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क्यों कहते हैं रविवार को तुलसी के पत्ते मत तोड़ो? क्या है इस दिन जल ना चढ़ाने की वजह

Tulsi Puja on Sunday: क्यों कहा जाता है कि संडे को तुलसी पर जल चढ़ाकर पूजा मत करो, क्यों रविवार को ही तुलसी के पत्ते तोड़ने की मनाही है? ये आखिर संडे को ऐसा होता क्या है, जो पूजा करने पर भी पाबंदी है!

Why Should Not Offer Water To Tulsi Plant On Sunday: तुलसी और अदरक की चाय घर में हर दिन बनती है. लेकिन रविवार को छुट्टी होने के बाद भी कई बार चाय में तुलसी का फ्लेवर नहीं मिल पाता. कारण, क्योंकि शनिवार को आप तुलसी के अतिरिक्त पत्ते तोड़कर रखना भूल गए थे और आज रविवार है तो परिवार में कोई भी तुलसी को हाथ तक नहीं लगा सकता. ऐसे में मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर क्यों रविवार को तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ सकते?

इतना ही नहीं रविवार को पूजा-पाठ करने के बाद जल तुलसी के गमले में चढ़ाने की मनाही होती है. घर में मम्मी और दादी अक्सर इसके लिए मना करती हैं और कहती हैं कि आज जल तुलसी में नहीं किसी और गमले में चढ़ा दो. आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है या फिर सिर्फ अंधविश्वास के चलते ऐसा किया जाता रहा है और आज भी हो रहा है? आज इसी सवाल का जवाब जानते हैं...

तुलसी और इंडियन सोसायटी

हमारे भारतीय समाज में तुलसी आज भी सबसे पवित्र पौधा माना जाता है. हमारे लिए तुलसी कोई मेडिकल प्लांट बाद में है, सबसे पहले एक धार्मिक पौधा है. यही कारण है कि लगभग सभी हिंदुओं के घर में आपको तुलसी का पौधा जरूर मिल जाएगा. 

बात जब तुलसी की आती है तो हम साइंस से पहले धार्मिक मान्यताओं के बारे में विचार करते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि तुलसी के पौधे का वर्णन हमारे धर्म ग्रंथों में मिलता है और कोई भी पूजा-हवन तुलसी की पत्तियों के बिना पूरा नहीं होता है. तो पहले थोड़ी-सी जानकारी ये ले लीजिए कि ऐसा होने के पीछे कारण क्या है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, तुलसी का पौधा देवी तुलसी का रूप है. देवी तुलसी, भगवान विष्णु के एक रूप भगवान शालीग्राम की पत्नी हैं. विष्णु जी द्वारा देवी तुलसी को यह वरदान प्राप्त है कि जिस पूजन में उनकी उपस्थिति नहीं होगी, उस पूजन को भगवान स्वीकार नहीं करेंगे. यह वरदान तुलसी जी को कब और क्यों मिला, इस बारे में किसी और आर्टिकल में बात करेंगे. अभी के लिए इतना समझ लीजिए कि तुलसी को प्राप्त इसी वरदान के कारण हर पूजन में उनकी पत्तियों का उपयोग किया जाता है.

रविवार को क्यों नहीं तोड़ते तुलसी के पत्ते?

हिंदू धर्म ग्रंथों में तुलसी एक पौधा होने से अधिक देवी तुलसी का स्वरूप है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रविवार को देवी तुलसी विष्णु ध्यान में लीन रहती हैं और विश्राम करती हैं. जबकि अन्य दिनों में जनकल्याण और अपने भक्तों के कल्याण के लिए उपस्थित रहती हैं. रविवार को तुलसी जी के ध्यान और विश्राम में कोई विघ्न ना हो, कोई बाधा ना आए इस कारण रविवार को तुलसी में जल अर्पित करने और तुलसी के पत्ते तोड़ने के लिए मना किया जाता है. 

इस दिन भी नहीं चढ़ाते तुलसी को जल

केवल रविवार को ही नहीं बल्कि एकादशी के दिन भी तुलसी में जल चढ़ाने और तुलसी के पत्ते तोड़ने को वर्जित माना गया है यानी ऐसा करने की मनाही है. ऐसा इसलिए क्योंकि धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन तुलसी जी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत करती हैं. ऐसे में यदि आप उन पर जल अर्पित करेंगे तो उनका व्रत खंडित हो जाएगा. साथ ही यदि आप उनके पत्ते तोड़ेंगे तो उन्हें कष्ट होगा और विघ्न होगा. इसलिए हर रविवार और एकादशी पर तुलसी जी को दूर से ही प्रणाम किया जाता है.

 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

यह भी पढ़ें: खरमास में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य, जानें इससे जुड़ी अहम जानकारी

 

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