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गाय और मिथुन में क्या होता है अंतर, जिसे लेकर नॉर्थ ईस्ट में बीजेपी नेताओं में छिड़ी बहस?

गाय और मिथुन की बहस सिर्फ एक बयान से शुरू होकर संस्कृति और पहचान तक पहुंच गई है. आइए जान लेते हैं कि आखिर गाय और मिथुन में असल में अंतर क्या होता है और दोनों कितने अलग हैं.

हाल ही में एक टीवी डिबेट के दौरान बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट में लोग गाय का नहीं, बल्कि मिथुन नाम के पशु का मांस खाते हैं. इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई. कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब मिथुन दिखने में गाय जैसा है और उसी परिवार से जुड़ा है, तो फिर दोनों में फर्क क्यों किया जा रहा है. कुछ यूजर्स ने इसे राजनीतिक और धार्मिक नजरिए से भी जोड़कर देखा, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया. इस बहस के बीच यह जान लेना जरूरी है कि आखिर गाय और मिथुन में क्या अंतर होता है.

किरेन रिजिजू का वीडियो और नया एंगल

बहस के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मिथुन के साथ एक वीडियो शेयर किया. उन्होंने साफ लिखा कि यह मिथुन है और अरुणाचल प्रदेश का राजकीय पशु है. उनके इस कदम को मिथुन की पहचान और नॉर्थ-ईस्ट की संस्कृति को समझाने की कोशिश के तौर पर देखा गया. वीडियो के बाद कई लोगों को पहली बार पता चला कि मिथुन सिर्फ नाम नहीं, बल्कि एक अलग और खास पशु है.

आखिर क्या होता है मिथुन

मिथुन एक तरह का जंगली मवेशी होता है, जिसे समय के साथ नॉर्थ-ईस्ट के लोगों ने पालना शुरू किया. स्थानीय भाषा में इसे गायल भी कहा जाता है. यह पशु अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर में पाया जाता है. भारत के बाहर मिथुन चीन, म्यांमार, तिब्बत और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में भी मिलता है. अरुणाचल प्रदेश ने इसे अपना राजकीय पशु घोषित किया है, जो वहां की संस्कृति और परंपरा में इसके महत्व को दिखाता है.

नॉर्थ-ईस्ट की संस्कृति में मिथुन की भूमिका

मिथुन सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि नॉर्थ-ईस्ट के कई समुदायों के लिए समृद्धि और सम्मान का प्रतीक है. कई जनजातियों में शादी-ब्याह के मौके पर मिथुन दान देना प्रतिष्ठा की बात मानी जाती है. इसे पहाड़ों का आभूषण भी कहा जाता है. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जीवित रहने की इसकी क्षमता इसे वहां के जीवन से जोड़ती है.

किन कामों में आता है मिथुन

मिथुन का इस्तेमाल दूध, मांस और खेती से जुड़े कामों में किया जाता है. इसकी खाल से चमड़ा भी बनाया जाता है. इसका स्वभाव आमतौर पर शांत होता है और यह ऊंचे, जंगलों वाले इलाकों में आसानी से रह सकता है. यही वजह है कि नॉर्थ-ईस्ट में यह हर घर का अहम हिस्सा बन चुका है.

गाय और मिथुन में असल अंतर क्या है

गाय और मिथुन दिखने में काफी हद तक एक जैसे ही लगते हैं, लेकिन सबसे बड़ा अंतर इनके स्वभाव और उत्पत्ति का है. गाय पूरी तरह से पालतू पशु है और हजारों सालों से मानव समाज का हिस्सा रही है. हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना जाता है और इसका जिक्र धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है.

वहीं मिथुन मूल रूप से जंगली मवेशी है, जिसे इंसानों ने बाद में पालना शुरू किया. कुछ लोग इसे गाय की ही एक प्रजाति मानते हैं, क्योंकि यह बोवाइन परिवार से जुड़ा है, लेकिन वैज्ञानिक और सांस्कृतिक तौर पर इसकी अलग पहचान है.

क्यों बार-बार उठता है यह सवाल

भारत जैसे विविधता भरे देश में खान-पान और परंपराएं अलग-अलग हैं. नॉर्थ-ईस्ट की संस्कृति को बाकी भारत अक्सर पूरी तरह समझ नहीं पाता है. यही वजह है कि गाय और मिथुन जैसे मुद्दे राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन जाते हैं. इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह दिखाया कि किसी भी क्षेत्र की परंपरा को समझे बिना उस पर राय बनाना कितनी जल्दी गलतफहमी पैदा कर सकता है.

यह भी पढ़ें: भारत के लड़कों को कैसे डिजिटल हनीट्रैप में फंसा रहा पाकिस्तान, जानें कैसे शिकार हो रहे लोग?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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