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क्या डायनासोर की रिश्तेदार है छिपकली, जानें कद में कैसे रह गई इतनी छोटी?

छिपकली और डायनासोर के शारीरिक बनावट में कई समानताएं है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या छिपकली डायनासोर की रिश्तेदार हैं और अगर हां तो कद में इतनी छोटी कैसे रह गईं? आइये जानते हैं.

डायनासोर जिसका नाम सुनते ही हमारी आंखों के सामने एक विशालकाय और भयानक जानवर आता है. माना जाता है लगभग 23 करोड़ साल पहले ट्राइएसिक काल में डायनासोर पृथ्वी पर प्रकट हुए थे. ये प्राणी लगभग 16 करोड़ साल तक धरती पर राज करते रहे, जब तक कि 6.6 करोड़ साल पहले एक उल्कापिंड के टकराने से इनका विनाश नहीं हो गया. दूसरी ओर छिपकली जिन्हें हम आज अपने आसपास देखते हैं, छोटे, फुर्तीले और विविध प्राणी हैं. लेकिन क्या छिपकली डायनासोर की रिश्तेदार है? अगर है तो कद में ये छोटी कैसे रह गई आइये इसी सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं.

छिपकली और डायनासोर में संबंध

वैज्ञानिकों के अनुसार, डायनासोर और छिपकली दोनों एक ही समूह से संबंधित हैं जिन्हें आर्कोसॉर के रूप में जाना जाता है. यह समूह सरीसृपों और पक्षियों को शामिल करता है. डायनासोर तो विलुप्त हो गए लेकिन छिपकली और डायनासोर में इतना निकटतम संबंध है कि छिपकलियों को वास्तव में जीवित डायनासोर या डायनासोर का रिश्तेदार कह सकते हैं.

छिपकली और डायनासोर में शारीरिक बनावट

छिपकलियां और डायनासोर में कई समान शारीरिक समानताएं हैं. दोनों के शरीर लम्बे, चार पैर, पूंछ और अन्य सरीसृप जैसी विशेषताएं हैं. इसके अलावा कई छिपकलियां ऐसी भी होती हैं जो डायनासोर जैसी दिखती हैं. ऐसे में ये समानताएं बताती हैं कि छिपकली डायनासोर के दूर की रिश्तेदार हैं. लेकिन डायनासोर में कुछ ऐसे गुण थे जो उनके विनाश का कारण बने. कई डायनासोर विशालकाय, भारी-भरकम शरीर वाले थे जिससे उनको भोजन और पानी की आवश्यकता अधिक होती थी. धीरे-धीरे जब परिस्थिति बदली और उनकी भोजन के आवश्यकताओं को पूरा करना प्रकृति में मुश्किल हो गया. जबकि छिपकलियों डायनासोर से छोटी थीं और उन्हें जीवित रहने के लिए कम मात्रा में भोजन की आवश्यकता पड़ती थी.

छिपकली का कद छोटा क्यों रह गया

अब सवाल यह है कि अगर दोनों का मूल एक है, तो छिपकली का कद इतना छोटा क्यों रहा? तो वैज्ञानिकों के अनुसार प्रजातियों के बीच प्रतिस्पर्धा कम होने से जानवर बड़े होते थे साथ ही पर्यावरण में भोजन की प्रचुरता भी थी. वहीं ऐसे स्थान जहां समय के साथ कई प्रजातियों के बीच भोजन और आश्रय के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा हुई जिसके चलते जानवरों का आकार अक्सर छोटा हो गया. 

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About the author नेहा सिंह

नेहा सिंह बीते 6 साल से डिजिटल मीडिया की दुनिया से जुड़ी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद से ताल्लुक रखती हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद स्थित ईटीवी भारत से साल 2019 में अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर दो साल तक बतौर कंटेट एडिटर के पद पर काम किया इस दौरान उन्हें एंकरिंग का भी मौका मिला जिसमें उन्होंने बेहतरीन काम किया.

फिर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया, यहां प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर कलम को धार दी. पहले इंडिया अहेड के साथ जुड़ीं और कंटेंट के साथ-साथ वीडियो सेक्शन में काम किया. 

इसके बाद नेहा ने मेनस्ट्रीम चैनल जी न्यूज में मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं. जी न्यूज में रहते हुए नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो क्रिएट किए.

इसी बीच प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुलवृक्ष संस्थान से जुड़कर महाकुंभ भी कवर किया, साधु-संतों का इंटरव्यू किया. लोगों से बातचीत करके उनके कुंभ के अनुभव और समस्याओं को जाना.

वर्तमान में नेहा एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां पर नॉलेज सेक्शन में ऐसी खबरों को एक्सप्लेन करती हैं, जिनके बारे में आम पाठक को रुचि होती है.

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