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टाइगर श्रॉफ पर हमला करने वाले शूटर्स पकड़े गए, इन्हें कितने दिन की जेल होगी?

अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग करने वाले तीनों शूटर राजस्थान के कोटा से पकड़े गए हैं, जिन पर BNS धारा 109 और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा चलेगा. आइए जानें कि इनको कितने दिन जेल जाना पड़ सकता है.

मुंबई के जुहू इलाके में फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हाल ही में हुई गोलीबारी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और गैंगस्टर सिंडिकेट के बढ़ते दुस्साहस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते इस मामले में शामिल तीनों हमलावरों को राजस्थान के कोटा से हिरासत में ले लिया गया है, जिनसे पुलिस कड़ी पूछताछ कर रही है. लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गे अनिल पंडित द्वारा इस हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद यह मामला कानूनी और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण हो गया है. आइए जानें कि टाइगर के शूटर्स को कितनी सजा मिलेगी.

हमले की साजिश और कोटा से हुई गिरफ्तारियां

जुहू स्थित आवास के बाहर अभिनेता को निशाना बनाकर की गई फायरिंग के तुरंत बाद मुंबई पुलिस और खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गई थीं. सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर आरोपियों के मूवमेंट को ट्रैक किया गया. राजस्थान पुलिस के सहयोग से चलाए गए संयुक्त ऑपरेशन में तीनों संदिग्धों को कोटा में घेरकर पकड़ा गया. प्राथमिक पड़ताल के मुताबिक, पकड़े गए तीन आरोपियों में से दो वही शूटर हैं, जिन्होंने सीधे तौर पर गोलीबारी की वारदात को अंजाम दिया था. पुलिस फिलहाल इनसे गैंग के नेटवर्क और मुख्य साजिशकर्ताओं के बारे में गहन पूछताछ कर रही है.

कितनी धाराओं में सजा संभव?

किसी भी व्यक्ति पर जानलेवा हमला करने के मामलों में पुलिस नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी दर्ज करती है, जिसने जुलाई 2024 से भारतीय दंड संहिता (IPC) का स्थान लिया है. हमलावरों पर जान से मारने की नीयत से गोली चलाने की स्थिति में मुख्य रूप से BNS की धारा 109 लागू की जाती है. यह धारा उन मामलों को कवर करती है जहां आरोपी का इरादा पीड़ित की जान लेना था, चाहे पीड़ित पूरी तरह सुरक्षित बच ही क्यों न गया हो. अदालत में सजा का निर्धारण हमले के परिणाम और पीड़ित को पहुंची चोट की गंभीरता के आधार पर तय किया जाता है.

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धारा 109 के तहत तय सजा के प्रावधान

भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 में अपराध की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग सजा की व्यवस्था की गई है. यदि जानलेवा हमले के दौरान गोली चूक जाती है या किसी को शारीरिक चोट नहीं पहुंचती, तब भी आरोपी को 10 साल तक की कठोर कैद और भारी जुर्माने की सजा दी जा सकती है. वहीं, अगर फायरिंग में पीड़ित को गोली लग जाती है या वह घायल हो जाता है, तो अदालत आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुना सकती है. इसके अलावा, यदि हमला करने वाला आरोपी पहले से ही किसी अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा हो और दोबारा ऐसा अपराध करे, तो धारा 109(2) के तहत उसे मृत्युदंड तक दिया जा सकता है.

अन्य वैकल्पिक धाराएं

कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार, हर फायरिंग केस में सीधे हत्या के प्रयास की धारा लागू नहीं होती. इसके लिए जांच एजेंसियों को कोर्ट में यह साबित करना होता है कि हमलावर का मकसद जान लेना ही था. इसके लिए पुलिस गोली चलने की दिशा, दूरी, निशाने के स्थान और आरोपी द्वारा दी गई पुरानी धमकियों को सबूत के तौर पर पेश करती है. यदि जांच में यह सामने आता है कि गोली केवल डराने, दहशत फैलाने या हवा में चलाई गई थी, तो मामले में धारा 110 (गैर-इरादतन हत्या का प्रयास), धारा 125 (सुरक्षा को खतरे में डालना) और धारा 351 (आपराधिक धमकी) जैसी हल्की धाराएं जोड़ी जाती हैं.

साजिश और रंगदारी से जुड़ी सहयोगी धाराएं

जब किसी अपराध को अंजाम देने में एक से अधिक लोग शामिल होते हैं, तो कानून के तहत इसे संगठित प्रयास माना जाता है. ऐसे मामलों में मुख्य धारा के साथ BNS की धारा 3(5) और आपराधिक षड्यंत्र रचने से संबंधित धारा 61 भी जोड़ दी जाती है. टाइगर श्रॉफ मामले में चूंकि लॉरेंस गैंग का नाम सामने आया है और यदि इसके पीछे कोई आर्थिक वसूली, रंगदारी या फिरौती का एंगल साबित होता है, तो पुलिस आरोपियों के खिलाफ जबरन वसूली से जुड़ी धारा 308 के तहत भी कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाएगी, जिससे आरोपियों की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं.

आर्म्स एक्ट 1959 का अलग कानूनी महत्व

हमले या हिंसा के मुकदमों में हमला करने के अपराध के साथ-साथ इस्तेमाल किए गए हथियार की वैधानिकता की अलग से जांच होती है. इसके लिए आर्म्स एक्ट 1959 के तहत अलग से केस बनता है. इस कानून की धारा 3 के अनुसार, बिना वैध लाइसेंस के हथियार या गोला-बारूद रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है. गैर-कानूनी तरीके से असलाह पास रखने या उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने पर आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है, जिसमें आरोपी को कई सालों की जेल और आर्थिक दंड भुगतना पड़ता है.

प्रतिबंधित हथियार और धारा 27 का प्रयोग

अगर हमले में किसी सामान्य हथियार के बजाय स्वचालित या प्रतिबंधित श्रेणी के हथियारों का इस्तेमाल हुआ हो, तो कानून और अधिक सख्त रुख अपनाता है. वर्ष 2019 में आर्म्स एक्ट में किए गए संशोधनों के बाद प्रतिबंधित असलाह रखने या बेचने पर सजा की अवधि 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक बढ़ा दी गई है. वहीं, धारा 27 अवैध रूप से हथियार चलाने पर सजा तय करती है. प्रतिबंधित हथियारों से गोली चलाने पर काफी कठोर सजा का नियम है, और यदि उस फायरिंग में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो कानून में इसके लिए अत्यंत कड़े दंड दिए गए हैं.


टाइगर श्रॉफ पर हमला करने वाले शूटर्स पकड़े गए, इन्हें कितने दिन की जेल होगी?

संशोधित कानून और क्रिमिनल सिंडिकेट पर शिकंजा

आर्म्स एक्ट 2019 के नए बदलावों ने अवैध हथियारों के निर्माण, बिक्री और कस्टडी पर कड़ी रोक लगाई है. नए नियमों के तहत कोई भी सामान्य नागरिक अधिकतम दो लाइसेंसी हथियार ही रख सकता है. इसके अतिरिक्त, सुरक्षा बलों या पुलिसकर्मियों से हथियार छीनने की घटना को नया और गंभीर अपराध घोषित किया गया है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई व्यक्ति किसी आपराधिक गिरोह या सिंडिकेट के सदस्य के रूप में अवैध हथियार रखता हुआ पाया जाता है, तो उसके लिए न्यूनतम 10 साल की कैद से लेकर उम्रकैद तक की सख्त सजा का प्रावधान किया गया है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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