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Who Was Tughlaq: कौन था मोहम्मद बिन तुगलक, जिसके नाम से बनी सड़क से बीजेपी नेताओं को हो रही नफरत

Who Was Tughlaq: हाल ही में दिल्ली में भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने घर की नेम प्लेट से तुगलक रोड हटा दिया है, जिससे राजनीति गरमा गई है. इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं कि आखिर तुगलक कौन था.

Who Was Tughlaq: भाजपा की सरकार में सड़कों और शहरों के नाम बदलने की कवायद काफी दिनों से चल रही है. हाल ही में दिल्ली में सड़क के नाम बदले जाने का मामला सामने आया है. जिससे राजनीति गरमा गई है. भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा और सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने तुगलक लेन पर स्थित अपने बंगले की नेम प्लेट पर स्वामी विवेकानंद मार्ग लिख दिया है. दोनों के इस कदम से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. भले ही अभी आधिकारिक रूप से सड़क का नाम नहीं बदला है, लेकिन दोनों नेताओं के इस कदम के बाद चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं. हालांकि तुगलक लेन का नाम बदलने की मांग बहुत पहले से होती आ रही है. लेकिन आपको पता है कि आखिर ये तुगलक कौन था. आइए इसके बारे में आपको विस्तार से बताएं.

कौन था मुहम्मद बिन तुगलक

देश की राजधानी दिल्ली अपनी स्थापना के बाद से कई बार बसी और उजड़ी है. इतिहस में यहां गुलाम वंश, चौहान वंश, तोमर वंश, खिलजी वंश, तुगलक वंश, सैय्यद वंश, लोदी वंध और फिर मुगल और इसके बाद अंग्रेजों का शासन रहा है. दिल्ली आजादी के बाद भारत की राजधानी बनी है. यहां तख्त पर बैठने वाले तमाम शासकों ने अपने फैसलों से प्रजा को चौंकाया है. तुगलक वंश का शासक मुहम्मद बिन तुगलक भी उनमें से एक था.

तुगलक ने अपने राज में कई प्रयोग किए

खिलजी वंश के शासकों के बाद तुगलक वंश की स्थापना हुई. इसकी स्थापना गाजी मलिक ने की थी. 1320 ई. में गयासुद्दीन तुगलक सिंहासन पर बैठा और पांच साल बाद 1325 में उसका इंतकाल हो गया. इसके बाद राजा बना मुहम्मद बिन तुगलक. हालांकि कई इतिहासकारों का मानना है कि वालिद की मौत के लिए तुगलक ही जिम्मेदार था. तुगलक को ऐसा शासक कहा जाता है, जिसने अपने राज में कई प्रयोग किए थे. उसने टोकन मुद्रा, कृषि क्षेत्र में सुधार, राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित करना जैसे काम किए थे. वो अन्य शासकों की अपेक्षा ज्यादा शिक्षित था. उसने नस्ल के आधार पर भेदभाव खत्म किया और योग्य अधिकारियों की नियुक्ति की थी. 

इस वजह से नाम पड़ा तुगलकी फरमान

मुहम्मद बिन तुगलक ने 14वीं सदी में 26 साल तक दिल्ली के सिंहासन पर राज किया था. इसका नाम बादशाहत के साथ-साथ लंबे-चौड़े साम्राज्य के लिए भी जाना जाता है. उसने रातोंरात कई फैसले बड़ी सख्ती से लागू करवाए थे, जिनको आज भी याद किया जाता है. इसे ही तुगलकी फरमान भी कहा जाता है. इतिहास की मानें तो उसके शासनकाल में दिल्ली सल्तनत का भौगोलिक क्षेत्रफल ज्यादा रहा था. बेहद विद्वान शासकों में शामिल तुगलक हमेशा अपने रिश्तेदारों और वजीरों पर शक करता था और किसी शत्रु को कभी कम नहीं समझता था. 

तुगलक का विवादित फैसला

तुगलक के विवादित फैसलों में राजधानी दिल्ली को दौलताबाद शिफ्ट करना सबसे ज्यादा चर्चा में रहा था. दरअसल इस फैसले का खराब पहलू ये था कि उसने दिल्ली की आबादी को भी दौलताबाद शिफ्ट होने के लिए मजबूर किया था. कहा जाता है, जो लोग जबरन शिफ्ट हुए उनमें से बहुतों की तो रास्ते में मौत हो गई थी. दौलताबाद खुश्क इलाका था, ऐसे में पानी की जबरदस्त किल्लत के कारण उसे वापस राजधानी को दिल्ली ट्रांसफर करना पड़ा था.

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