Mughal Emperor: इस मुगल बादशाह ने हाथ से कुरान लिख कमाए थे 305 रुपये, जानें क्या किया था उन्होंने इन पैसों का?
Mughal Emperor: मुगल बादशाह औरंगजेब हाथ से कुरान लिखकर पैसे कमाते थे. आइए जानते हैं कि उन पैसों का क्या किया जाता था.

- मुगल बादशाह औरंगजेब ने कुरान की नकल से ₹305 कमाए।
- अपनी वसीयत में यह पैसा गरीबों को दान देने को कहा।
- उन्होंने निजी खर्चों हेतु शाही खजाने का उपयोग नहीं किया।
Mughal Emperor: मुगल बादशाह औरंगजेब को न सिर्फ उनके लंबे शासनकाल के लिए बल्कि उनकी निजी जीवनशैली के लिए भी याद किया जाता है. ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक औरंगजेब ने कुरान की हाथ से नकल करके ₹305 कमाए थे. साथ ही उन्होंने अपनी वसीयत में यह साफ लिखा था कि उनकी मौत के बाद इस पैसे का इस्तेमाल कैसे किया जाए.
कुरान की नकल करके की कमाई
औरंगजेब सुलेख में माहिर थे और अपने खाली समय का कुछ हिस्सा कुरान की हाथ से नकल करने में बिताते थे. रिपोर्ट के मुताबिक इन प्रतियों को बेचा गया और उन्होंने इस काम से कुल ₹305 कमाए. अपनी आखिरी वसीयत में उन्होंने यह निर्देश दिया कि यह पैसा शाही काजी के जरिए दान पुण्य के कामों में बांटा जाए.
पैसे का इस्तेमाल गरीबों को खाना खिलाने में किया गया
औरंगजेब ने खास तौर पर यह निर्देश दिया था कि कुरान की नकल करके कमाए गए पैसे का इस्तेमाल गरीब मुसलमान के लिए मीठे चावल बनाने और साधुओं व फकीरों को दान देने में किया जाए. उनके निर्देशों में इस बात पर जोर दिया गया था कि पैसे का फायदा जरूरतमंदों को मिलना चाहिए ना कि इसका इस्तेमाल निजी या फिर शाही मकसद के लिए किया जाए.
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शाही खजाने का इस्तेमाल करने से इनकार किया
ऐसा कहा जाता है कि औरंगजेब ने अपने निजी खर्चों के लिए शाही खजाने के पैसे का इस्तेमाल करने से परहेज किया था. रिपोर्ट के मुताबिक वे खाने, कपड़े या फिर अपने दफन जैसी जरूरत के लिए शाही फंड पर निर्भर नहीं थे. इसके बजाय वे अपनी मेहनत से कमाई हुई रकम से ही इन खर्चों को पूरा करना पसंद करते थे.
औरंगजेब खुद को जनता की संपत्ति का सिर्फ एक रखवाला मानते थे. इसी सोच की वजह से वे शाही खजाने पर निर्भर रहने के बजाय टोपियां सिल कर और कुरान की हाथ से नकल करके पैसे कमाते थे. ऐसा कहा जाता है कि वे शाही खजाने को शासक की नहीं बल्कि जनता की संपत्ति मानते थे.
ऐसा कहा जाता है कि अपने बेटे आजम को लिखे आखिरी खत में औरंगजेब ने यह कहा था कि एक पापी के शरीर को ढंकने पर जनता का पैसा या फिर सरकारी खजाना खर्च नहीं किया जाना चाहिए.
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