अमेरिका हो या चीन, किसी के भी पास नहीं है इजरायल के इस हथियार का तोड़, आप भी जान लें खासियत
Israel Iron Beam: इजराइल के पास एक ऐसा हथियार है जिसका तोड़ अमेरिका और चीन के पास भी नहीं है. आइए जानते हैं क्या है इसकी खासियत.

Israel Iron Beam: एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी की दुनिया में यूनाइटेड स्टेट्स और चीन जैसी सुपर पावर हैडलाइंस में छाई रहती हैं. लेकिन इसके बावजूद भी मॉडर्न एयर डिफेंस में सबसे ज्यादा डीसरप्टिव इनोवेशन में से एक इजराइल से सामने आ रहा है. इस सिस्टम का नाम आयरन बीम है. यह डिफेंसिव लड़ाई में एक बड़ी छलांग है.
लेजर एनर्जी का इस्तेमाल
इंटरसेप्टर रॉकेट पर निर्भर रहने वाले ट्रेडिशनल मिसाइल डिफेंस सिस्टम के उलट आयरन बीम आने वाले खतरों को खत्म करने के लिए डायरेक्टेड लेजर एनर्जी का इस्तेमाल करता है. एक्सपर्ट्स इसे असली बैटलफील्ड कंडीशन के लिए डिजाइन किए गए पहले ऑपरेशनल लेजर बेस्ड एयर डिफेंस सिस्टम में से एक बताते हैं.
एक हथियार जो लाइट की स्पीड से हमला करता है
आयरन बीम की सबसे खास बात यह है कि यह लाइट की स्पीड से चलने वाली हाई एनर्जी लेजर बीम फायर कर सकता है. इससे यह रॉकेट, ड्रोन, मोर्टार और कम दूरी के प्रोजेक्टाइल को डिटेक्ट होने के लगभग तुरंत बाद ही इंटरसेप्ट कर सकता है.
मिसाइल इंटरसेप्टर को लॉन्च टाइम और फ्लाइट टाइम की जरूरत होती है, लेकिन यह लॉक होते ही लेजर स्ट्राइक कर देता है. इससे रिस्पांस टाइम काफी कम हो जाता है और इंटरसेप्शन एफिशिएंसी बढ़ जाती है.
हर शॉट की काफी कम कीमत
पारंपरिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम की सबसे बड़ी कमियों में से एक है कीमत. इसमें आयरन डोम भी शामिल है. हर इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत हजारों डॉलर या फिर उससे ज्यादा हो सकती है. आयरन बीम इस समीकरण को पूरी तरह बदल देता है. 1 लेजर शॉट में बिजली पर सिर्फ कुछ डॉलर खर्च होते हैं. ऐसे हालत में जहां एक साथ सैकड़ों रॉकेट या ड्रोन लॉन्च किए जाते हैं कीमत का फायदा काफी ज्यादा हो जाता है.
अनलिमिटेड गोला बारूद
मिसाइल बेस्ड सिस्टम फिजिकल स्टॉक पर काफी निर्भर होती है. एक बार इंटरसेप्टर खत्म हो जाने पर सिस्टम को फिर से सप्लाई करना पड़ता है. हालांकि आयरन बीम मुख्य रूप से बिजली पर निर्भर करती है. जब तक काफी पावर सोर्सेस सिस्टम फायरिंग जारी रख सकता है. मिसाइलों को रीलोड करने की कोई जरूरत नहीं होती.
कम से कम कोलेटरल डैमेज के साथ हाई प्रिसिजन
ऐसा कहा जा रहा है कि आयरन बीम 10 किलोमीटर तक की रेंज में टारगेट पर हमला कर सकता है. इसकी लेजर एनर्जी खतरे पर ठीक से फोकस होती है. जिससे आसपास के इलाकों को नुकसान पहुंचाने वाले मलबे का खतरा कम हो जाता है. लेकिन बीम को सख्ती से कंट्रोल किया जा सकता है.
यह यूनाइटेड स्टेट्स और चीन से आगे क्यों?
अमेरिका और चीन दोनों ही लेजर बेस्ड वेपन सिस्टम को एक्टिवली डेवलप कर रहे हैं. हालांकि ऐसा कहा जा रहा है कि ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट और इंटीग्रेशन में इजराइल अभी भी आगे है. इजराइल ने आयरन बीम को अपने मौजूदा मल्टी लेयर्ड एयर डिफेंस नेटवर्क में इंटीग्रेट किया है. इसमें आयरन डोम और डेविड्स स्लिंग जैसे सिस्टम शामिल हैं. यह लेयर्ड स्ट्रक्चर अलग-अलग रेंज और ऊंचाई पर खतरों को इंटरसेप्ट करने की सुविधा देता है. आयरन बीम को हमास और हिजबुल्लाह जैसे ग्रुप्स से रॉकेट और ड्रोन खतरों के खिलाफ असली लड़ाई वाले माहौल में पहले ही टेस्ट किया जा चुका है.
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Source: IOCL
























