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चीन-अमेरिका की लड़ाई में कहां टिकेंगे सोने-चांदी के दाम, 2050 में क्या होंगे रेट?

अमेरिका-चीन की वैश्विक जंग ने सोने-चांदी को फिर सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है. 2050 तक इनके दाम ऐसे स्तर छू सकते हैं, जो आज कल्पना से बाहर लगते हैं.

दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें अमेरिका और चीन आमने-सामने हैं. एक तरफ अमेरिका वैश्विक मंचों से पीछे हटता दिख रहा है, तो दूसरी ओर चीन तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है. इस बदलते शक्ति संतुलन का असर सिर्फ राजनीति पर नहीं, बल्कि आपकी जेब पर भी पड़ने वाला है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस टकराव में सोना और चांदी कहां टिकेंगे और 2050 तक इनके दाम किस ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं?

बदलती वैश्विक राजनीति का असर

पिछले कुछ समय में अमेरिका ने कई संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और बहुपक्षीय संस्थानों से दूरी बनानी शुरू की है. इस साल की शुरुआत में अमेरिका ने 66 वैश्विक संगठनों से बाहर निकलने का ऐलान किया है. वहीं चीन ने इस खाली जगह को भरने की कोशिश तेज कर दी है. जनवरी के आखिर में बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कनाडा, फिनलैंड और ब्रिटेन के नेताओं की मेजबानी की और नई वैश्विक व्यवस्था की बात कही. इस बदलते संतुलन ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर देखने के लिए मजबूर किया है. 

सुरक्षित निवेश की पहली पसंद सोना

जब भी दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, सोना सबसे भरोसेमंद निवेश माना जाता है. महंगाई, युद्ध, मुद्रा संकट या आर्थिक मंदी हर दौर में सोने ने अपनी कीमत संभाली है. यही वजह है कि भारत, चीन और रूस जैसे देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं. डॉलर की स्थिति कमजोर होने पर भी सोने की चमक और तेज होती है. 

चांदी की बढ़ती अहमियत

सोने के मुकाबले चांदी को अक्सर सस्ता विकल्प माना जाता रहा है, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहनों में नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और इलेक्ट्रॉनिक्स में तेजी से बढ़ रहा है. औद्योगिक मांग बढ़ने और सीमित आपूर्ति के कारण चांदी की कीमतों में आने वाले वर्षों में तेज उछाल की संभावना जताई जा रही है. 

2050 तक कितने हो सकते हैं दाम?

अनुमानों के मुताबिक 2050 तक भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम करीब 14 से 15 लाख रुपये तक पहुंच सकती है, अगर औसतन 10 फीसदी सालाना बढ़त रही. कुछ आंकलन इससे भी आगे जाकर इसे 40 लाख रुपये तक बताते हैं, अगर लंबी अवधि में तेजी ज्यादा रही तो. वहीं चांदी की बात करें, तो इसकी कीमत प्रति किलो 3 करोड़ से 5 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. 

इतनी तेजी के पीछे क्या वजह है?

सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण वैश्विक महंगाई और डॉलर की अनिश्चित स्थिति है. इसके अलावा खनन की रफ्तार धीमी है, जबकि मांग लगातार बढ़ रही है. केंद्रीय बैंकों की नीतियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं, क्योंकि वे कागजी मुद्राओं की जगह कीमती धातुओं पर भरोसा बढ़ा रहे हैं. 

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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