Helium Gas Crisis: कहां-कहा इस्तेमाल होती है हीलियम गैस, ईरान जंग में कैसे हो रही इसकी कमी?
Helium Gas Crisis: मिडिल लिस्ट में चल रहे तनाव का असर सिर्फ तेल और एलपीजी गैस पर ही नहीं पड़ रहा है. इसकी वजह से हीलियम गैस पर भी प्रभाव पड़ा है. आइए जानते हैं क्यों है यह गैस जरूरी.

Helium Gas Crisis: मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव सिर्फ तेल और गैस को ही प्रभावित नहीं कर रहा है. बल्कि एक काफी जरूरी संसाधन हीलियम गैस पर भी इसका काफी प्रभाव पड़ रहा है. कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी में कथित रूकावटों के बाद हीलियम की वैश्विक सप्लाई चेन को जबर्दस्त झटका लगा है. क्योंकि यह अकेला हब दुनिया के लगभग एक तिहाई हीलियम उत्पादन के लिए जिम्मेदार है, इस वजह से इसका असर दुनिया भर के उद्योगों में महसूस किया जा रहा है.
हीलियम इतना जरूरी क्यों है?
हीलियम सिर्फ गुब्बारों के लिए ही नहीं है. यह एक काफी जरूरी औद्योगिक और वैज्ञानिक गैस है. इसके अनोखे गुण जैसे कि ज्वलनशील ना होना और काफी कम तापमान तक पहुंचाने की क्षमता इसे आधुनिक तकनीक और स्वास्थ्य सेवा के लिए जरूरी बनाते हैं.
चिकित्सा तकनीक की रीढ़
हीलियम के सबसे जरूरी इस्तेमाल में से एक एमआरआई मशीनों में होता है. लिक्विड हीलियम का इस्तेमाल सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा करने के लिए किया जाता है. यह उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल स्कैन बनाने के लिए जरूरी होते हैं. किसी भी तरह की कमी का सीधा असर अस्पताल सेवाओं पर पड़ सकता है. इसी के साथ जांच की लागत भी बढ़ सकती है.
इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप्स के लिए जरूरी
सेमीकंडक्टर को बनाने में हीलियम की एक बड़ी भूमिका होती है. यह स्मार्टफोन, कंप्यूटर और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होने वाले माइक्रोचिप को बनाने के लिए एक साफ और नियंत्रित वातावरण को बनाने में मदद करता है. इसकी कमी से वैश्विक चिप उत्पादन में रुकावट आ सकती है.
अंतरिक्ष और रॉकेट लॉन्च में एक बड़ी भूमिका
SpaceX जैसी अंतरिक्ष कंपनियां रॉकेट के ईंधन सिस्टम को दबाव देने और साफ करने के लिए हीलियम पर निर्भर रहती हैं. हीलियम के बिना सुरक्षित रॉकेट लॉन्च करना काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है.
फाइबर ऑप्टिक और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर
हीलियम का इस्तेमाल फाइबर ऑप्टिक केबल को बनाने में किया जाता है. यह हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क को शक्ति देता है. सप्लाई में रूकावटों का असर दूरसंचार और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ सकता है.
गहरे समंदर में गोताखोरी में इस्तेमाल
पानी के नीचे की मुश्किल परिस्थितियों में गोताखोरों को सुरक्षित रूप से सांस लेने और नाइट्रोजन से जुड़ी परेशानियों से बचने में मदद करने के लिए हीलियम को ऑक्सीजन के साथ मिलाया जाता है. यह इसे व्यावसायिक और वैज्ञानिक दोनों तरह के गोताखोरी अभियानों के लिए जरूरी बनाता है.
ईरान संघर्ष में हीलियम की कमी
यह परेशानी तब शुरू हुई जब हमलों की वजह से कतर की रास लफान में कामकाज रुक गया. इस वजह से उत्पादन पर असर पड़ा. इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट जैसे जरूरी शिपिंग मार्गों पर कड़े नियंत्रण की वजह से एक्सपोर्ट में देरी हुई. जिस वजह से जहाजों को लंबे रास्ते से जाना पड़ा और लागत बढ़ गई.
सप्लाई में रुकावट की वजह से भारत के साथ-साथ कई दूसरे देशों में हीलियम की कीमतें 70% से 100% तक बढ़ गई हैं. इससे स्वास्थ्य सेवाओं की लागत बढ़ सकती है, निर्माण में देरी हो सकती है और आर्थिक असर पड़ सकता है.
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Source: IOCL




























