Hormuz Strait: बॉम्बर से बम गिराकर होर्मुज स्ट्रेट क्यों नहीं खुलवा देता अमेरिका, जानें अब भी कितनी मजबूत है ईरान की नेवी?
Hormuz Strait: हाल ही में ईरान ने कथित तौर पर अमेरिकी जहाज को निशाना बनाया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अमेरिका बमबारी करके होर्मुज स्ट्रेट क्यों नहीं खुलवा सकता.

- ईरान ने ड्रोन से अमेरिकी जहाज को निशाना बनाया, बदले में जहाज जब्त हुआ।
- संकरे होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के मिसाइल, ड्रोन, सुरंगें खड़ी करती हैं चुनौती।
- ईरान के छोटे, तेज जहाज और पनडुब्बियां पारंपरिक नौसेना के लिए खतरा।
- ईरानी जवाबी कार्रवाई तेल की कीमतों पर भारी असर डाल सकती है।
Hormuz Strait: ईरान ने अपने एक जहाज को जब्त किए जाने के बदले में कथित तौर पर ओमान सागर में ड्रोन का इस्तेमाल करके अमेरिकी जहाज को निशाना बनाया है. इससे एक बार फिर से एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. अगर होर्मुज स्ट्रेट इतना ही जरूरी है तो अमेरिका सीधे-सीधे बॉम्बर से बम गिरकर क्यों इसे नहीं खोल सकता? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
एक तंग रास्ता
होर्मुज स्ट्रेट अपने सबसे तंग हिस्से में सिर्फ 33 से 39 किलोमीटर चौड़ा है. यह इसे दुनिया के सबसे ज्यादा रणनीतिक रूप से संवेदनशील चोकपॉइंट में से एक बनाता है. इस हिस्से में ईरान के समुद्र तट के पीछे ऊबड़-खाबड़ जाग्रोस पहाड़ हैं. ये पहाड़ एक कुदरती किले की तरह काम करते हैं. इन पहाड़ों की मदद से गुफा और बंकरों में छिपे मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और निगरानी इकाइयों को सुरक्षा मिलती है. इतनी तंग जगह में अगर हमला होता है तो अमेरिका के आधुनिक युद्धपोतों को भी जवाबी कार्रवाई के लिए काफी कम समय मिलेगा.
समुद्री बारूदी सुरंगें
ईरान के सबसे ताकतवर हथियारों में से एक समुद्री बारूदी सुरंगें हैं. यह काफी ज्यादा सस्ती लेकिन असरदार हैं. ये उपकरण विशाल जहाजों को पंगु बना सकते हैं या फिर उन्हें डुबो सकते हैं. ऐसा माना जाता है कि ईरान ने ऐसी बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगें तैनात कर रखी हैं.
चुनौती सिर्फ इनसे बचने की नहीं है बल्कि इन्हें हटाने की भी है. बारूदी सुरंगें हटाने के अभियान धीमे, खतरनाक और काफी ज्यादा संसाधनों की मांग करने वाले होते हैं. जब तक पानी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हो जाता तब तक व्यापारिक जहाज और यहां तक की बीमा कंपनियां भी वहां काम करने से मना कर देंगी. ऐसे में किसी भी बमबारी अभियान के बावजूद यह रास्ता असल में बंद ही रहेगा.
बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई के जोखिम
अमेरिका का सीधा हमला एक बड़े संघर्ष को जन्म दे सकता है. ईरान तेल के टैंकरों को निशाना बनाकर, इस इलाके में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमला करके या फिर बारूदी सुरंग और मिसाइल की मदद से इस स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद करके जवाबी कार्रवाई कर सकता है.
इसका सबसे बड़ा असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा. क्योंकि दुनिया के तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है इस वजह से तनाव में किसी भी बढ़ोतरी से तेल की कीमत आसमान छू सकती है. इसका आर्थिक असर विरोधी देशों के साथ-साथ अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर भी पड़ेगा.
ईरान की नेवी ताकत
पारंपरिक नौसेनाओं की तरह बड़े जंगी जहाजों पर निर्भर रहने के बजाय ईरान एक ऐसी रणनीति अपनाते हैं जिसे 'असममित युद्ध' कहा जाता है. इसमें छोटे, तेज और जिनका पता लगाना मुश्किल हो, ऐसे खतरों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है. ईरान के मॉस्किटो फ्लीट में सैकड़ों तेज गति वाली नावें शामिल हैं जो झुंड बनाकर हमला कर सकती हैं. ये नावें जहाज रोधी मिसाइल से लैस होती हैं. ये मिसाइलें 120 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित अपने लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम हैं.
पनडुब्बियां और छिपे हुए हमले
ईरान लगभग 18 से 25 पनडुब्बियों का भी संचालन करता है. यह खास तौर से होर्मुज स्ट्रेट के संकरे जल क्षेत्र में काफी प्रभावी साबित होती हैं. ये पनडुब्बियां छिपी रह सकती हैं और अचानक हमला कर सकती हैं.
इसी के साथ ईरान की रक्षा प्रणाली की एक बड़ी ताकत उसकी तटीय मिसाइलों और ड्रोनों का विशाल नेटवर्क है. जहाज रोधी क्रूज मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन समुद्र के किनारे छिपे हुए जहाज से दागे जा सकते हैं. बमबारी के जरिए इन्हें पूरी तरह से नष्ट करना लगभग असंभव हो जाता है.
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