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फ्रांस ने अमेरिका को क्यों दिया था Statue of Liberty? अब मांग रहा वापस; कैसे यहां तक पहुंचा था इतना बड़ा स्टैच्यू

स्टैच्यु ऑफ लिबर्टी अमेरिका का एक ऐतिहासिक स्मारक और स्वतंत्रता का प्रतीक है. फ्रांस ने 1886 में स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ के मौके पर अमेरिका को यह प्रतिमा उपहार स्वरूप भेंट की थी.

Statue of Liberty: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता पर काबिज होने के बाद दुनिया की व्यापारिक नीति पूरी तरह बदल गई है. खास तौर पर यूरोपीय देशों पर इसका असर पड़ा है, जिसको लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो चले हैं. इसमें सबसे बड़ा मुद्दा रूस और यूक्रेन युद्ध भी है. दरअसल, ट्रंप ने यूक्रेन को सैन्य सहायता देने से इंकार कर दिया, बल्कि यूरोपीय देश इसके पक्ष में नहीं थे. 

इस बीच फ्रांस ने अमेरिका से ऐतिहासिक 'Statue of Liberty' वापस देने की मांग कर दी है. यूरोपीय संसद के सदस्य व फ्रांस की वामपंथी पार्टी के सह अध्यक्ष राफेल ग्लुक्समान ने कहा है कि अमेरिका इस ऐतिहासिक धरोहर के काबिल नहीं रह गया है और उसे अब स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को वापस कर देना चाहिए. ऐसे में लोग यह जानना चाहते हैं कि फ्रांस ने अमेरिका को यह ऐतिहासिक स्टैच्यू क्यों दिया था? इसका इतिहास क्या है और इतना बड़ा स्टैच्यू अमेरिका तक कैसे पहुंचा था. 

फ्रांस ने क्यों दिया था इतना बड़ा गिफ्ट

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी अमेरिका का एक ऐतिहासिक स्मारक और स्वतंत्रता का प्रतीक है. हर साल दुनियाभर में लाखों पर्यटक इसे देखने के लिए पहुंचते हैं. फ्रांस ने 1886 में स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ के मौके पर अमेरिका को यह प्रतिमा उपहार स्वरूप भेंट की थी. इस मूर्ति को फ्रांसीसी मूर्तिकार फ्रेडरिक ऑगस्टे बार्थोल्डी ने डिजाइन किया था. यह प्रतिमा फ्रांस और अमेरिका के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतीक के रूप में देखी जाती है, जो आजादी, लोकतंत्र और न्याय का प्रतीक बन चुकी है. 

अमेरिका कैसे पहुंचा था इतना बड़ा स्टैच्यू

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की ऊंचाई 93 मीटर यानी करीब 305 फीट है. यह प्रतिमा तांबे की बनी हुई है. इसके सिर पर 7 किरणों वाला मुकुट है, जो सातों महाद्वीपों और सात समुद्रों का प्रतीक है. स्टैच्यू के पैरों में टूटी हुई जंजीरें हैं, जो गुलामी से आजादी का प्रतीक है. फ्रांस ने 1886 में यह प्रतिमा अमेरिका को उपहार में थी. इसके निर्माण की लागत फ्रांस ने ही उठाई थी, जबकि अमेरिका ने पेडेस्टल के लिए फंड जुटाया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इतनी ऊंची और बड़ी प्रतिमा 350 टुकड़ों में विभाजित करके 214 बॉक्सों में रखकर एक जहाज से अमेरिका भेजी गई थी, जिसे 26 अक्टूबर 1886 में न्यूयॉर्क हार्बर में स्थापित किया गया था. 

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प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

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