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First Traffic Signal: दुनिया का पहला ट्रैफिक सिग्नल कहां लगाया गया था, जानें आज के सिग्नल से यह कितना था अलग?

First Traffic Signal: रोजमर्रा की जिंदगी में ट्रैफिक लाइट्स एक बड़ी भूमिका निभाती हैं. आइए जानते हैं कि सबसे पहले ट्रैफिक सिग्नल कहां लगा था और यह आज के सिग्नल से कितना अलग था.

First Traffic Signal: ट्रैफिक लाइट आधुनिक जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा होती हैं. यह हर दिन लाखों गाड़ियों को चुपचाप कंट्रोल करती हैं. लेकिन सिग्नल से सड़क ट्रैफिक को रेगुलेट करने का विचार ज्यादातर लोगों की सोच से काफी ज्यादा पुराना है. दुनिया का पहला ट्रैफिक सिग्नल 19वीं सदी में आया था और यह आज की लाइट जैसा बिल्कुल भी नहीं दिखता था. 

पहले ट्रैफिक सिग्नल का जन्म 

दुनिया का पहला ट्रैफिक सिग्नल 9 दिसंबर 1868 को लंदन में ब्रिटिश संसद के बाहर वेस्टमिंस्टर में लगाया गया था. इसे जॉन पीक नाइट ने डिजाइन किया था. यह एक रेलवे सिग्नल इंजीनियर थे जिन्होंने घोड़े से चलने वाली गाड़ियों के कारण बढ़ते सड़क जाम को मैनेज करने के लिए ट्रेन सिगनलिंग कांसेप्ट को अपनाया था. 

गैस से चलने वाला सिग्नल 

आज की इलेक्ट्रिक ट्रैफिक लाइट के उलट पहला सिग्नल गैस से चलता था. रात में यह निर्देश देने के लिए लाल और हरी गैस लैंप का इस्तेमाल करता था. इसमें कोई बल्ब, वायरिंग या ऑटोमेटेड टाइमर नहीं थे. बस गैस की लपटें काम करती थीं. इससे यह सिस्टम काफी खतरनाक था. 

मैन्युअल रूप से किया जाता था ऑपरेट 

सिग्नल ऑटोमेटिक नहीं था. एक पुलिस अधिकारी उसके बगल में खड़ा होकर एक लीवर का इस्तेमाल करके उसे मैन्युअल रूप से ऑपरेट करता था. इसका मतलब था कि ट्रैफिक कंट्रोल पूरी तरह से इंसान के फैसले और शारीरिक मेहनत पर निर्भर था. 

दिन के समय के लिए सेमाफोर आर्म्स 

दिन के समय सिस्टम रेलवे सिग्नल की तरह सेमाफोर आर्म्स पर निर्भर था. जब मेटल के आर्म्स को हॉरिजेंटल रखा जाता था तो इसका मतलब था रुको. जब इसे 45 डिग्री के एंगल पर नीचे किया जाता था तो यह सावधानी का संकेत देता था. यह विजुअल भाषा रेलवे यात्रियों के लिए जानी पहचानी थी लेकिन सड़क ट्रैफिक के लिए काफी नई थी.

 नहीं थी पीली लाइट 

आधुनिक ट्रैफिक लाइट में तीन रंग होते हैं लाल, पीला और हरा. लेकिन पहले सिग्नल में सिर्फ दो रंग थे. लाल रंग रुकने का संकेत देता था जबकि हरा रंग सावधानी या फिर जाने का. उस समय पीली लाइट का कोई कॉन्सेप्ट मौजूद ही नहीं था.

एक खतरनाक अंत 

यह प्रयोग जल्द ही खत्म हो गया. 2 जनवरी 1869 को इंस्टॉलेशन के कुछ ही हफ्ते बाद गैस लीक की वजह से सिग्नल में धमाका हो गया. इस वजह से उसे ऑपरेट करने वाला पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गया. इस घटना के बाद सिस्टम को हटा दिया गया और ट्रैफिक सिग्नल का विचार दशकों तक बस्ते में डाल दिया गया.

पहला इलेक्ट्रिक ट्रैफिक सिग्नल 

1914 तक ट्रैफिक सिग्नलिंग ने सुरक्षित वापसी नहीं की थी. दुनिया का पहला इलेक्ट्रिक ट्रैफिक सिग्नल अमेरिका के क्लीवलैंड में लगाया गया था. इस सिस्टम ने आज दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाली ऑटोमेटेड कलर कोडेड ट्रैफिक लाइट की नींव रखी थी.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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