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जननी सुरक्षा योजना से कैसे और कितनी मदद उठा सकती हैं गर्भवती महिलाएं, पढ़ें इससे जुड़ी पूरी जानकारी

नवजात शिशु तथा गर्भवती महिलाओं की स्थिति में सुधार करने के लिए सरकार समय-समय पर योजनाएं आरंभ करती रहती है. जननी सुरक्षा योजना भी उन्हीं योजनाओं में से एक है. इस योजना का आरंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2005 में किया था.

जननी सुरक्षा योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत एक सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम है. इसका उद्देश्य गरीब गर्भवती महिला में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना है. केंद्र सरकार इसके लिए गर्भवती महिलाओं को आर्थिक मदद देती है. इस योजना का लाभ केवल गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाली महिलाएं ही उठा सकती हैं. जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं को दो श्रेणियों में बांटा गया है. इस योजना का लाभ उठाने के लिए गर्भवती महलाओं को सरकारी अस्पताल या मान्य प्राप्त निजी अस्पताल में प्रसव कराना जरूरी है. इस योजना के तहत सरकार द्वारा दी जाने वाली धनराशि सीधे लाभार्थी के बैंक अकाउंट में भेजी जाती है. इसलिए गर्भवती महिलाओ का बैंक अकाउंट होना अनिवार्य है और बैंक अकाउंट आधार कार्ड से लिंक भी होना चाहिए. इस आलेख के माध्यम से आपको जननी सुरक्षा योजना से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी.

जननी सुरक्षा योजना के लिए महिलाओं की दो श्रेणियां

ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाएं : जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत ग्रामीण महिलाएं, जो गर्भवती हैं और गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करती हैं, उन्हें सरकार द्वारा 1400 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. इसके अलावा आशा सहयोगी को प्रसव प्रोत्साहन के लिए 300 रुपए और प्रसव के बाद सेवा प्रदान करने के लिए 300 रुपए दी जाती है.

शहरी क्षेत्रों की गर्भवती महिलाएं : इस योजना के अंतर्गत शहरी क्षेत्र की गरीब गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय 1000 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. इसके अलावा आशा सहयोगी को प्रसव प्रोत्साहन के लिए 200 रुपए और प्रसव के बाद सेवा प्रदान करने के लिए 200 रुपए प्रदान किए जाते हैं.

जननी सुरक्षा योजना का उद्देश्य

चूंकि गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाली महिलाएं गर्भावस्था के समय अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाती हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता अभी भी काफी मुश्किल है. इन सभी परशानियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस योजना को शुरू किया है. इस योजना के जरिये सरकार न केवल माताओं की मृत्यु दर को कम करना चाहती है, बल्कि नवजात की मृत्यु दर में भी कमी लाना चाहती है. इससे गरीब महिलाएं भी अस्पताल में सुरक्षित डिलीवरी करवा सकें ताकि जच्चा-बच्चा आपात स्थितियों से बच सकें.

जननी सुरक्षा योजना की विशेषताएं

यह 100 प्रतिशत केंद्र प्रायोजित योजना है और यह नकद सहायता को एकीकृत करता है. इस योजना ने आशा कार्यकर्ता को मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में पहचान दी है. जो गर्भवती महिलाएं आंगनबाड़ी चिकित्सकों या आशा वर्कर की सहायता से घर पर बच्चे को जन्म देती है, उन्हें 500 रुपए की राशि मिलेगी. बच्चे की नि:शुल्क डिलीवरी के बाद पांच साल तक जच्चा-बच्चा के टीकाकरण को लेकर उन्हें जानकारी भेजी जाती है और नि:शुल्क टीकाकरण किया जाता है. इस योजना के तहत पंजीकरण कराने वाली सभी महिलाओं को कम से कम दो प्रसव-पूर्व जांच बिल्कुल मुफ्त दी जाती है. इसके अलावा आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता डिलीवरी के बाद की अवधि में भी उनकी सहायता करती हैं.

जननी सुरक्षा योजना की पात्रता

इस योजना के तहत देश के ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों की गर्भवती महिलाएं अपना पंजीकरण करवा सकती हैं. सरकार द्वारा इस योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को तभी आर्थिक सहायता प्रदना की जाती है, जब वह 19 वर्ष या उससे अधिक आयु के हों। योजना के तहत नामांकित महिलाओं को केवल सरकारी अस्पतालों या सरकार द्वारा चुनी गई निजी अस्पताल में ही प्रसव कराना होगा. केवल दो बच्चों को जन्म देने के लिए गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा और वित्तीय सुविधाएं सरकार की तरफ से प्रदान की जाएंगी। इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे आने वाली महिलाओं को ही लाभ प्रदान किया जाएगा.

योजना का लाभ लेने के लिए अनिवार्य दस्तावेज

आवेदिका का आधार कार्ड, बीपीएल राशन कार्ड, पते का सबूत, निवास प्रमाण पत्र, जननी सुरक्षा कार्ड, सरकारी अस्पताल द्वारा जारी डिलीवरी सर्टिफिकेट, बैंक अकाउंट पासबुक, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटो.

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