Coronavirus: क्या बच्चों के लिए कोविड-19 वैक्सीन सुरक्षित होगी? जानिए तमाम सवालों के अहम जवाब
बहुत सारे लोगों का विश्वास है कि वैक्सीन के तैयार हो जाने से परिजनों और शिक्षकों के लिए अच्छा संकेत है. उसकी वजह से बच्चों का स्कूल जाना, अन्य संस्थानों का दोबारा खुलना और हर शख्स का सामूहिक स्वास्थ्य संभव हो सका है. लेकिन वहीं कुछ अन्य ऐसे लोग भी हैं जो बच्चों पर वैक्सीन के इस्तेमाल से झिझकते हैं.

बच्चों को कोरोना वायरस के खिलाफ प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीन नहीं मिल सकती, लेकिन वैक्सीन के हवाले से कुछ सवाल अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं. बच्चों को कोविड-19 का बहुत ज्यादा खतरा नहीं है, लेकिन सुपर स्प्रेडर का काम कर सकते हैं और सबसे अहम बात ये है कि कुछ बच्चे जिंदगी भर की पेचीदगी से पीड़ित हो सकते हैं.
बहुत सारे लोगों का विश्वास है कि वैक्सीन के तैयार हो जाने से परिजनों और शिक्षकों के लिए अच्छा संकेत है. उसकी वजह से बच्चों का स्कूल जाना, अन्य संस्थानों का दोबारा खुलना और हर शख्स का सामूहिक स्वास्थ्य संभव हो सका है. लेकिन वहीं कुछ अन्य ऐसे लोग भी हैं जो बच्चों पर वैक्सीन के इस्तेमाल से झिझकते हैं.
उनकी चिंता इस बात पर है कि कोविड-19 की वैक्सीन प्रायोगिक है पूरी तरह सुरक्षित और खतरे से खाली नहीं है. इसका मतलब हुआ कि कुछ बच्चों को सुरक्षा नहीं मिल सकती. हालांकि, बच्चों के लिए वैक्सीन का मानव परीक्षण जारी है. फिर भी उनके लिए कोविड-19 वैक्सीन के संबंध में कुछ प्रमुख चिंता और संदेह बरकरार हैं.
वास्तव में कोविड वैक्सीन कब तक मुहैया होगी? कोविड-19 वैक्सीन का डोज आपातकालीन परिस्थिति में ज्यादा जोखिम वाले ग्रुप को अभी दिया जा रहा है. चूंकि वैक्सीन का मानव परीक्षण न तो बच्चों, स्तनपान करानेवाली महिलाओं और न ही गर्भवती महिलाओं पर किया गया था, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि इन लोगों को मान्यता मिलने तक इंतजार करना पड़ सकता है. 2021 के मध्य में बच्चों, स्तनपान करानेवाली और गर्भवती महिलाओं पर वैक्सीन के कारगर होने की हरी झंडी मिल सकती है.
अभी तक इस बात की गारंटी नहीं है कि वर्तमान वैक्सीन के डोज बच्चों के लिए प्रभावी होंगे, लेकिन ऐसा करना वैज्ञानिक नियमों के खिलाफ होगा. भारत में टीकाकरण को साकार करने के लिए लंबा समय लग सकता है क्योंकि किसी घरेलू कंपनी ने अभी तक अपने मानव परीक्षण में बच्चों को शामिल करने के मंसूबे का एलान नहीं किया है. जब तक परीक्षण नहीं शुरू हो जाता, तब तक तस्वीर साफ नहीं होगी.
क्या बच्चों को अतिरिक्त डोज की जरूरत होगी? व्यस्कों की तुलना में बच्चों का इम्यूनिटी सिस्टम थोड़ा अलग तरीके से काम करता है. कुछ बच्चों में वायरस के खिलाफ लड़ने की ज्यादा क्षमता होती है, जबकि कुछ बच्चों में अभी भी विकसित हो रहा होता है. ज्यादातर लोगों का सवाल है कि क्या बच्चों को व्यस्कों के मुकाबले वैक्सीन के ज्यादा डोज या कम डोज की जरूरत होगी.
फिलहाल, अभी इसका स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है. निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि क्या टीकाकरण कार्यक्रम बच्चों के लिए अलग होगा. बच्चों के लिए वैक्सीन का मंसूबा बनाने वाली कंपनियों में से सिर्फ मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड ने उनके लिए दो डोज की बात कही है.
बच्चों का टीकाकरण नहीं कराने पर क्या होगा? जहां बहुत सारे लोगों को कोविड-19 वैक्सीन के पहुंचने की उम्मीद है, वहीं कुछ लोगों का इस्तेमाल करने पर झिझक बरकरार है. सर्वेक्षण से पता चला है कि वैक्सीन के प्रति संदेह जतानेवालों की संख्या बढ़ रही है. इसका मतलब हुआ कि लोगों के एक ग्रुप को अपने बच्चों के टीकाकरण में कोई दिलचस्पी नहीं होगी. भारत में भी अजीब तरह से लोगों का संदेह ऊपर उठ रहा है. ऐसी स्थिति में महामारी का खात्मा करना निश्चित रूप से मुश्किल होगा.
क्या बच्चों को मास्क पहनना जारी रखना होगा? वैक्सीन हमारी ज्यादातर समस्याओं को हल कर सकती है लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि बच्चे या व्यस्क बचे हुए हैं. जैसा कि बहुत सारे विशेषज्ञों ने कहा है कि हमें सुरक्षा के बुनियादी एहतियात को बरतने की जरूरत है जिसमें कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ मास्क पहनना और सुरक्षित दूरी बनाना शामिल है. वैक्सी उस सूरत में पूरी तरह प्रभावी हैं, जब उचित ढंग से डोज दिया जाए. इसके बावजूद अभी भी खुद की सुरक्षा और कोविड-9 के खतरे को कम करने के लिए मास्क सबसे बेहतर तरीका है.
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