कई बार इंसान घास चरने लग जाता है... जानिए किस बीमारी में ऐसा करने का मन करता है
यह एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक बीमारी है. अगर यह बीमारी किसी इंसान को लग जाए तो वह इंसान अपने आप को एक गाय समझने लगता है.

आपने हमेशा जानवरों को ही घास चरते देखा होगा. अगर कोई इंसान घास खाने लगे तो यह देखने में काफी अजीब लगेगा. लेकिन अगर हम कहें कि इस दुनिया में एक बीमारी से पीड़ित ऐसे कई लोग हैं जो जानवरों की तरह घास खाते हैं तो आप क्या कहेंगे. यह कोई हवा हवाई बात नहीं है, बल्कि यह एक तरह की मनोवैज्ञानिक बीमारी है. आज इस आर्टिकल में हम आपको इसी बीमारी से जुड़ी जानकारियां देंगे और बताएंगे कि आखिर किसी इंसान में ऐसा क्या बदलाव हो जाता है कि वह घास खाने लगता है.
कौन सी है वह बीमारी
इस विचित्र बीमारी को बोएंथ्रोपी (Boanthropy) कहते हैं. यह एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक बीमारी है. अगर यह बीमारी किसी इंसान को लग जाए तो वह इंसान अपने आप को एक गाय समझने लगता है और उसका बर्ताव भी उसी तरह का हो जाता है. यह बीमारी उसके दिमाग पर इतना असर करती है कि एक अच्छा खासा इंसान खुद को बैल या गाय मारने लगता है और वह उसी हिसाब से खाने की कोशिश करता है और उसी हिसाब से जीने की कोशिश करता है.
घास के लिए तरसने लगते हैं मरीज
जैसे ही किसी इंसान को बोएंथ्रोपी की बीमारी होती है उसके अंदर गाय जैसी स्थिति उत्पन्न होने लगती है, वह अपने हाथ और पैरों का इस्तेमाल करके चलने लगता है. अच्छी घास देखते हैं उसे खाने की कोशिश करता है. उसका कारण यह है कि जैसे ही कोई मरीज इस बीमारी से ग्रसित होता है उसके अंदर एक खास तरह का स्वाद विकसित होता है जो उसे घास खाने के लिए प्रेरित करता है अगर इस मरीज को उस दौरान खास नहीं मिले तो वह उसके लिए तड़पने लगता है.
किस वजह से होती है यह बीमारी
यह बीमारी किसी भी इंसान को क्यों जकड़ लेती है आज तक इसका कोई सटीक उत्तर नहीं मिला. कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं और सोचते हैं कि ऐसा इंसान इसलिए करता है क्योंकि उस पर काला जादू या टोना कर दिया गया है. वही कुछ वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक इसे एक साइकोलॉजिकल बीमारी के तौर पर देखते हैं जो शिजोफ्रेनिया और बाइपोलर डिजीज की तरह है. इस बीमारी में एक अच्छा खासा व्यक्ति हल्लुसीनेशन का शिकार हो जाता है और वह खुद को इंसान मानने की बजाय जानवर समझने लगता है.
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