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Farthest Satellite: अंतरिक्ष में किस सैटेलाइट ने तय की सबसे ज्यादा दूरी, जानें उस दूरी को क्यों नहीं कर पाया कोई पार

Farthest Satellite: अंतरिक्ष में एक सैटेलाइट ने सबसे लंबी दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाया हुआ है. आइए जानते हैं कोई दूसरा सैटेलाइट इस रिकॉर्ड को अब तक क्यों नहीं तोड़ पाया.

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  • 2012 में हेलियोपॉज पार कर तारों के बीच के अंतरिक्ष में पहुंचा।

Farthest Satellite: जब भी हम इंसानों द्वारा अंतरिक्ष में भेजे गए अब तक के सबसे दूर के ऑब्जेक्ट की बात करते हैं तो एक नाम सबसे आगे आता है. यह नाम है वॉयेजर 1 का. नासा ने 5 सितंबर 1977 को इसे लॉन्च किया था और यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लगभग 25.7 अरब किलोमीटर की दूरी को तय कर चुका है. लगभग 5 दशकों के बाद भी कोई दूसरा उपग्रह या फिर अंतरिक्ष प्रोब इसे पीछे नहीं छोड़ पाया.

एक सटीक समय में मुमकिन हुआ मिशन 

वॉयेजर 1 की यात्रा ऐसे समय में शुरू हुई जब ब्रह्मांड ने एक दुर्लभ फायदा दिया. 1977 के दशक के अंत में बाहरी ग्रह बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून एक ऐसी स्थिति में एक साथ आए जो हर 176 साल में सिर्फ एक बार होता है. इस खास रेखा ने वैज्ञानिकों को एक ऐसा मिशन डिजाइन करने की अनुमति दी जिसमें अंतरिक्ष यान एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर जा सकता था और उसकी रफ्तार भी बढ़ती जाती थी. 

ग्रेविटी एसिस्ट से मिली मदद

वॉयेजर 1 ने जो इस बेजोड़ दूरी को तय किया उसके पीछे सबसे बड़ी वजह ग्रेविटी एसिस्ट का शानदार इस्तेमाल है. जब अंतरिक्ष यान बृहस्पति और शनि जैसे विशाल ग्रहों के पास से गुजरा तो उसने उनके गुरुत्वाकर्षण खिंचाव का इस्तेमाल एक ब्रह्मांडीय गुलेल की तरह किया. इस तरीके ने ज्यादा ईंधन का इस्तेमाल किए बिना इसकी गति को काफी बढ़ा दिया. यही वजह है वॉयेजर 1 सूरज के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से मुक्त होने और गहरे अंतरिक्ष की तरफ बढ़ने के लिए अच्छी खासी वेलोसिटी को प्राप्त कर पाया. 

सौरमंडल की सीमा को पार करना 

2012 में वॉयेजर 1 ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया. इसने हेलियोपॉज को पार किया. यह वह सीमा होती है जो सूरज के प्रभाव के अंत को मार्क करती है. इसके परे इंटरस्टेलर स्पेस बसा है जो तारों के बीच का एक विशाल क्षेत्र है. इससे वॉयेजर 1 इंटरस्टेलर स्पेस में प्रवेश करने वाला पहला मानव निर्मित ऑब्जेक्ट बन गया. 

यह यान वर्तमान में लगभग 17 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से यात्रा कर रहा है. वैसे तो कुछ दूसरे मिशनों की भी शुरुआती रफ्तार ज्यादा थी लेकिन उन्हें वैसे शक्तिशाली ग्रेविटी एसिस्ट का लाभ नहीं मिला. 

कोई दूसरा यान क्यों नहीं तोड़ पाया है रिकॉर्ड 

वॉयेजर 1 को किसी भी दूसरे स्पेसक्राफ्ट के पीछे ना छोड़ पाने के लिए एक और वजह इसकी जबरदस्त लंबी उम्र है. इस रेडियोस्टॉप थर्मोइलेक्ट्रिक जेनरेटर से पावर मिलती है. ये रेडियोएक्टिव क्षय से निकलने वाली गर्मी को बिजली में बदल देते हैं. 48 साल बाद भी है लगातार धरती पर डेटा भेज रहा है.

सही समय, ग्रहों की ग्रेविटी का नया इस्तेमाल, बेजोड़ मजबूती और एक बड़े मिशन के लक्ष्य के मेल ने वॉयेजर 1 को अब तक लॉन्च किए गए हर दूसरे स्पेसक्राफ्ट से आगे रखा है. आज भी कोई भी दूसरा मिशन वॉयेजर 1 के द्वारा तय की गई दूरी की बराबरी नहीं कर पाया है.

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स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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