एक्सप्लोरर

बीरबल की मौत के बाद क्या हुआ था अकबर का हाल, उन्होंने किससे लिया था बदला?

अकबर और बीरबल के आपने किस्से तो बहुत सुने होंगे और किताबें भी पढ़ी होंगी. लेकिन क्या आपको पता है कि अकबर की एक गलती की वजह से बीरबल की मौत हो गई थी. आइए जानें कि फिर उन्होंने कैसे बदला लिया.

अकबर और बीरबल की दोस्ती के किस्से हर किसी ने सुने हैं. दरबार की हंसी-मजाक से लेकर मुश्किल सवालों के जवाब तक, बीरबल हमेशा बादशाह के सबसे भरोसेमंद साथी रहे. लेकिन इतिहास के पन्नों में एक ऐसा दिन भी दर्ज है, जब यही रिश्ता गहरे दुख में बदल गया था. एक सैन्य अभियान, एक गलत आकलन और पहाड़ी दर्रों में हुआ घातक हमला, जिसने न सिर्फ बीरबल की जान ली, बल्कि अकबर को भी भीतर तक तोड़ दिया था.

बीरबल कौन थे और क्यों खास थे?

बीरबल, जिनका असली नाम महेश दास था, मुगल सम्राट अकबर के नवरत्नों में शामिल थे. वे अपनी बुद्धिमत्ता, कूटनीति और हाजिरजवाबी के लिए मशहूर थे. हालांकि लोककथाओं और टीवी कहानियों में उन्हें हास्य-प्रसंगों से जोड़ा जाता है, लेकिन वे दरबार में गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक भूमिका भी निभाते थे. अकबर उन्हें बेहद करीब मानते थे और कई मामलों में उनकी राय को महत्व देते थे. 

स्वात और बाजौर में बढ़ता संकट

16वीं सदी के उत्तरार्ध में अफगानिस्तान के कुछ इलाके मुगल शासन के अधीन थे, लेकिन स्वात और बाजौर क्षेत्र में युसूफजई कबीले के विद्रोही सक्रिय हो गए थे. वहां के स्थानीय लोगों को परेशान किया जा रहा था और मुगल प्रभाव को चुनौती दी जा रही थी. इतिहासकार शाजी जमां की पुस्तक ‘अकबर’ और अबुल फजल द्वारा लिखित अकबरनामा में इस अभियान का उल्लेख मिलता है. विद्रोह की खबर जब अकबर तक पहुंची, तो उन्होंने अपने विश्वस्त सेनापति जैन खान कोका को सेना के साथ भेजा, लेकिन पहाड़ी इलाकों में लड़ाई आसान नहीं थी. कोका को कड़ा प्रतिरोध झेलना पड़ा और उन्होंने अतिरिक्त सहायता की मांग की. 

बीरबल को भेजने का फैसला

अकबर के सामने विकल्प था कि अबुल फजल या बीरबल को अतिरिक्त सेना के साथ भेजा जाए. अबुल फजल स्वयं जाने को तैयार थे, लेकिन अकबर ने बीरबल को चुना. यही निर्णय बाद में भारी साबित हुआ. बीरबल बौद्धिक रूप से अत्यंत तेज थे, लेकिन युद्धकला में उनका अनुभव सीमित था. फिर भी उन्हें लगभग 8000 सैनिकों के साथ उत्तर-पश्चिमी मोर्चे पर भेज दिया गया. यह 1586 का समय माना जाता है.

मलंदराई दर्रे में घात

मुगल सेना जब मलंदराई दर्रे के पास पहुंची, तो युसूफजई लड़ाकों ने ऊंचाई से हमला किया. समकालीन इतिहासकार अब्दुल कादिर बदायूंनी के अनुसार, विद्रोहियों ने पहाड़ियों से तीरों और पत्थरों की बारिश कर दी. संकरे रास्ते और दुर्गम भूभाग के कारण मुगल सैनिकों को संभलने का मौका नहीं मिला. बीबीसी की मानें तो इस हमले में 8000 सैनिक मारे गए. बीरबल भी वहीं युद्धभूमि में वीरगति को प्राप्त हुए. उनके पार्थिव शरीर को वापस लाया नहीं जा सका, जो अकबर के लिए और भी गहरा आघात था. 

अकबर का शोक और गुस्सा

जब बीरबल की मृत्यु का समाचार दरबार पहुंचा, तो अकबर स्तब्ध रह गए. कहा जाता है कि दो दिन तक उन्होंने न भोजन किया, न पानी पिया. वे दरबार में उपस्थित नहीं हुए और जनता को झरोखे से दर्शन भी नहीं दिए. तूरान से आए दूत से मिलने से भी उन्होंने इनकार कर दिया था. 

अबुल फजल ने अकबरनामा में लिखा है कि बादशाह ने कुछ समय तक किसी काम में रुचि नहीं दिखाई. बाद में उनकी मां हमीदा बानो बेगम और दरबारियों ने उन्हें संभालने की कोशिश की. बदायूंनी के अनुसार, अकबर जैन खान कोका से बेहद नाराज थे और उन्होंने उन्हें अपनी शक्ल न दिखाने का आदेश दिया. अकबर इस बात से भी दुखी थे कि वे बीरबल का अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक नहीं कर सके. कुछ विवरणों में यह भी उल्लेख मिलता है कि वे स्वयं काबुल जाने का विचार कर रहे थे, लेकिन सलाहकारों ने उन्हें रोका. 

कैसे और किससे लिया था बदला? 

बीरबल की मृत्यु के कुछ ही सप्ताह बाद अकबर ने निर्णायक कदम उठाया. इस बार अभियान की कमान राजा टोडरमल को सौंपी गई. मुगल सेना ने संगठित तैयारी के साथ स्वात और बाजौर में दोबारा हमला किया. इस बार रणनीति अधिक सख्त और योजनाबद्ध थी. मुगल सेना को सफलता मिली और विद्रोही दबा दिए गए. इसे बीरबल की मृत्यु का प्रतिशोध माना गया. अकबर ने बीरबल को याद करते हुए उन्हें सर्वश्रेष्ठ में सर्वश्रेष्ठ कहा.

यह भी पढ़ें: शराब के साथ हमेशा क्यों खाई जाती है नमकीन चीज, क्या मीठा खाने से दोगुना हो जाता है नशा?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Teesta River Project: बांग्लादेश ने चीन को सौंपा तीस्ता प्रोजेक्ट, जानें यह भारत के लिए कितना खतरनाक?
बांग्लादेश ने चीन को सौंपा तीस्ता प्रोजेक्ट, जानें यह भारत के लिए कितना खतरनाक?
दिल्ली का जंतर-मंतर कैसे बना लोकतंत्र की आवाज, सबसे पहले यहां कौन सा आंदोलन हुआ था?
दिल्ली का जंतर-मंतर कैसे बना लोकतंत्र की आवाज, सबसे पहले यहां कौन सा आंदोलन हुआ था?
Plastic Currency Note Cost: प्लास्टिक के नोट बनाने में कितना पैसा होगा खर्च, जानें 10 रुपये का नोट कितने में बनेगा?
प्लास्टिक के नोट बनाने में कितना पैसा होगा खर्च, जानें 10 रुपये का नोट कितने में बनेगा?
Sonam Wangchuk Hunger Strike: अन्ना हजारे कैसे 12 दिन में घुटनों पर ले आए थे UPA सरकार, क्यों इतना सफल रहा था आंदोलन?
अन्ना हजारे कैसे 12 दिन में घुटनों पर ले आए थे UPA सरकार, क्यों इतना सफल रहा था आंदोलन?

वीडियोज

गुटखाबाज बीवी की डिमांड डायरी!
Shehnaaz Gill बोलीं- अभी सक्सेस नहीं मिली, मेरा सपना है लोग टिकट खरीदकर मेरी फिल्में देखने आएं
Bollywood News: '3 Idiots' की कहानी पर आमिर का नया खुलासा, सोनम वांगचुक कनेक्शन पर छिड़ी नई बहस (17-07-2026)
Udne ki Asha: Sailee-Sachin की बदली किस्मत; Ganpatipule में मिला पैसा, पर खो गया सुकून!
Tata Altroz diesel long term review and mileage: E20 ka best solution? #autolive

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
बुलेट ट्रेन में देरी का ठीकरा जापान के मंत्री ने भारत पर फोड़ा, विदेश मंत्रालय ने दिया ये जवाब
बुलेट ट्रेन में देरी का ठीकरा जापान के मंत्री ने भारत पर फोड़ा, विदेश मंत्रालय ने दिया ये जवाब
पाक के सिंध में बच्चों में तेजी से फैला HIV, WHO का अनुमान- पूरे देश में साढ़े 3 लाख लोग ऐसे ही जीने को मजबूर
पाक के सिंध में बच्चों में तेजी से फैला HIV, WHO का अनुमान- पूरे देश में साढ़े 3 लाख लोग ऐसे ही जीने को मजबूर
चिराग पासवान ने साफ किया रुख, 'बिहार में शराबबंदी कानून हटाने के पक्ष में तभी होंगे, जब पहले...'
चिराग पासवान ने साफ किया रुख, 'बिहार में शराबबंदी कानून हटाने के पक्ष में तभी होंगे, जब पहले...'
'मैं खेलना छोड़ दूंगा...', संन्यास की अफवाहों के बीच रोहित शर्मा के पुराने बयान ने मचाई सनसनी; जानें रिटायरमेंट पर क्या कहा
'मैं खेलना छोड़ दूंगा', संन्यास की अफवाहों के बीच रोहित शर्मा के पुराने बयान ने मचाई सनसनी
Lenin Box Office Day 7 Worldwide: 'धमाल 4' के आगे 'लेनिन' का भी वर्ल्डवाइड बजा डंका, अखिल अक्किनेनी के करियर का बना इतना बड़ा रिकॉर्ड
'लेनिन' का भी वर्ल्डवाइड बजा डंका, अखिल अक्किनेनी के करियर का बना इतना बड़ा रिकॉर्ड
Explained: क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल? कैसे बजट सत्र के मुकाबले बदल गई मानसून सत्र की तस्वीर?
क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल? कैसे बजट सत्र के मुकाबले मानसून सत्र की तस्वीर बदल गई?
मानसून सत्र में पेश नहीं हो पाएगा 130वां संविधान संशोधन बिल? JPC सदस्यों में नहीं बनी एक राय, कहा- ‘अभी चर्चा की जरूरत’
मानसून सत्र में पेश नहीं हो पाएगा 130वां संविधान संशोधन बिल? JPC सदस्यों में नहीं बनी एक राय
ब्रिटेन के 59वें PM होंगे लेबर पार्टी के एंडी बर्नहैम, ग्रेटर मैनचेस्टर के रह चुके मेयर, किंग चार्ल्स III सौंपेंगे सत्ता
ब्रिटेन के 59वें PM होंगे लेबर पार्टी के एंडी बर्नहैम, ग्रेटर मैनचेस्टर के रह चुके मेयर, किंग चार्ल्स III सौंपेंगे सत्ता
Embed widget