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Indian Banknotes: भारतीय नोटों का डिजाइन कौन‌ करता है तय, जानें क्या होती है इसकी प्रक्रिया?

Indian Banknotes: भारतीय नोटों को छापने और डिजाइन करने की प्रक्रिया काफी ज्यादा जटिल है. आइए जानते हैं कि कौन भारतीय नोटों को डिजाइन करता है और क्या होता है उसका पूरा प्रोसेस.

Indian Banknotes: भारतीय नोट एक सावधानी से कंट्रोल किए गए और काफी सुरक्षित डिजाइन प्रोसेस को फॉलो करके बनाए जाते हैं. कलर स्कीम और आर्टवर्क से लेकर जाली नोटों को रोकने वाली छिपी हुई सिक्योरिटी फीचर्स तक कुछ भी ऐसे ही रेंडम नहीं होता. भारतीय नोटों को डिजाइन करने की जिम्मेदारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और भारत सरकार के बीच एक तय कानूनी और संस्थागत ढांचे के तहत बांटी जाती है.

नोट डिजाइन के पीछे कानूनी अधिकार 

भारतीय नोट कैसे दिखेंगे इसे तय करने की शक्ति रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट 1934 की धारा 25 से मिलती है. इस कानून के तहत अंतिम अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है. लेकिन वह आरबीआई द्वारा दी गई सिफारिश पर विचार करने के बाद ही काम करती है. आसान शब्दों में कहें तो आरबीआई प्रस्ताव देता है और सरकार मंजूरी देती है.

आरबीआई की भूमिका 

नोटों के डिजाइन की कल्पना करने और उसे बनाने की पूरी जिम्मेदारी आरबीआई के मुंबई मुख्यालय में डिपार्मेंट ऑफ करेंसी मैनेजमेंट की है. यह विभाग किसी भी नए डिजाइन या फिर बदलाव पर काम करने से पहले वैश्विक रुझान, सुरक्षा खतरों, उपयोगिता, टिकाऊपन और सार्वजनिक सुविधा को स्टडी करता है. 

इसे हासिल करने के लिए आरबीआई कलाकारों, डिजाइनरों और तकनीकी विशेषज्ञों का एक पैनल रखता है. इसी के साथ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी सहयोग करते हैं ताकि नोट सुरक्षित होने के साथ-साथ दिखने में भी अलग हो.

थीम, रंग और लेआउट को चुनना

थीम के बारे में फैसला जैसे महात्मा गांधी का चित्र, राष्ट्रीय विरासत स्थल, या फिर भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाले मोटिफ काफी सावधानी से लिए जाते हैं. डिजाइन स्टेज के दौरान दृष्टिबाधित लोगों के लिए कलर कंट्रास्ट, अलग-अलग नोटों के बीच आकार में अंतर और इस्तेमाल में आसानी जैसे सभी कारकों पर विचार किया जाता है.

सरकारी मंजूरी और फाइनल क्लीयरेंस 

जब आरबीआई एक ड्राफ्ट डिजाइन को फाइनल कर देता है तो उसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाता है. सरकार की मंजूरी मिलने के बाद डिजाइन प्रोडक्शन स्टेज में चला जाता है. इस मंजूरी के बिना कोई भी नया बैंक नोट डिजाइन सर्कुलेट नहीं किया जा सकता. 

भारतीय बैंक नोट कहां छापे जाते हैं?

मंजूरी के बाद बैंक नोट महाराष्ट्र के नासिक, मध्य प्रदेश के देवास, कर्नाटक के मैसूर और पश्चिम बंगाल के सालबोनी में हाई सिक्योरिटी प्रेस में छापे जाते हैं. यह प्रेस कड़ी गोपनीयता और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं. 

बैंक नोट के उलट सिक्के पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा डिजाइन और ढाले जाते हैं. सिक्कों के मामले में आरबीआई की भूमिका सिर्फ उनके डिस्ट्रीब्यूशन और सरकुलेशन मैनेजमेंट तक सीमित है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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