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Delhi First Hindu Emperor: कौन था दिल्ली का पहला हिंदू सम्राट, जानें कितने वक्त तक किया था राज?

Delhi First Hindu Emperor : दिल्ली के लंबे इतिहास में कई ऐसे शासक हुए हैं, जिनका योगदान आज भी याद किया जाता है. इनमें कुछ ऐसे नाम भी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.

Delhi First Hindu Emperor : दिल्ली को अक्सर दिल वालों का शहर कहा जाता है. यह शहर सदियों से भारत की राजनीति, संस्कृति और शासन का केंद्र रहा है. इतिहास के अनुसार दिल्ली कई बार उजड़ी और दोबारा बसाई गई. हर दौर ने इस शहर को नई पहचान दी और इसके इतिहास में एक नई कहानी जोड़ी. यही वजह है कि दिल्ली का इतिहास भारत के सबसे दिलचस्प इतिहासों में गिना जाता है. दिल्ली के इतिहास में कई ऐसे शासक हुए हैं, जिनका योगदान आज भी याद किया जाता है. इनमें कुछ ऐसे नाम भी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन उन्होंने दिल्ली को बसाने और उसे पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. ऐसे में आइए जानते हैं कि दिल्ली का पहला हिंदू सम्राट कौन था और उन्होंने कितने समय तक शासन किया?

दिल्ली का पहला हिंदू सम्राट कौन था?

दिल्ली का पहला हिंदू सम्राट राजा अनंगपाल तोमर को माना जाता है. उन्होंने 11वीं सदी में उस नगर को नया स्वरूप दिया, जिसे आगे चलकर दिल्ली के नाम से जाना गया. आज भी दक्षिणी दिल्ली के संजय वन में मौजूद अनंगताल और लालकोट के अवशेष उनके शासन की कहानी सुनाते हैं. हाल के वर्षों में राजा अनंगपाल की विरासत को लेकर फिर से चर्चा तेज हुई है. 

कौन थे राजा अनंगपाल तोमर?

राजा अनंगपाल तोमर तोमर राजवंश के सबसे प्रभावशाली शासकों में गिने जाते हैं. अलग-अलग शिलालेखों, सिक्कों और ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर उन्हें दिल्ली का संस्थापक माना जाता है.  इतिहासकारों के अनुसार उन्होंने 1052 ईस्वी के आसपास एक नगर बसाया, जिसे ढिल्लिका या ढिल्लिकापुरी कहा गया. समय के साथ यही नाम बदलते-बदलते दिल्ली बन गया. उज्जैन में मिली एक शिलापट्ट और अन्य ऐतिहासिक प्रमाण भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि अनंगपाल ने ही इस नगर को बसाया था और इसे पहचान दी थी. 

दिल्ली को नया रूप किसने दिया?

महाभारत काल में दिल्ली को इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था. माना जाता है कि पांडवों के बाद यह क्षेत्र धीरे-धीरे महत्व खोता गया. बाद में तोमर शासकों ने इस क्षेत्र में अपना शासन स्थापित किया. राजा अनंगपाल ने इंद्रप्रस्थ को दोबारा बनाने का काम किया. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व अधिकारियों के अनुसार उन्होंने इस क्षेत्र को एक लोकप्रिय और संगठित नगरी के रूप में विकसित किया. इतिहासकारों का मानना है कि आधुनिक दिल्ली की नींव रखने में उनका योगदान जरूरी रहा. 

दिल्ली का पहला किला कौन सा था?

राजा अनंगपाल की सबसे जरूरी उपलब्धियों में लालकोट का निर्माण शामिल है. यह किला 1067 ईस्वी तक बनता रहा और उस समय दिल्ली की सुरक्षा का प्रमुख केंद्र था. दक्षिणी दिल्ली के कई हिस्सों में आज भी लालकोट की दीवारों के अवशेष देखे जा सकते हैं. यह किला उस दौर की स्थापित कला और सैन्य व्यवस्था के लिए जरूरी माना जाता है. राजा अनंगपाल ने ही अनंगताल का निर्माण कराया था यह तालाब दक्षिणी दिल्ली के संजय वन क्षेत्र में स्थित है. 1991 से 1994 के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यहां खुदाई कराई थी. खुदाई के दौरान तालाब के साथ-साथ किले के पैलेस क्षेत्र के प्रमाण भी मिले थे.

कितने वक्त तक किया था राज?

ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, राजा अनंगपाल तोमर ने लगभग 29 वर्ष, 6 माह और 18 दिन तक दिल्ली पर शासन किया. उनकी मृत्यु 1081 ईस्वी में हुई थी. उनके शासनकाल में दिल्ली का विस्तार हुआ और शहर को एक संगठित पहचान मिली. 

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अनंगपाल के बाद क्या हुआ?

राजा अनंगपाल के शासन के बाद तोमर राजवंश धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा. उनके बाद तीन तोमर शासक दिल्ली की गद्दी पर बैठे, लेकिन वे राजवंश को पहले जैसी मजबूती नहीं दे सके. इतिहासकारों के अनुसार, अनंगपाल के वंश से ही आगे चलकर फेमस शासक पृथ्वीराज चौहान का संबंध था. पृथ्वीराज चौहान को उनके ही परिवार का बताया जाता है. समय के साथ दिल्ली में सत्ता बदलाव होते गए और तोमर राजवंश का प्रभाव खत्म हो गया. 

दिल्ली का एक और हिंदू सम्राट कौन थे?

दिल्ली के इतिहास में एक और जरूरी नाम सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य, यानी हेमू का है. उन्हें मध्यकालीन भारत का अंतिम हिंदू सम्राट माना जाता है. हेमू का जन्म 1501 ईस्वी में राजस्थान के अलवर क्षेत्र के मछेरी गांव में एक धूसर ब्राह्मण परिवार में हुआ था. बाद में उनका परिवार हरियाणा के रेवाड़ी क्षेत्र में बस गया.उन्होंने हिंदी, संस्कृत, फारसी और अरबी का अध्ययन किया था. उन्हें कुश्ती और घुड़सवारी का विशेष शौक था.  

हेमचंद्र विक्रमादित्य का शासनकाल बहुत छोटा रहा. दिल्ली पर अधिकार करने के बाद वे केवल 29 दिनों तक सम्राट रह सके. इसके बाद 5 नवंबर 1556 को पानीपत के दूसरे युद्ध में उनकी सेना का सामना अकबर और बैरम खान की सेना से हुआ. युद्ध के दौरान एक तीर उनकी आंख में लगा, जिससे गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गए. उनके घायल होने के बाद उनकी सेना बिखर गई और युद्ध का परिणाम बदल गया. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. फिलहाल वह एबीपी नेटवर्क के टेक सेक्शन में काम कर रही हैं, जहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने के साथ-साथ उनके लिए रिसर्च और कंटेंट तैयार करने की जिम्मेदारी संभालती हैं.

पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से इंटर्न के रूप में की. इसके बाद से वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. फीचर, टेक और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ उनकी रुचि स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में है.

मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की. वर्तमान में वह राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं.मानसी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं.

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