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Life on Space: अंतरिक्ष में बिना स्पेस सूट चले जाएं तो क्या होगा, जानें कितनी देर में होगी मौत?

Life on Space: अंतरिक्ष में अगर कोई इंसान बिना स्पेस सूट के चला जाए तो स्थिति काफी ज्यादा भयानक होगी. आइए जानते हैं कितनी देर में होगी उसकी मौत?

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  • बिना स्पेस सूट अंतरिक्ष में 10-15 सेकंड में बेहोशी।
  • सांस रोकने से फेफड़े फटेंगे, शरीर के तरल पदार्थ उबलेंगे।
  • तेज रेडिएशन से त्वचा जलेगी, महत्वपूर्ण अंग काम बंद करेंगे।
  • एक-दो मिनट में ऑक्सीजन की कमी से मौत निश्चित।

Space Science: अंतरिक्ष पृथ्वी से शांत और सुंदर दिख सकता है. लेकिन यह इंसानी शरीर के लिए काफी ज्यादा खतरनाक भी है. विज्ञान की चर्चाओं और फिल्मों में अक्सर यह सवाल उठाया जाता है कि अगर कोई व्यक्ति बिना स्पेस सूट के अचानक अंतरिक्ष में चला जाए तो क्या होगा. अगर ऐसा होता है तो शरीर ना तो तुरंत फटेगा और ना ही पूरी तरह से जम जाएगा. हालांकि जिंदा रहने का समय कुछ ही सेकंड का होगा. 

कुछ ही सेकंड में बेहोशी 

अंतरिक्ष में सबसे बड़ा खतरा सांस लेने लायक हवा और वायुमंडलीय दबाव का बिल्कुल ना होना है. अंतरिक्ष के वैक्यूम के संपर्क में आते ही दिमाग तक ऑक्सीजन की सप्लाई तुरंत बंद हो जाती है. खून में पहले से मौजूद ऑक्सीजन दिमाग को सिर्फ 10 से 15 सेकंड तक ही काम करने लायक रख सकती है. इसके बाद व्यक्ति बेहोश हो जाता है. ऐसी स्थिति में वह खुद को बचाने के लिए कोई भी कदम उठाने में असमर्थ होता है. 

सांस रोकना स्थिति को और भी ज्यादा खराब कर सकता है 

ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति जो सबसे बुरी गलती कर सकता है वह अपनी सांस रोकना. क्योंकि अंतरिक्ष में कोई वायुमंडलीय दबाव नहीं होता इस वजह से फेफड़ों के अंदर फंसी हवा तेजी से फैलती है. इस अचानक फैलाव से फेफड़ों के टिशु फट सकते हैं. इसी के साथ शरीर के अंदर काफी गंभीर नुकसान हो सकता है. विशेषज्ञों का यह कहना है कि अगर ऐसी स्थिति से बचना नामुमकिन हो तो तुरंत सांस बाहर निकालने से कुछ और सेकंड तक जिंदा रहने की संभावना हो सकती है.

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शरीर के तरल पदार्थ उबलने लगते हैं 

अंतरिक्ष का वैक्यूम एक और असर डालता है. शरीर के अंदर जितना भी तरल पदार्थ है वह उबलने लगता है. जीभ पर मौजूद लार, आंखों की नमी और साथी शरीर के टिशु में मौजूद पानी भाप में बदलना लगा सकता है. इस प्रक्रिया से पूरे शरीर में सूजन आ जाती है. 

काफी ज्यादा रेडिएशन और तापमान का असर 

अंतरिक्ष में इंसानी शरीर सूरज से आने वाले तेज अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन के संपर्क में आता है. इसके बाद त्वचा सीधी धूप में बुरी तरह जलने लगती है. वहीं दूसरी तरफ अंतरिक्ष का छाया वाला हिस्सा काफी ज्यादा ठंडा होता है. हालांकि शरीर तुरंत नहीं जमता क्योंकि वैक्यूम में गर्मी का नुकसान धीरे-धीरे होता है. 

1 से 2 मिनट के अंदर मौत 

ऑक्सीजन और वायुमंडल के दबाव के बिना शरीर के जरूरी अंग तेजी से काम करना बंद कर देते हैं. लंबे समय तक ऑक्सीजन न मिलने की वजह से दिमाग को होने वाला नुकसान ठीक नहीं हो पाता. साथ ही उसके तुरंत बाद अंगों का काम करना बंद हो जाता है. ऐसी स्थिति में इंसान की मौत 1 से 2 मिनट के अंदर हो सकती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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