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क्या होती है गेट एनालिसिस तकनीक, जिससे बदमाशों को पकड़ना हुआ आसान?

ऐसी ही एक नई और खास तकनीक गेट एनालिसिस (Gait Analysis) है , जिसकी मदद से दिल्ली पुलिस ने एक जटिल हत्या के मामले को सुलझाने का दावा किया है.

आज के समय में अपराध करने के तरीके जितने आधुनिक हो गए हैं, उतनी ही आधुनिक तकनीक पुलिस और जांच एजेंसियां भी अपना रही हैं. पहले जहां अपराधी चेहरे छिपाकर या सीसीटीवी से बचकर निकल जाते थे, वहीं अब विज्ञान और तकनीक की मदद से उनकी पहचान करना आसान होता जा रहा है. ऐसी ही एक नई और खास तकनीक गेट एनालिसिस (Gait Analysis) है , जिसकी मदद से दिल्ली पुलिस ने एक जटिल हत्या के मामले को सुलझाने का दावा किया है.

दिल्ली के तीस हजारी अदालत क्षेत्र से जुड़ा यह मामला उत्तर दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कर रहे एक युवक रामकेश मीना की हत्या से जुड़ा है. इस केस में पुलिस को शुरुआत में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों के चेहरे साफ दिखाई नहीं दे रहे थे. लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी और एक नए वैज्ञानिक तरीके का सहारा लिया। यही तरीका आगे चलकर इस केस की सबसे बड़ी कड़ी साबित हुआ. 

कैसे सुलझा हत्या का मामला?

पुलिस जांच में सामने आया कि रामकेश मीना की हत्या उसके लिव-इन पार्टनर ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर की थी. हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए शव को घर के अंदर ही छिपा दिया गया. इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तो मिली, लेकिन उनमें आरोपियों के चेहरे साफ नजर नहीं आ रहे थे.इसके बाद पुलिस ने एक अलग रास्ता चुना. उन्होंने फुटेज में दिख रहे संदिग्ध व्यक्ति की चलने की शैली, यानी चाल-ढाल का बारीकी से अध्ययन किया. पुलिस ने देखा कि आरोपी कैसे चल रहा है, उसके कदमों की गति क्या है,

शरीर का संतुलन कैसा है और चलने के दौरान शरीर किस तरह हिलता-डुलता है. इसी अध्ययन को गेट एनालिसिस कहा जाता है. इस विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों की पहचान की.बाद में जब उनसे पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपना अपराध कबूल कर लिया.पुलिस ने आरोपपत्र में हत्या, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पुलिस का कहना है कि दिल्ली में यह पहला ऐसा मामला है, जिसमें गेट एनालिसिस तकनीक के जरिए हत्या की गुत्थी सुलझाई गई है. 

क्या होती है गेट एनालिसिस तकनीक?

गेट एनालिसिस का मतलब है किसी व्यक्ति की चाल का अध्ययन करना है. हर इंसान के चलने का तरीका थोड़ा अलग होता है.कोई तेज चलता है, कोई धीरे, किसी के कदम छोटे होते हैं तो किसी के लंबे, शरीर का झुकाव, हाथों की मूवमेंट और पैरों का संतुलन  ये सभी चीजें मिलकर किसी व्यक्ति की खास पहचान बनाती हैं.

असल में गेट एनालिसिस कोई अपराध जांच की तकनीक नहीं है. इसका यूज सबसे पहले मेडिकल क्षेत्र में किया जाता रहा है. डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट इस तकनीक से यह समझते हैं कि मरीज कैसे चल रहा है, उसे कहां दर्द है या चलने में कौन-सी दिक्कत आ रही है.इससे चोट, नसों की समस्या या हड्डियों से जुड़ी परेशानियों का पता लगाया जाता है. 

मेडिकल से अपराध जांच तक का सफर

गेट एनालिसिस का इस्तेमाल फिजियोथेरेपी, ऑर्थोपेडिक्स और स्पोर्ट्स ट्रेनिंग में भी किया जाता है. एथलीट्स की चाल का विश्लेषण करके उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाया जाता है, ताकि वे कम थकें और चोट से बच सकें. अब इसी तकनीक का यूज अपराध की दुनिया में भी होने लगा है. जब सीसीटीवी फुटेज में चेहरा साफ न दिखे, तब आरोपी की चाल एक अहम सुराग बन सकती है. क्योंकि कपड़े बदले जा सकते हैं, चेहरा छिपाया जा सकता है, लेकिन चलने का तरीका बदलना इतना आसान नहीं होता है. 

पुलिस के लिए कितनी कारगर है यह तकनीक?

गेट एनालिसिस तकनीक पुलिस के लिए बेहद मददगार साबित हो सकती है, खासकर उन मामलों में जहां आरोपी पहचान छिपाने की कोशिश करता है. सीसीटीवी फुटेज के साथ अगर वैज्ञानिक तरीके से चाल का विश्लेषण किया जाए, तो संदिग्ध तक पहुंचना आसान हो सकता है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक का यूज सबूत के तौर पर बहुत सावधानी से किया जाना चाहिए और इसे दूसरे पुख्ता सबूतों के साथ जोड़कर ही आगे बढ़ना चाहिए. 

यह भी पढ़ें: Iran Protests: इस्लामिक कंट्री होने के बावजूद कितने मुस्लिम देशों से है ईरान की दुश्मनी, क्या है इसकी वजह?

मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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