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Scrap Tyres: देश क्यों खरीदते हैं कटे-फटे टायर, जानें कहां होता‌ है इनका इस्तेमाल?

Scrap Tyres: कई देश कटे-फटे टायरों को इंपोर्ट करते हैं. आइए जानते हैं कि इन टायरों का कहां इस्तेमाल होता है.

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  • भारत सस्ते स्क्रैप टायर आयात कर औद्योगिक उपयोग करता।
  • स्क्रैप टायरों से पायरोलिसिस तेल, औद्योगिक ईंधन में प्रयुक्त।
  • रिट्रेडिंग, रबर पाउडर, स्टील पुनर्प्रसंस्करण अन्य उपयोग हैं।

Scrap Tyres:  पुराने और घिसे पिटे टायर भले ही कबाड़ से ज्यादा कुछ ना हों लेकिन कई देशों में वे एक काफी ज्यादा वैल्युएबल कच्चा माल बन गए हैं. भारत और कई दूसरे विकासशील देश हर साल लाखों टन स्क्रैप टायर इंपोर्ट करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उन्हें औद्योगिक ईंधन, रबर उत्पादन और स्टील में रीसायकल किया जा सकता है. इस बीच अमीर देश सख्त पर्यावरण नियमों के तहत इनके निपटान के बोझ को कम करने के लिए इन टायरों का निर्यात करते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान अपने स्क्रैप टायर आयात में लगभग 5 गुना वृद्धि की है. यह लगभग 1.4 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया है.

स्क्रैप टायर का इंपोर्ट क्यों किया जाता है? 

संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और खाड़ी देशों जैसे देशों से आयातित स्क्रैप टायर घरेलू स्तर पर इकट्ठा स्क्रैप की कीमत के एक अंश पर मौजूद हैं. जिस तरफ स्थानीय रूप से इस्तेमाल किए गए टायरों की कीमत लगभग ₹20 से ₹25 प्रति किलोग्राम तक हो सकती है, वहीं इंपोर्ट स्क्रैप को कम से कम ₹2 से ₹5 प्रति किलोग्राम पर खरीदा जा सकता है.

औद्योगिक ईंधन में बदलाव 

आयातित स्क्रैप टायरों का सबसे बड़ा हिस्सा टायर पायरोलिसिस तेल का उत्पादन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. पायरोलिसिस प्लांट्स में टायरों को ऑक्सीजन की गैर मौजूदगी में लगभग 500 डिग्री सेल्सियस के तापमान तक गर्म किया जाता है. यह प्रक्रिया रबर को पायरोलिसिस तेल में बदल देती है जो वैकल्पिक औद्योगिक ईंधन के रूप में काम करता है. इस तेल का इस्तेमाल सीमेंट, कारखाने, औद्योगिक बॉयलर, बिजली संयंत्र और भारी विनिर्माण इकाई में पारंपरिक ईंधन के विकल्प के रूप में किया जाता है.

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टायरों की रिट्रेडिंग

हर आयातित टायर पूरी तरह से बेकार नहीं होता. इस्तेमाल की गई टायरों की बड़ी संख्या रिट्रेडिंग के लिए एकदम सही होती है. इन टायरों की मरम्मत सेकंड हैंड बाजार में बेचे जाने से पहले घिसे हुए ट्रेड को बदलकर या फिर दोबारा से बनाकर की जाती है. इनका इस्तेमाल आमतौर पर कमर्शियल वाहन में किया जाता है क्योंकि इनकी कीमत ब्रांड न्यू टायरों की तुलना में काफी कम होती है.

रबर पाउडर का इस्तेमाल सड़कों और खेल सतहों में किया जाता है 

स्क्रैप रबर और रबर पाउडर का उत्पादन करने के लिए स्क्रैप टायरों को भी छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है. इनकी ड्युरेबिलिटी में सुधार करने के लिए इस रीसाइकिल्ड रबर को सड़क निर्माण के दौरान बिटुमेन के साथ मिलाया जाता है. इसका इस्तेमाल खेल के मैदान के फर्श, खेल ट्रैक, जूते के सोल, मडगार्ड और दूसरे रबर आधारित उत्पादों में भी किया जाता है. 

टायरों के अंदर छिपे स्टील को भी रीसायकल किया जाता है 

आधुनिक टायरों में मजबूत स्टील के तार होते हैं जो संरचनात्मक मजबूती देते हैं. रीसाइक्लिंग के दौरान इन स्टील घटकों को रबर से अलग किया जाता है और स्क्रैप धातु के रूप में बेचा जाता है. स्टील मिलें नए उत्पादों को बनाने के लिए इन सामग्रियों को पिघलाती हैं और दोबारा इस्तेमाल करती हैं. इससे यह पक्का होता है कि टायर के लगभग हर हिस्से का इस्तेमाल किया जाता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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