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House Courtyard: पुराने घरों में क्यों बनाया जाता था आंगन, जानें इसके पीछे का साइंस

House Courtyard: पुराने समय में घरों में आंगन बनाए जाते थे. आइए जानते हैं क्या थी इसके पीछे की वजह और क्या था इनका फायदा.

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  • आंगन प्राकृतिक कूलिंग और वेंटिलेशन का काम करते थे।
  • ये सूरज की रोशनी से घर को रोशन करते थे।
  • आंगन तापमान नियंत्रण कर घर को ठंडा रखते थे।
  • घर के आंगन स्वास्थ्य लाभ और पारिवारिक जुड़ाव देते थे।

House Courtyard: एयर कंडीशनर, एलइडी लाइट्स और आधुनिक वेंटीलेशन सिस्टम आने से काफी पहले पारंपरिक घरों को बड़ी समझदारी से डिजाइन किया जाता था. इनकी सबसे बड़ी खासियत थी घर का आंगन. यह घर के बीच का एक पूरा हिस्सा होता है जो सिर्फ खूबसूरती या फिर संस्कृति का हिस्सा भर नहीं होता. असल में आंगन क्लाइमेट रेस्पॉन्सिव आर्किटेक्चर का एक बेहतरीन उदाहरण थे. 

एक प्राकृतिक वेंटीलेशन 

आंगन एक प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम की तरह काम करते थे. दिन के समय जब घर के अंदर की हवा गर्म हो जाती थी तो वह ऊपर उठकर खुले आंगन के रास्ते बाहर निकल जाती थी. इससे एक लो प्रेशर जोन बन जाता था जो दरवाजों और खिड़कियों से ठंडी हवा को अंदर खींचता था. इससे हवा का बहाव लगातार बना रहता था. इस प्रक्रिया को स्टैक इफेक्ट कहा जाता है.

प्राकृतिक रोशनी का जरिया 

जब बिजली उपलब्ध नहीं थी तब घरों को रोशन करने में आंगन की बड़ी भूमिका होती थी. सूरज की रोशनी खुले हिस्से से अंदर आती थी और आसपास के कमरों और बरामदों में फैल जाती थी. इससे पूरा घर दिनभर रोशन रहता था. इसने बिना किसी बिजली के घरों को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने में मदद की.

प्राकृतिक तापमान नियंत्रण 

कई आंगनों में तुलसी का पौधा या फिर पानी का कोई छोटा सा कुंड जैसी चीज होती थी. ये चीज इवेपरेशन के जरिए आसपास की हवा को ठंडा करने में मदद करती थी. यही वजह है कि घर के अंदर का तापमान बाहर के तापमान से कम बना रहता था. यहां  तक कि गर्मियों के सबसे गर्म दिनों में भी. इससे घर के अंदर एक आरामदायक 'माइक्रो-क्लाइमेट' बना रहता था.

स्वास्थ्य लाभ 

आंगन यह पक्का करता था कि परिवार के सदस्यों को अपने घर की सुरक्षा के घेरे में रहते हुए ही सूरज की रोशनी और ताजी हवा मिल सके. यह खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए काफी फायदेमंद था. इससे विटामिन D के जरिए हड्डियों को मजबूती मिलती थी और उनका पूरा स्वास्थ्य बेहतर होता था.

विज्ञान से हट कर देखें तो आंगन घर का दिल हुआ करता था. इसका इस्तेमाल अनाज सुखाने, बारिश का पानी इकट्ठा करने, घर के कामकाज निपटाने और परिवार के लोगों के साथ मिलकर समय बिताने के लिए किया जाता था.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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