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सड़क क्रॉस करने वाली पट्टी को जेब्रा क्रॉसिंग ही क्यों कहा जाता है, कैसे पड़ा यह नाम?

Zebra Crossing: अपने सड़क की जेब्रा क्रॉसिंग को तो जरूर देखा होगा. आइए जानते हैं इसका यह नाम कैसे पड़ा.

Zebra Crossing: जब भी पैदल चलने वाले लोग किसी व्यस्त सड़क को पार करते हैं तो जेब्रा क्रॉसिंग की जाने पहचाने काली सफेद धारियां तुरंत दिखाई देती हैं. लेकिन इस पैदल यात्री क्रॉसिंग को जेब्रा क्रॉसिंग ही क्यों कहा जाता है. आइए जानते हैं कि आखिर इसका यह नाम कैसे पड़ा और क्या है इसका इतिहास.

इसका विचार प्राचीन रोम से आया 

पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित रास्ता बनाने का मूल विचार आधुनिक जेब्रा क्रॉसिंग से काफी पुराना है. पॉम्पेई जैसे प्राचीन रोमन शहरों में सड़कों पर ऊंचे पत्थर लगाए जाते थे ताकि पैदल चलने वाले कीचड़ या फिर गंदे पानी में पैर रखे बिना सड़क पार कर सकें. यह ऊंचे पत्थर घोड़े से चलने वाली गाड़ियों को भी उनके बीच से गुजरते समय धीमा होने के लिए मजबूर करते थे.‌ हालांकि यह सिस्टम आज की पेंट की गई क्रॉसिंग से काफी अलग था, लेकिन इसका मूल उद्देश्य एक ही था. पैदल चलने वालों की आवाजाही को तेजी से चलने वाले ट्रैफिक से अलग करना. 

ब्रिटेन में सड़क सुरक्षा संकट 

आधुनिक जेब्रा क्रॉसिंग 20वीं सदी में ब्रिटेन में सड़क सुरक्षा की बढ़ती समस्या से सामने आई. जैसे-जैसे लोगों के पास गाड़ियां बढ़ीं ब्रिटिश सड़कों पर पैदल चलने वालों की मौत एक बड़ी चिंता बन गई. 1947 और 1948 के बीच ब्रिटेन की रोड रिसर्च लेबोरेटरी के शोधकर्ताओं ने लगभग 1000 जगह पर प्रयोग किया. डॉ डब्ल्यू एच ग्लैनविले और डॉ चार्ल्सवर्थ सहित वैज्ञानिकों ने अलग-अलग रंगों और पैटर्न का परीक्षण किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्राइवर किन निशानों को सबसे आसानी से पहचान सकते हैं. इन प्रयोगों से आखिरकार जानी पहचानी धारीदार पैटर्न को पैदल यात्रियों के क्रॉसिंग पॉइंट को आसानी से दिखाने का एक शानदार तरीका माना गया. 


सड़क क्रॉस करने वाली पट्टी को जेब्रा क्रॉसिंग ही क्यों कहा जाता है, कैसे पड़ा यह नाम?

पहली आधिकारिक जेब्रा क्रॉसिंग 

पहली आधिकारिक जेब्रा क्रॉसिंग को 31 अक्टूबर 1951 को इंग्लैंड में स्लो हिट स्ट्रीट पर शुरू किया गया था. इसकी शुरुआत ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को व्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित किया. इस सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि पैदल चलने वालों को सड़क पार करने के लिए एक साफ जगह मिल सके और ड्राइवर की रफ्तार धीमी करने के लिए एक साफ चेतावनी भी मिल सके. जेब्रा क्रॉसिंग का यह शब्द इन बारी-बारी से बनी धारी की वजह से पड़ा. क्योंकि इस तरह की धारी जेब्रा के काले सफेद पैटर्न से मिलती-जुलती थी. 

काली और सफेद धारियां ही क्यों चुने गई? 

रंगों का चुनाव सिर्फ दिखावे के लिए नहीं किया गया था. दरअसल यह मुख्य बात थी कि वह कितनी आसानी से दिखाई देते हैं. सफेद निशान डामर जैसी काली सड़क की सतह पर साफ दिखाई देते हैं. इससे ड्राइवर काफी दूर से ही क्रॉसिंग को पहचान सकते हैं. खासकर रात में हेडलाइट की रोशनी में. चौड़ी धारी एक खास तरह का विजुअल पैटर्न भी बनाती हैं. जब भी कोई गाड़ी तेजी से पास आती है तो बार-बार दिखने वाला निशान ड्राइवर की नजर के सामने से तेजी से गुजरता है.  इससे क्रॉसिंग को नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाता है और ड्राइवर को रफ्तार कम करने के लिए एक आईडिया मिलता है. बारिश, कोहरे या फिर अंधेरे जैसी स्थिति में दूसरे रंगों का दिखाना मुश्किल हो सकता है. 


सड़क क्रॉस करने वाली पट्टी को जेब्रा क्रॉसिंग ही क्यों कहा जाता है, कैसे पड़ा यह नाम?

बेलिशा बीकन और जिग जैग लाइन क्या है?

पारंपरिक ब्रिटिश जेब्रा क्रॉसिंग के साथ अक्सर बेलिशा बीकन होते हैं. यह क्रॉसिंग के पास खंबों पर लगी चमकती हुई पीली नारंगी लाइट होती है. इसे 1934 में तत्कालीन परिवहन मंत्री लेस्ली होरे बेलिशा ने पैदल यात्रियों की क्रॉसिंग को ज्यादा साफ तौर पर दिखाने के लिए शुरू किया था.

एक और जानी पहचानी चीज है क्रॉसिंग के पास बनी जिग जैग सड़क मार्किंग. ये निशान एक प्रतिबंधित क्षेत्र को दर्शाते हैं जहां गाड़ियों को पार्क या फिर ओवरटेक नहीं किया जा सकता. इस क्षेत्र को खाली रखने से ड्राइवर को सड़क पार करने का इंतजार कर रहे पैदल यात्रियों को देखने में मदद मिलती है. साथ ही पार्क की गई गाड़ियां उनके नजारे में रुकावट नहीं डालती. 

पैदल यात्रियों और गाड़ियों के लिए नियम 

लागू ट्रैफिक नियम के तहत जेब्रा क्रॉसिंग आमतौर पर पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देती है. संबंधित देश के खास नियम के मुताबिक जब भी कोई पैदल यात्री सड़क पार कर रहा हो या फिर साफ तौर पर पार करने का इंतजार कर रहा हो तो ड्राइवर से रफ्तार कम करने को रुकने की उम्मीद की जाती है. सड़क ट्रैफिक का वियना कन्वेंशन पैदल यात्री क्रॉसिंग के संबंध में एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा भी प्रदान करता है. हालांकि अलग-अलग देश अपने-अपने कानून के जरिए ट्रैफिक नियम लागू करते हैं.

जहां सड़क पर केंद्रीय डिवाइडर या फिर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित द्वीप होता है वहां क्रॉसिंग को अलग-अलग चरण में प्रभावी ढंग से चालू किया जा सकता है. इस वजह से सड़क के दूसरे हिस्से को पार करने से पहले पैदल यात्री को सेंट्रल आईलैंड पर रुकना और ट्रैफिक की जांच करना पड़ सकता है.

यह भी पढ़ेंः अगर कोई Satellite गिर जाए तो नुकसान की जिम्मेदारी किसकी? स्पेस लॉ समझिए

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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