Rahul Gandhi Membership: राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता खत्म हुई तो क्या होगा नुकसान? जान लें सभी नियम
Rahul Gandhi Membership: हाल ही में बीजेपी एमपी निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ सब्सटेंटिव मोशन पेश किया है. आइए जानते हैं कि अगर राहुल गांधी की सदस्यता जाती है तो क्या होगा नुकसान.

Rahul Gandhi Membership: लोकसभा में बीजेपी एमपी निशिकांत दुबे के कांग्रेस लीडर राहुल गांधी के खिलाफ एक अहम मोशन लाने के बाद एक पॉलिटिकल विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल दुबे ने राहुल गांधी की पार्लियामेंट्री मेंबरशिप खत्म करने की मांग की और यहां तक कि उनके चुनाव लड़ने पर लाइफटाइम बैन लगाने की भी मांग की है. इसी बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि अगर राहुल गांधी की मेंबरशिप खत्म हो जाती है तो इसके लीगल और पॉलिटिकल नतीजें क्या होंगे. आइए जानते हैं.
सदस्यता खत्म होने के आधार
निशिकांत दुबे ने विशेषाधिकार हनन के बजाय एक स्वतंत्र प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्ताव का मुख्य आधार भ्रामक दावे, विदेशी संस्थानों से जुड़ाव और संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंचने के दावे किए गए हैं. उन्होंने राहुल गांधी पर बजट सत्र के दौरान सदन में गलत तथ्य रखने और देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है.
संभावित कानूनी और राजनीतिक नुकसान
अगर राहुल गांधी के सदस्यता खत्म होती है तो ऐसे मामले में उन्हें बड़े नुकसान हो सकते हैं. दरअसल राहुल गांधी वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं. सदस्यता जाने पर वे इस संवैधानिक पद से तुरंत हट जाएंगे. इसी के साथ प्रस्ताव में उन पर जिंदगी भर के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की भी मांग की गई है.
हालांकि 2 साल की सजा पर 8 साल की रोक लगती है लेकिन सदन के पास सदस्य को निष्कासित करने के बड़े अधिकार हैं. अगर ऐसा होता है तो राहुल गांधी ना तो सदन में भाषण दे पाएंगे और ना ही किसी संसदीय समिति का हिस्सा रह पाएंगे. इतना ही नहीं बल्कि सदस्यता रद्द होने के बाद उन्हें 1 महीने के अंदर सरकारी बंगला भी खाली करना होगा और उनके वेतन भत्ते भी बंद हो जाएंगे.
क्या है सब्सटेंटिव मोशन की प्रक्रिया
दरअसल यह एक स्वतंत्र प्रस्ताव है जिस पर सदन में चर्चा और मतदान हो सकता है. स्पीकर नियम 342 के तहत इसे वोटिंग के लिए रख सकते है. इतना ही नहीं बल्कि स्पीकर इस मामले को जांच के लिए विशेषाधिकार समिति या किसी विशेष समिति को सौंप सकते हैं. दुबे ने 1976 में सुब्रमण्यम स्वामी के राज्यसभा से निष्कासन का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी के निष्कासन की मांग की है.
इन कानूनी नतीजों के अलावा मेंबरशिप खत्म होने से बड़े पॉलिटिकल नतीजे भी आ सकते हैं. पार्टी की स्ट्रेटजी बदल सकती है, लोगों की सोच पर भी असर पड़ेगा और साथ ही राज्य और नेशनल दोनों लेवल पर चुनावी हिसाब किताब पर असर पड़ सकता है. हालांकि भारतीय कानून लाइफटाइम बैन की इजाजत नहीं देता जब तक की खास कानूनी नियम खास हालतों में लंबे समय तक डिसक्वालिफाई करने को सही ना ठहराएं.
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Source: IOCL


























