क्या लूटी हुई शराब पीना भी जुर्म, शराबबंदी वाले इलाकों में क्या हैं नियम?
लूटी या लावारिस मिली शराब को अपने पास रखना या पीना भारतीय न्याय संहिता और आबकारी कानून के तहत एक गंभीर दंडनीय अपराध है. आइए जानें शराबबंदी वाले राज्यों में ऐसा करने पर क्या सजा है.

बिहार के समस्तीपुर में दलसिंहसराय के पास एनएच-28 पर बारिश के दौरान गड्ढे में गिरी एक कार से भारी मात्रा में अवैध शराब मिलने पर स्थानीय लोगों में उसे लूटने की होड़ मच गई. इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या सड़क पर लावारिस मिली या लूटी गई शराब का सेवन करना कानून की नजर में अपराध है? कई लोगों को लगता है कि सिर्फ उठाकर पी लेने से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन भारतीय न्याय व्यवस्था इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाती है. आइए जानते हैं इससे जुड़े कानूनी नियम क्या हैं.
चोरी की चीज रखने का गंभीर कानूनी अपराध
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317 स्पष्ट करती है कि यदि कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि कोई सामान चोरी, दुर्घटना या लूट की घटना से जुड़ा है, उसे अपने पास रखता है या इस्तेमाल करता है, तो वह सीधा अपराधी माना जाएगा. अदालत में 'मैंने इसे सिर्फ उठाया है, लूटा नहीं' जैसी दलीलें बिल्कुल स्वीकार नहीं की जाती हैं. इस कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की कैद, आर्थिक जुर्माना या फिर दोनों की सजा भुगतनी पड़ सकती है.
आबकारी कानून और जहरीली शराब का जानलेवा जोखिम
हर राज्य के अपने विशेष आबकारी नियम होते हैं. बिना किसी वैध रसीद, लाइसेंस या सरकारी परमिट के शराब अपने पास रखना या उसका सेवन करना आबकारी अधिनियम का सीधा उल्लंघन है. इसके अतिरिक्त, दुर्घटनाग्रस्त वाहनों या लावारिस हाल में मिली शराब की गुणवत्ता और प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं होती है. ऐसी शराब के मिलावटी या जहरीली होने की आशंका बनी रहती है. यदि जहरीली शराब के कारण कोई अनहोनी होती है, तो आरोपी पर आबकारी कानून के तहत और अधिक कठोर धाराएं लगा दी जाती हैं.
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शराबबंदी वाले राज्यों में कानून के कड़े शिकंजे
यदि शराब लूटने या उसका सेवन करने की यह घटना किसी ऐसे राज्य में होती है जहां पूर्ण शराबबंदी लागू है, तो कानूनी स्थिति और भी विकराल हो जाती है. ऐसे क्षेत्रों में शराब की एक बूंद भी पास रखना या पीना अपने आप में एक बड़ा गैर-कानूनी कृत्य है. वहां आरोपी पर चोरी का सामान रखने के साथ-साथ राज्य के मद्यनिषेध कानून की धाराएं भी एक साथ लागू होती हैं. इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति शराब के नशे में सार्वजनिक स्थल पर उपद्रव या शांति भंग करता है, तो उस पर अलग से दंडात्मक कार्रवाई की जाती है.
भारत के प्रमुख शराबबंदी राज्यों के विशेष नियम
देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शराबबंदी को लेकर अलग-अलग कानून बनाए गए हैं, जो इस प्रकार हैं-
बिहार- राज्य में अप्रैल 2016 से 'बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम' लागू है. यहां शराब के निर्माण, भंडारण और सेवन पर पूरी तरह पाबंदी है. हालांकि, संशोधित नियमों के अनुसार पहली बार पीकर पकड़े जाने पर आर्थिक दंड देकर राहत दी जा सकती है, लेकिन बार-बार अपराध दोहराने पर अनिवार्य रूप से जेल और भारी जुर्माना लगाया जाता है.
गुजरात- साल 1960 में राज्य गठन के समय से ही यहां गांधीवादी सिद्धांतों के तहत पूर्ण शराबबंदी लागू है. हालांकि, पर्यटकों, बाहरी नागरिकों और गिफ्ट सिटी जैसे विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए कड़े नियमों एवं विशेष परमिट के तहत सीमित छूट का प्रावधान रखा गया है.
नागालैंड- यहां नागालैंड शराब कुल प्रतिबंध अधिनियम 1989 के जरिए शराब के क्रय-विक्रय और सेवन को प्रतिबंधित किया गया है, हालांकि इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन में कई स्थानीय चुनौतियां देखने को मिलती हैं.

मिजोरम- इस राज्य में सामाजिक आवश्यकताओं और समय के अनुसार नियमों में बदलाव होते रहे हैं. वर्तमान में मिजोरम शराब (निषेध और नियंत्रण) अधिनियम के तहत कड़े प्रतिबंध लागू हैं.
लक्षद्वीप- स्थानीय सांस्कृतिक व धार्मिक मान्यताओं के कारण यहां आम जनता के लिए शराब पर पूर्ण प्रतिबंध है. हालांकि, केवल बंगाराम द्वीप जैसे चिन्हित पर्यटक क्षेत्रों में सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है.
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