क्या ट्रेन में ले जा सकते हैं शराब की सीलपैक बोतलें, कितनी है इसकी लिमिट?
Samastipur Liquor Case: हाल ही में बिहार के समस्तीपुर में ट्रेन में यात्रा कर रहे एक युवक और युवती के समान से 75 लीटर शराब जब्त की गई है. आइए जानते हैं ट्रेन में कितनी शराब ले जा सकते हैं.

- समस्तीपुर में ट्रेन से 75 लीटर शराब जब्त; नियम राज्यों पर निर्भर।
- अनुमति वाले राज्यों में 1-2 लीटर सीलबंद शराब ले जा सकते हैं।
- बिहार जैसे ड्राई स्टेट में शराब ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है।
- ट्रेन में शराब पीना रेलवे एक्ट के तहत दंडनीय अपराध है।
Samastipur Liquor Case: बिहार में शराब पर रोक के बावजूद तस्कर शराब लाने-ले जाने के लिए नए-नए तरीके ढूंढ रहे हैं. समस्तीपुर में एसी कोच में यात्रा कर रहे एक युवक और युवती के सामान से लगभग 75 लीटर इंडियन मेड फॉरेन लिकर जब्त की गई. यह घटना आम यात्रियों के लिए एक जरूरी सवाल खड़ा करती है. क्या आप ट्रेन में सीलबंद शराब की बोतलें कानूनी तौर पर ले जा सकते हैं और अगर हां तो कितनी? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
क्या ट्रेन में शराब ले जाने की इजाजत है?
रेलवे का कोई एक ऐसा देशव्यापी नियम नहीं है जो यात्रियों को शराब ले जाने का बिना किसी रोक-टोक के अधिकार देता हो. यह कानूनी है या फिर नहीं यह मुख्य रूप से यात्रा में शामिल राज्यों के आबकारी कानूनों पर निर्भर करता है. जिन राज्यों में शराब की इजाजत है वहां आमतौर पर राज्य के नियमों के मुताबिक निजी इस्तेमाल के लिए सीमित मात्रा में शराब ले जाई जा सकती है.
इसका मतलब है कि यात्रियों को यह नहीं मान लेना चाहिए कि अगर शराब यात्रा शुरू करने की जगह पर कानूनी तौर पर खरीदी गई थी तो पूरी यात्रा के दौरान उसे ले जाना अपने आप कानूनी बना रहेगा.

कितनी बोतलें ले जा सकते हैं?
जिन राज्यों में शराब पर रोक नहीं है वहां स्थानीय नियमों के आधार पर यात्रियों को आमतौर पर निजी इस्तेमाल के लिए लगभग 1 से 2 लीटर या फिर दो सील बंद बोतलें ले जाने की इजाजत मिल सकती है. बोतलें पूरी तरह से सीलबंद होनी चाहिए और यात्री के मुख्य सामान के अंदर ठीक से पैक होनी चाहिए. खुली बोतल ले जाने से कानूनी दिक्कत हो सकती है.
यात्रियों को शराब खरीदने का असली बिल या फिर रसीद भी अपने पास रखनी चाहिए. अगर रेलवे, पुलिस या फिर आबकारी विभाग के अधिकारी सामान की जांच करते हैं तो इससे यह साबित करने में मदद मिल सकती है कि शराब कानूनी तौर पर खरीदी गई थी.
ड्राई स्टेट में क्या होता है?
जब ट्रेन की यात्रा ऐसे राज्य या फिर इलाके से गुजरती है जहां पर शराब पर रोक है तो स्थिति पूरी तरह से बदल जाती है. बिहार, गुजरात और नागालैंड जैसे ड्राई स्टेट और लक्षद्वीप जैसे केंद्र शासित प्रदेश में शराब रखने और लाने ले जाने पर सख्त रोक वाले कानून लागू हैं. इस वजह से कहीं और कानूनी तौर पर खरीदी गई सील बंद बोतल भी रोक वाले इलाके में घुसने के बाद कानूनी दिक्कत पैदा कर सकती है.

क्या आप बिहार से शराब ले जा सकते हैं?
बिहार में शराब पर रोक का सिस्टम लागू है. इसके तहत शराब रखने, लाने-ले जाने और पीने पर सख्त पाबंदी है. इस वजह से यात्रियों को यह नहीं सोचना चाहिए की सील बंद बोतलें ले जाने की इजाजत सिर्फ इस वजह से है क्योंकि वे सड़क के बजाय ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं.
समस्तीपुर में हुई जब्ती से पता चलता है की ट्रेन में बड़ी मात्रा में शराब नहीं जाने पर कड़ी जांच पड़ताल हो सकती है. 75 लीटर जैसी मात्रा आम तौर पर निजी इस्तेमाल के लिए मानी जाने वाली छोटी मात्रा से काफी ज्यादा है.
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ट्रेन के अंदर शराब पीने के बारे में क्या नियम?
कानूनी रूप से मंजूर शराब साथ ले जाना और उसे ट्रेन के अंदर पीना यह दोनों अलग-अलग बातें हैं. ट्रेन के अंदर या फिर रेलवे परिसर में शराब की बोतल खोलना या फिर शराब पीना रेलवे एक्ट 1989 की धारा 145 के तहत कार्रवाई की वजह बन सकता है. खासकर तब जब कोई व्यक्ति नशे में हो और परेशानी पैदा कर रहा हो.
ऐसे व्यवहार के लिए सजा हो सकती है. इसमें हालात के आधार पर 6 महीने तक की जेल और जुर्माना शामिल है. इस वजह से भले ही लागू आबकारी नियम के तहत सील बंद शराब रखने की इजाजत हो यात्रियों को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह कोच के अंदर बोतल खोलकर पी सकते हैं.
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