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सेंट्रल इंडिया की लाइफलाइन कहजाती है नर्मदा नदी, क्यों है बेहद खास

भारत में बहने वाली ज्यादातर नदियां पूरब की ओर बहती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं पश्चिम दिशा में बहकर लाखों लोगों की जीवन धारा बनने वाली नर्मदा नदी के बारे में.

भारत में अनेकों नदियां बहती हैं. इन नदियों का पानी सिंचाई से लेकर रोजमर्रा के कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. भारत में ज्यादातर ईस्ट फ्लोइंग रिवर्स मौजूद हैं. जबकि वेस्ट में बहने वाली केवल एक मुख्य नदी नर्मदा है. 

नर्मदा की स्पेशल डायरेक्शन इसे बेहद खास और काफी जरूरी बनाती है. सेंट्रल इंडिया से बहने वाली यह नदी कई जगहों की प्यास बुझती है और कई गांवों, खेतों को जिंदगी देती है. ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं इसी बेहद खास नदी के महत्व के बारे में.

कहां से शुरू होती है नर्मदा नदी ?

नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के अनूपपुर डिस्ट्रिक्ट में अमरकंटक की पहाड़ियों से निकलती है. यहां से निकलकर यह नदी वेस्ट की ओर बहती है और काफी लंबा रास्ता तय करने के बाद अरब सागर में गिरती है. आपको बता दें कि अमरकंटक की पहाड़ियों को बेहद पवित्र माना जाता है और धार्मिक तौर पर इसका काफी महत्व है. हर साल यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु नर्मदा को देखने आते हैं. ऐसे में यहां इसकी काफी मान्यता है. अरब सागर में गिरने से पहले ये नदी तकरीबन 1300 किमी का रास्ता तय करती है. इस दौरान ये रॉकी टेरियन, लश ग्रीन फॉरेस्ट और गहरी खाइयों से होकर गुजरती है. 

किन राज्यों से होकर गुजरती है नर्मदा ?

नर्मदा नदी भारत के 3 बड़े राज्यों से होकर जाती है, जिसमें महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश शामिल हैं. ये मध्य प्रदेश का सबसे ज्यादा हिस्सा कवर करती है और आखिर में गुजरात के भरूच के पास गल्फ ऑफ खम्बात से होकर अरब सागर में गिर जाती है. ये नर्मदा नदी नॉर्दर्न और साउदर्न प्लेन को डिवाइड करने का काम भी करती है और उनके बीच नैचुरली बाउंड्री बनाती है. 

नर्मदा का धार्मिक महत्व 

नर्मदा नदी हिंदुओं के लिए सिर्फ एक नदी नहीं बल्कि उससे कई बढ़कर है. हिंदू धर्म में इसकी काफी मान्यता है. ऐसा माना जाता है कि नर्मदा में डुबकी लगाने से इंसान के सारे पाप धुल जाते हैं और सभी काम बनते चले जाते हैं. इसलिए कई लोग पूरी आस्था और विश्वास के साथ इस नदी की परिक्रमा भी करते हैं, जिसे नर्मदा परिक्रमा कहा जाता है. माना जाता है कि नर्मदा का जिक्र पुराणों और वेदों में भी देखने को मिला है, जहां इसे देवी नर्मदा के नाम से बताया गया है.

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आंखों में सपने लिए, घर से हम चल तो दिए, जानें ये राहें अब ले जाएंगी कहां... कहने को तो ये सिंगर शान के गाने तन्हा दिल की शुरुआती लाइनें हैं, लेकिन दीपाली की जिंदगी पर बखूबी लागू होती हैं. पूरा नाम दीपाली बिष्ट, जो पहाड़ की खूबसूरत दुनिया से ताल्लुक रखती हैं. किसी जमाने में दीपाली के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ कंधे पर झोला टांगकर और हाथों में अखबार लेकर घूमने वाले लोग होते थे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आंखों में इसी दुनिया का सितारा बनने के सपने पनपने लगे और वह भी पत्रकारिता की दुनिया में आ गईं. उन्होंने अपने इस सफर का पहला पड़ाव एबीपी न्यूज में डाला है, जहां वह ब्रेकिंग, जीके और यूटिलिटी के अलावा लाइफस्टाइल की खबरों से रोजाना रूबरू होती हैं. 

दिल्ली में स्कूलिंग करने वाली दीपाली ने 12वीं खत्म करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया और सत्यवती कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस ऑनर्स में ग्रैजुएशन किया. ग्रैजुएशन के दौरान वह विश्वविद्यालय की डिबेटिंग सोसायटी का हिस्सा बनीं और अपनी काबिलियत दिखाते हुए कई डिबेट कॉम्पिटिशन में जीत हासिल की. 

साल 2024 में दीपाली की जिंदगी में नया मोड़ तब आया, जब उन्होंने गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (नोएडा) से टीवी जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री हासिल की. उस दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, एडिटिंग, कंटेंट राइटिंग, रिसर्च और एंकरिंग की बारीकियां सीखीं. कॉलेज खत्म करने के बाद वह एबीपी नेटवर्क में बतौर कॉपीराइटर इंटर्न पत्रकारिता की दुनिया को करीब से समझ रही हैं. 

घर-परिवार और जॉब की तेज रफ्तार जिंदगी में अपने लिए सुकून के पल ढूंढना दीपाली को बेहद पसंद है. इन पलों में वह पोएट्री लिखकर, उपन्यास पढ़कर और पुराने गाने सुनकर जिंदगी की रूमानियत को महसूस करती हैं. इसके अलावा अपनी मां के साथ मिलकर कोरियन सीरीज देखना उनका शगल है. मस्ती करने में माहिर दीपाली को घुमक्कड़ी का भी शौक है और वह आपको दिल्ली के रंग-बिरंगे बाजारों में शॉपिंग करती नजर आ सकती हैं.

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