॉर्बशन को धीमा करता है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक वृद्धि नहीं होती.

हेल्दी फैट और स्ट्रेस फ्री लाइफ

उनके भोजन में घी और अन्य नेचुरल फैट का संतुलित उपयोग होता था, जो ऊर्जा प्रदान करता था और पेट भरे होने का अहसास कराता था, जिससे अत्यधिक मीठे की लालसा कम होती थी. यही नहीं, आज की तुलना में लोगों का जीवन स्ट्रेस फ्री था. स्ट्रेस हार्मोन ब्लड शुगर को बढ़ा सकते हैं और पुराने समय में इसका स्तर आमतौर पर कम रहता था. लोग जल्दी सोते और जल्दी उठते थे, जिससे उन्हें पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद मिलती थी. 

ऐसे में देखा जा सकता है कि पुराने समय में लोग भले ही मीठा खाते थे, लेकिन उनकी एक्टिव लाइफस्टाइल, नेचुरल और पौष्टिक आहार और स्ट्रेस फ्री लाइफस्टाइल ने उनके शरीर को शुगर को बेहतर ढंग से अब्जॉर्ब करने और फिट रहने में मदद की.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

सोनम एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. यहां वह लाइफस्टाइल कैटिगरी और इसके अंतर्गत आने वाली सब-कैटिगरीज हेल्थ, होम टिप्स, रिलेशनशिप, ट्रैवल, पैरेंटिंग, ब्यूटी और फैशन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

सोनम करीब 15 साल से लेखन की दुनिया में कार्यरत हैं. इससे पहले वह अमर उजाला, दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं. इन सभी जगहों पर उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. सोनम ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन किया है.

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