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किसी राज्य को कैसे मिलता है स्टेटहुड का दर्जा, जानें सरकार के पास आ जाती है कौन-कौन सी पावर?

जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग लगातार उठाई जा रही है. ऐसे में आइये जानते हैं कि किसी क्षेत्र को पूर्ण राज्य का दर्जा कैसे प्राप्त होता है और इसके बाद वहां क्या-क्या बदलाव होते हैं.

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के कारण प्रदेश का पूर्ण राज्य दर्जा खत्म कर दिया गया और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया. इसके बाद जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग लगातार उठाई जा रही है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 8 अगस्त 2025 को सुनवाई होनी है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट पहले कह चुका है कि जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहान किया जाना चाहिए. ऐसे में आइये जानते हैं कि भारत में किसी क्षेत्र को पूर्ण राज्य का दर्जा कैसे प्राप्त होता है और इसके बाद वहां की सरकार को कौन-कौन सी शक्तियां मिलती हैं.

क्या होता है पूर्ण राज्य दर्जे का अर्थ

पूर्ण राज्य दर्जा का अर्थ होता है किसी राज्य को अपनी सरकार विधानसभा, सरकार और अधिकारों के लिए स्वतंत्र रूप से चुनने का प्रावधान मिला हो. इसमें उन्हें सरकार, कानून और वित्तीय अधिकार मिलते हैं. ऐसे राज्यों में जनता मतदान के माध्यम से अपना मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल भी चुनती है. वहीं केंद्रशासित प्रदेशों में विधानसभा नहीं होती है. यहां के निर्णय और नियंत्रण का कार्य केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है.

कैसे मिलता है पूर्ण राज्य का दर्जा

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के गठन, उनके क्षेत्र में बदलाव या नाम परिवर्तन का अधिकार संसद को है. इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को पेश किया जाता है जिसका माध्यम गृह मंत्रालय होता है. कई बार एक समिति या आयोग गठित किया जाता है, जो उस क्षेत्र की भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति का अध्ययन करता है. नया राज्य बनाने के लिए संसद में विधेयक को दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में साधारण बहुमत से पारित करना होता है. दोनों सदनों में बहुमत से पास होने ही राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद वह क्षेत्र आधिकारिक रूप से पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त करता है. 

सरकार को क्या-क्या मिलती है पावर

किसी भी राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने पर वहां राज्य में तैनात पुलिस और अधिकारी उस राज्य के सरकार के अधीन काम करते है. राज्य में कोई भी कानून लागू करने के लिए केंद्र सरकार की सहमति की जरूरत नहीं पड़ती. राज्य के नेता विधानसभा में कानून प्रस्ताव करके पास करा सकते हैं. उस राज्य का मुख्यमंत्री भी अपने निर्णय खुद ले सकता है उसे उपराज्यपाल की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती.  राज्य में अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर राज्य सरकार के हिसाब से होंगे. राज्य सरकार को व्यापार टैक्स और वाणिज्य के मामलों में सभी अधिकारी हासिल हो जाएंगे.

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About the author नेहा सिंह

नेहा सिंह बीते 6 साल से डिजिटल मीडिया की दुनिया से जुड़ी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद से ताल्लुक रखती हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद स्थित ईटीवी भारत से साल 2019 में अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर दो साल तक बतौर कंटेट एडिटर के पद पर काम किया इस दौरान उन्हें एंकरिंग का भी मौका मिला जिसमें उन्होंने बेहतरीन काम किया.

फिर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया, यहां प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर कलम को धार दी. पहले इंडिया अहेड के साथ जुड़ीं और कंटेंट के साथ-साथ वीडियो सेक्शन में काम किया. 

इसके बाद नेहा ने मेनस्ट्रीम चैनल जी न्यूज में मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं. जी न्यूज में रहते हुए नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो क्रिएट किए.

इसी बीच प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुलवृक्ष संस्थान से जुड़कर महाकुंभ भी कवर किया, साधु-संतों का इंटरव्यू किया. लोगों से बातचीत करके उनके कुंभ के अनुभव और समस्याओं को जाना.

वर्तमान में नेहा एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां पर नॉलेज सेक्शन में ऐसी खबरों को एक्सप्लेन करती हैं, जिनके बारे में आम पाठक को रुचि होती है.

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