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काला कोट और सफेद शर्ट ही क्यों पहनते हैं वकील?...इतिहास से जुड़ी है इसकी दिलचस्प वजह

ब्रिटेन की महारानी क्वीन मैरी की मृत्यु पर उनके पति राजा विलियम्स ने सार्वजनिक रुप से शोक मनाने के लिए सभी जजों और वकीलों को काले गाउन पहनकर इकट्ठा होने का आदेश दिया था.

Lawyers Black Coat: आपने देखा होगा कि वकील काला कोट पहनकर ही जिरह करते हैं, न सिर्फ जिरह बल्कि अपने कार्यालयों में भी वह काला कोट पहनकर ही बैठते हैं. आखिर वकील यही रंग क्यों पहनते हैं और इसका चलन कब से शुरू हुआ? अपने इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इसके बारे में बताएंगे. आपको जानकर हैरानी होगी कि पहले वकील या न्यायाधीश काले रंग की पोशाक नहीं पहनते थे. इसका चलन इतिहास की एक खास घटना से जुड़ा है. आइए जानते हैं...

1327 में हुई वकालत की शुरुआत
वकालत की शुरुआत एडवर्ड तृतीय ने साल 1327 में की थी. तब ड्रेस कोड के आधार पर न्यायाधीशों की वेशभूषा तैयार की गई थी. तब जज अपने सर पर एक बालों वाली विग पहनते थे. वकालत के शुरुआती समय में वकीलों को चार भागों स्टूडेंट (छात्र), प्लीडर (वकील), बेंचर और बैरिस्टर में बांटा गया था और ये सभी जज का स्वागत करते थे.

वेशभूषा में हुए बदलाव
तब अदालत में सुनहरे लाल कपड़े और भूरे रंग से बना हुआ एक गाउन पहना जाता था. बाद में साल 1600 में वकीलों की वेशभूषा में बदलाव आया और साल 1637 में यह प्रस्ताव रखा गया कि काउंसिल को जनता के अनुरूप ही कपड़े पहनने चाहिए. जिसके बाद वकीलों ने लंबे गाउन पहनने शुरू कर दिए. माना जाता है उस समय कि इस तरह की वेशभूषा न्यायाधीशों और वकीलों को अन्य आम व्यक्तियों से अलग बनाती थी.

कैसे हुए काले कपड़ों की शुरूआत?
साल 1694 में चेचक से ब्रिटेन की महारानी क्वीन मैरी की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके पति राजा विलियम्स ने सार्वजनिक रुप से शोक मनाने के लिए सभी जजों और वकीलों को काले गाउन पहनकर इकट्ठा होने का आदेश दिया था. यह आदेश कभी भी रद्द नहीं हुआ और तब से लेकर आज तक यह प्रथा चली आ रही है कि वकील काला गाउन पहनते हैं.

आज के समय में काला कोट वकीलों की पहचान बन गया है. अधिनियम 1961 के तहत अदालतों में सफेद बैंड टाई के साथ काला कोट पहन कर आना अनिवार्य किया गया. माना जाता है कि काला कोट और सफेद शर्ट वकीलों में अनुशासन लाता है और उनमें न्याय के प्रति विश्वास को कायम रखता है.

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