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बिना खुदाई किए ASI कैसे बताता है कि जमीन के अंदर मंदिर है या मस्जिद? जान लीजिए तरीका

एएसआई देश के सांस्कृतिक ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण करता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एएसआई को बिना खुदाई के कैसे पता चलता है कि कहां पर मंदिर है या मस्जिद है. जानिए किस तकनीक का करते हैं इस्तेमाल.

स्कूलों की किताबों में आपने पढ़ा होगा कि मानव सभ्यता हजारों सालों पुरानी है. इसको लेकर कई बार वैज्ञानिक अलग-अलग दावा भी करते हैं. इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर कई जगहों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) खुदाई करके इसका सबूत भी निकालते हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को आखिर बिना खुदाई के कैसे ये पता चलता है कि कहां पर मंदिर है और कहां मस्जिद है. आज हम आपको इसके बार में बताएंगे. 

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण

बता दें कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) देश के सांस्कृतिक ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण और रखरखाव करने वाला एक सरकारी संगठन है. इसके अलावा ये संगठन देश में पुरातात्विक शोध करता है. इतना ही नहीं एएसआई देश में सभी पुरातात्विक गतिविधियों को नियंत्रित करता है और यह राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों और अवशेषों का रखरखाव करता है.

बिना खुदाई के कैसे चलता है पता?

आपने कई बार खबरों और रिपोर्ट्स में सुना होगा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को बिना खुदाई के ये पता चल जाता है कि नीचे कोई इमारत है या नहीं है. लेकिन सवाल ये है कि बिना खुदाई के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ये कैसे पता चलता है कि धरती के नीचे क्या है. आज हम आपको बताएंगे कि किन तकनीकों का इस्तेमाल करके भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ये पता चलता है कि धरती के नीचे क्या है. 

ASI को इन तरीकों से चलता है पता

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर एएसआई को बिना किसी जगह पर खुदाई किए कैसे जान जाता है कि वहां पर कुछ काम का है या नहीं है. क्योंकि एएसआई बिना किसी ठोस सबूत के कहीं पर भी खुदाई नहीं करता है. 

साइज़्मिक मेथड

एएसआई की टीम साइज़्मिक वेव का भी इस्तेमाल करती है. ये एक तरह की तरंग है, जो भूकंप के समय निकलती है. दरअसल भूकंप से होने वाली तबाही की वजह ये तरंग ही होती है. 

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक मेथड

दूसरा तरीका इलेक्ट्रोमैग्नेटिक मेथड होता है. बता दें कि धरती से मैग्नेटिक तरंगें निकलती हैं, जिन्हें मैग्नेटोमीटर के जरिए डिटेक्ट किया जाता है. धरती की हर लोकेशन पर मैग्नेटिक तरंगों को मैग्नेटोमीटर के जरिए डिटेक्ट किया जा सकता है. वहीं जमीन के नीचे सड़क या दीवार के अवशेष हैं, तो पत्थरों और ईंटों की वजह से उस जगह की मैग्नेटिक फील्ड में बदलाव आ जाता है. 

ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रेडार

तीसरी तकनीक का नाम ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रेडार है. दरअसल मशीन से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें निकलती हैं, जो ज़मीन के अंदर जाती हैं. इतना ही नहीं अंदर जाकर तरंगें जिस हिसाब से रिफ्लेक्ट होती हैं, उस हिसाब से कंप्यूटर पर ज़मीन के अंदर दबे ढांचे की तस्वीर बन जाती है. इसको एक्स-रे टाइप भी कह सकते हैं. ग्राउंड पेनिट्रेशन रेडार का इस्तेमाल अयोध्या में भी हुआ था. 

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